Gujarat News: साणंद से भारत की टेक क्रांति का नया अध्याय, पीएम नरेंद्र मोदी ने माइक्रोन सेमीकंडक्टर फैसिलिटी का किया शुभारंभ
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद में माइक्रोन की सानंद सुविधा का उद्घाटन किया, जो 22,516 करोड़ रुपये का निवेश है जो भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र में तेजी लाएगा, हजारों नौकरियां पैदा करेगा और देश को डिजाइन से लेकर विनिर्माण तक एक वैश्विक हार्डवेयर केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अहमदाबाद के साणंद में माइक्रोन सेमीकंडक्टर फैसिलिटी का शुभारंभ किया। लगभग 22,516 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित यह परियोजना भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 20वीं सदी में तेल (ऑयल) वैश्विक अर्थव्यवस्था का नियामक था, जबकि 21वीं सदी में माइक्रोचिप यह भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि यह दशक भारत के टेक फ्यूचर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित होगा। "इंडिया इज रेडी, इंडिया इज रिलायबल एंड इंडिया डिलीवर्स" का संदेश देते हुए उन्होंने वैश्विक निवेशकों को भरोसा दिलाया कि भारत टेक्नोलॉजी नेतृत्व के लिए पूरी तरह तैयार है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि जून 2023 में इस परियोजना के लिए एमओयू हुआ, सितंबर में शिलान्यास हुआ और फरवरी 2026 में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो गया। उन्होंने कहा कि जहां कई देशों में ऐसी प्रक्रियाओं में वर्षों लग जाते हैं, वहीं भारत ने यह उपलब्धि लगभग 900 दिनों में हासिल की है।
उन्होंने कहा कि भारत अब केवल सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं है, बल्कि हार्डवेयर निर्माण में भी तेजी से अपनी पहचान स्थापित कर रहा है। सेमीकंडक्टर इंडस्ट्रियल रिवॉल्यूशन और एआई रिवॉल्यूशन के बीच सेतु का काम करेगा।
‘सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ पर जोर
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि लक्ष्य केवल एक फैक्ट्री स्थापित करना नहीं, बल्कि संपूर्ण इकोसिस्टम विकसित करना है। डिजाइन इंजीनियरिंग से लेकर मशीनरी, केमिकल्स और लॉजिस्टिक्स तक पूरी वैल्यू चेन पर फोकस किया जा रहा है। सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम के तहत अब तक 10 बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में बढ़ती मांग के कारण ‘मेक इन इंडिया’ अभियान नई गति से आगे बढ़ रहा है। पिछले 11 वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और निर्यात में कई गुना वृद्धि हुई है।
साणंद बनेगा सेमीकंडक्टर हब
प्रधानमंत्री ने साणंद से अपने पुराने जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि एक समय यहां ऑटोमोबाइल क्रांति की शुरुआत हुई थी और अब यह क्षेत्र सेमीकंडक्टर हब के रूप में उभर रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यहां काम करने आने वाले तकनीशियनों को गुजरात सरकार बेहतर जीवनशैली और सुविधाएं उपलब्ध कराएगी।
माइक्रोन के एटीएमपी (असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग) प्लांट का निरीक्षण करते हुए प्रधानमंत्री ने क्लीन रूम स्पेस और जल पुनर्चक्रण जैसी पर्यावरण अनुकूल व्यवस्थाओं की सराहना की।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल का संबोधन
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि साणंद में माइक्रोन प्लांट का शुभारंभ सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए नींव का पत्थर है। उन्होंने बताया कि गुजरात 2022 में सेमीकंडक्टर नीति घोषित करने वाला देश का पहला राज्य बना था।
उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल, डायमंड और फार्मा के बाद अब गुजरात एआई और सेमीकंडक्टर जैसे उभरते क्षेत्रों में ‘ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की प्रतिक्रिया
केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे ऐतिहासिक दिन बताया। उन्होंने कहा कि छह दशकों का सपना अब साकार हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में पिछले दशक में छह गुना वृद्धि और निर्यात में आठ गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा कि ‘सेमीकंडक्टर 2.0’ के माध्यम से भारत डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक संपूर्ण इकोसिस्टम विकसित करेगा।
भारत-अमेरिका सहयोग का प्रतीक
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने इसे भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह प्लांट अमेरिकी टेक्नोलॉजी और भारतीय मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के समन्वय का उदाहरण है।
माइक्रोन टेक्नोलॉजी के सीईओ संजय मेहरोत्रa ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि एआई युग में डेटा के लिए मेमोरी और स्टोरेज अनिवार्य है और यह प्लांट वैश्विक जरूरतों को पूरा करेगा।
रोजगार और उत्पादन क्षमता
माइक्रोन प्लांट में एसएसडी, डीआरएएम और एनएएनडी जैसे आधुनिक मेमोरी और स्टोरेज उत्पाद बनाए जाएंगे। यह प्लांट विश्व के सबसे बड़े क्लीन रूम स्पेस वाली इकाइयों में से एक है।
वर्तमान में यहां 2000 से अधिक लोग कार्यरत हैं, जो भविष्य में बढ़कर 5000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार तक पहुंच सकते हैं। विशेष रूप से दिव्यांगजनों को भी रोजगार के अवसर दिए जा रहे हैं। साणंद में यह निवेश भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।












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