'मिच्छामी दुक्कड़म' का मतलब क्या है? जिसका पीएम मोदी ने नए संसद भवन के अपने पहले संबोधन में किया जिक्र
Michhami Dukkadam in Parliament Special Session 2023: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को पुराने संसद भवन के सेंट्रल हॉल में समापन भाषण देने के बाद नई संसद भवन की कार्यवाही को भी संबोधित किया है। इस दौरान पीएम मोदी ने सभी सांसदों और देशवासियों से 'मिच्छामी दुक्कड़म' कहा है।
'मिच्छामी दुक्कड़म' का मतलब क्या है?
मिच्छामी दुक्कड़म प्राकृत भाषा से लिया गया शब्द है, जिसका जैन धर्म में बहुत ही विशेष और पवित्र महत्त्व है। यह दो शब्दों से मिलकर बना है- मिच्छामी और दुक्कड़म। इसमें मिच्छामी का अर्थ होता है, क्षमा मांगना; और दुक्कड़म का अर्थ होता है जाने-अनजाने में हुई कोई भी गलती या भूल या बुरे कर्मों के लिए। यानी 'मिच्छामी दुक्कड़म' का अर्थ है, जाने-अनजाने हुए गलत कर्मों के लिए क्षमा याचना करना।

मंगलवार को ही है संवत्सरी महापर्व
इस साल जैन धर्म के श्वेताबंरों के 11 सितंबर से ही पर्युषण पर्व मनाए जा रहे थे। यह पर्व 8 दिवसीय होता है। इसकी समाप्ति के बाद आखिरी दिन संवत्सरी महापर्व मनाने की परंपरा रही है। इस हिसाब से 19 सितंबर यानी मंगलवार को ही संवत्सरी महापर्व मनाया जा रहा है। इस पर्व का सार ये है कि 'मेरा किसी के साथ कोई बैर नहीं है और सभी से मेरी दोस्ती या मैत्री' है।
सारे गिले-शिकवे दूर करने का होता है अवसर
मतलब धार्मिक भावना ये है कि संवत्सरी महापर्व के समापन के अवसर पर 'मिच्छामी दुक्कड़म' कहने से सारे गिले-शिकवे दूर होते हैं और जाने-अनजाने में हुई भूलों से भी बाहर निकलने का रास्ता मिल जाता है। इसे मन का मैल दूर करने में सहायता मिलती है और लोग मिलजुल कर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होते हैं।
पीएम मोदी ने नए संसद भवन में क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन में जब 'मिच्छामी दुक्कड़म' शब्द का इस्तेमाल किया, तब उन्होंने भी इसके माध्यम से सदस्यों से पुरानी कड़वाहटों को दूर करके आगे बढ़ने की ही अपील कर रहे थे। इस दौरान वे बोले की मेरी ओर से सभी को 'मिच्छामी दुक्कड़म'।
अपने संबोधन के दौरान वे बोले, 'आज ही संवत्सरी भी मनाई जाती है.... ये एक अद्भुत परंपरा है.... आज वह दिन है, जब हम 'मिच्छामी दुक्कड़म' कहते हैं। इससे हमें किसी ऐसे व्यक्ति से क्षमा मांगने का मौका मिलता है, जिसे हमने जाने या अनजाने में ठेस पहुंचाई है....... मैं भी कहना चाहता हूं 'मिच्छामी दुक्कड़म'.......संसद के सभी सदस्यों और देश के लोगों को......'
इस तरह से पीएम मोदी ने बहुत ही सही मौके पर एक उचित परंपरा का निर्वाह करते हुए देश की संसदीय व्यवस्था के लिए नई पहल की है।












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