MHA ने सभी राज्यों के जेल को लेकर दिया सुझाव, कट्टर कैदियों को बाकियों से अलग रखा जाए
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र लिखकर कहा है कि कट्टर कैदियों को बाकी के कैदियों से अलग रखा जाए क्योंकि वह बाकी कैदियों को प्रभावित कर सकते हैं।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सुझाव दिया है कि उनकी जेलों में जो कैदी कट्टरता को बढ़ावा देने वाले हैं और दूसरे कैदियों को इसके लिए प्रभावित कर सकते हैं उनपर खास ध्यान दें। गृह मंत्रालय ने कहा है कि ऐसे कैदियों पर ध्यान देने के साथ उन्हें बाकी के कैदियों से अलग रखा जाना चाहिए। इसके साथ ही गृह मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि जो कैदी नारकोटिक्स, ड्रग स्मगलिंग जैसे मामलों से जुड़े हैं उन्हें भी दूसरे कैदियों से अलग रखा जाना चाहिए, ऐसे कैदियों को बाकी के कैदियों के संपर्क में नहीं आने देना चाहिए क्योंकि यह कैदी दूसरे कैदियों को इन चीजों के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।
गृह मंत्रालय ने कहा है कि कट्टरता को बढ़ावा देने वाले कैदियों के साथ खास सेशन किया जाना चाहिए और उन्हें अपने बर्ताव में बदलाव लाने के लिए एक्सपर्ट के सेशन में भेजना चाहिए। ऐसे कैदियों को तय समय अंतराल पर इस तरह के सेशन में भेजना चाहिए। ऐसा करने से भटके हुए अपराधियों की सोच में बदलाव किया जा सकता है। गृह मंत्रालय के इस सर्कुलर को 9 जनवरी को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजा गया है। यह पत्र राज्यों के अडिशनल चीफ सेक्रेटरी और मुख्य सचिव को भेजा गया है। इसके साथ ही प्रदेश के डीजीपी और इंस्पेक्टर जनरल जेल को भी भेजा गया है।
जेल के मैनेजमेंट को बेहतर करने के लिए भी गृहमंत्रालय ने सुझाव दिया है। गृह मंत्रालय ने कहा है कि जेलों को मॉडल प्रिजन मैन्युअल 2016 को लागू करना चाहिए और जेल में इस मैन्युअल के आधार पर सुधार लाना चाहिए। जेल में जब कैदी आए तो उसके साथ जो पत्र जेल में पहुंचता है उसके आधार पर कैदियों का वर्गीकरण हो, महिला, युवा अपराधी, अंडर ट्रायल, दोषी, अधिक खतरे वाले कैदियों को अलग-अलग रखा जाए। इन लोगों को बाकी के कैदियों की सुरक्षा के मद्देनजर अलग रखा जाए।
गृह मंत्रालय के पत्र में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इस मैन्युअल को लागू नहीं किया है, लिहाजा आपको इस दिशा में काम करना चाहिए और जरूरी कदम उठाने चाहिए ताकि जेल के मैनेजमेंट को बेहतर किया जा सके। जेल में खाली पड़े पदों को भरना चाहिए। बता दें कि इस मैन्युअल के जरिए केंद्र सरकार सभी जेलों में एक जैसा मैनेजमेंट और नियम लागू करना चाहती है लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी ऐसा नहीं हो सका है। गृह मंत्रालय का कहना है कि देश की 1102 जेलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा से लैस हैं।
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