Menaka Guruswamy: कौन हैं मेनका गुरुस्वामी , जो बनीं भारत की पहली LGBTQ सांसद? क्या होते हैं Openly Queer?
Menaka Guruswamy: डॉ. मेनका गुरुस्वामी सोमवार को भारत की पहली 'ओपनली क्वीर' सांसद बनकर इतिहास रच दिया है, जैसे ही उन्होंने शपथ ली, वो सोशल मीडिया पर काफी चर्चित हो गईं और लोग उन्हें बधाई देने लग गए, इस वक्त पूरा सोशल मीडिया उनकी बधाई से भरा हुआ है।
आपको बता दें कि'ओपनली क्वीर'का मतलब होता है ऐसे लोग जो अपनी लैंगिक पहचान या जेंडर पहचान ) को समाज के सामने खुलकर स्वीकार करते हैं और छिपाते नहीं हैं, इसमें में LGBTQ+ समुदाय के सभी लोग आते हैं (जैसे गे, लेस्बियन, बायसेक्शुअल, ट्रांसजेंडर आदि)।

Menaka Guruswamy Profile: कौन हैं डॉ. मेनका गुरुस्वामी?
27 नवंबर 1974 को हैदराबाद में जन्मी डॉ. मेनका गुरुस्वामी सुप्रीम कोर्ट की एक जानी-मानी वकील हैं। भारतीय न्यायपालिका और मानवाधिकारों के क्षेत्र में मेनका गुरुस्वामी एक ऐसा नाम है, जो न केवल कानूनी पेचीदगियों को सुलझाने के लिए जाना जाता है, बल्कि सामाजिक बदलाव की एक सशक्त आवाज भी बन चुका है। वह पश्चिम बंगाल से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के टिकट पर उच्च सदन में पहुंची हैं।
कोलंबिया लॉ स्कूल में रही हैं रिसर्च स्कॉलर
मेनका साल 2017 से 2019 तक न्यूयॉर्क के कोलंबिया लॉ स्कूल में बी.आर. अंबेडकर रिसर्च स्कॉलर और लेक्चरर रह चुकी हैं। वो येल लॉ स्कूल, न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लॉ और यूनिवर्सिटी ऑफ़ टोरंटो फैकल्टी ऑफ़ लॉ में विज़िटिंग फैकल्टी भी रही हैं।

कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया
वह सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष कई ऐतिहासिक मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए जानी जाती हैं, जिनमें धारा 377 मामला, नौकरशाही सुधार मामला, अगस्ता वेस्टलैंड रिश्वत मामला, सलवा जुडूम मामला और शिक्षा का अधिकार मामला शामिल हैं।

Menaka Guruswamy की पहचान मुख्य रूप से उन मामलों से जुड़ी है, जिन्होंने भारतीय समाज की दिशा बदल दी, जो कि निम्नलिखित हैं...
- धारा 377 का खात्मा: मेनका गुरुस्वामी को 2018 के ऐतिहासिक फैसले का श्रेय दिया जाता है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 को आंशिक रूप से रद्द कर समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था।
- शिक्षा का अधिकार (RTE): मेनका गुरुस्वामी ने 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम' की संवैधानिक वैधता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाई लड़ी, ताकि समाज के वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में आरक्षण मिल सके।
- पुलिस सुधार और मानवाधिकार: मेनका गुरुस्वामी ने मणिपुर में न्यायेतर हत्याओं (Extra-judicial killings) के खिलाफ आवाज उठाई और सुरक्षा बलों द्वारा की जाने वाली ज्यादतियों पर सवाल खड़े किए है और वो लगातार वहां के मुद्दे उठा रही हैं, जिसके कारण वो कुछ राजनीतिक पार्टियों की ओर से आलोचना का भी शिकार हुई हैं।












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