समुद्र में 29 दिनों तक भटकते रहे 2 दोस्त, जिंदा रहने के लिए करना पड़ा ये काम

नई दिल्ली, अक्टूबर 11: लोग अक्सर एडवेंचर के लिए समुद्र में यात्राएं करते हैं। लेकिन कई बार ये एडवेंचर लोगों की जिंदगी के लिए खतरा बन जाते हैं। एक ऐसी ही चौंकाने वाली घटना सामने आई है। समुद्री यात्रा के दौरान दो युवक रास्ता भटक गए। दोनों ने कहा कि वे बारिश के पानी, संतरे और नारियल पानी से उन दिनों अपना गुजारा कर रहे थे, ताकि वो हाइड्रेटेड रह सकें। हालांकि उन्हें रेस्क्यू कर लिया गया।

एक छोटी मोटरबोट पर न्यू जॉर्जिया द्वीप के लिए निकले थे 2 दोस्त

एक छोटी मोटरबोट पर न्यू जॉर्जिया द्वीप के लिए निकले थे 2 दोस्त

ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से कुछ सौ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है सोलोमन द्वीपसमूह। छोटे-छोटे टापूओं और हरी-भरी वादियों वाले इस देश में हर साल बड़ी संख्या में टूरिस्ट भी आते हैं। यहां पर एक द्वीप से दूसरे द्वीप तक जाने के लिए लोग मोटरबोट का इस्तेमाल करते हैं। दो दोस्तों को ऐसी ही एक द्वीप पर जाने के लिए मोटरबोट का इस्तेमाल करना महंगा पड़ गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि लिवे नानजिकाना अपने दोस्त जूनियर कोलोनी के साथ 3 सितंबर को मोनो द्वीप से 60-हॉर्सपावर की एक छोटी मोटरबोट पर न्यू जॉर्जिया द्वीप के लिए निकले थे।

भारी बारिश के चलते बिगड़ गई वोट

भारी बारिश के चलते बिगड़ गई वोट

लेकिन जब उनके ट्रैकर ने काम करना बंद कर दिया। एक एडवेंचर जर्नी अचानक से जिंदा रहने की लड़ाई में बदल गई। इस दौरान दोनों दोस्त रास्ता भटक गए। जबकि वे दोनों नाविक थे। द गार्जियन की एक रिपोर्ट के अनुसार, दोनों दोस्तों ने बताया कि उन्होंने पहले भी समुद्री यात्राएं की हैं। लेकिन, इस बार भारी बारिश और तेज हवा ने उनके जहाज को खराब कर दिया। उनके बोट का जीपीएस ट्रैकर खराब हो गया। जिसके चलते वे मोनो द्वीप से 400 किलोमीटर उत्तर पश्चिम में पहुंच गए।

संतरों और बारिश के पानी से जिंदा रहे दोनों शख्स

संतरों और बारिश के पानी से जिंदा रहे दोनों शख्स

चंद घंटों में खत्म होने वाले के इस सफर के लिए उन्होंने अपने पास संतरे की एक बोरी के अलावा कोई दूसरा खाना या पानी तक नहीं रखा था। इन दोनों नाविकों ने संतरे, समुद्र से इकट्ठा किए गए नारियल और एक छोटे से कैनवास के जरिए बचाए गए बारिश के पानी का इस्तेमाल किया। लगातार वे समुद्र से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें किसी भी तरह की कोई मदद नहीं मिल पा रही थी।

ऐसे बची जान

ऐसे बची जान

29वें दिन उन्होंने देखा कि लकड़ी की डोंगी में एक मछुआरा दोनों की मोटरबोट से थोड़ी दूरी पर घूम रहा था। हालांकि दोनों ने मछुआरे का ध्यान अपनी ओर खींचने का प्रयास किया, बदकिस्मती उनकी ये कोशिश भी असफल साबित हुई। आखिरकार मछुआरे ने खुद ही दोनों को देखा। जैसे ही मछुआरे ने हमारी ओर देखा, हम चिल्लाने लगे और लगातार अपने हाथों से इशारा कर रहे थे। जैसे ही वह हमारे पास पहुंचा, हमने उससे पूछा- अब हम कहां हैं? और उसने जवाब दिया," पीएनजी। हमारी जान में जान आया और हमे लगा, ओह अब हम सुरक्षित हैं।

रेस्क्यू के दौरान ठीक से नहीं चल पा रहे थे दोनों शख्स

रेस्क्यू के दौरान ठीक से नहीं चल पा रहे थे दोनों शख्स

ये दोनों नाविक इतने कमजोर हो गए थे कि इन्हें नाव से घर तक सहारा देकर लाना पड़ा। घर वापसी के बाद नंजिकाना ने कहा, "मुझे नहीं पता था कि जब मैं वहां था तो क्या चल रहा था। मैंने कोविड या कुछ और के बारे में नहीं सुना। मैं घर वापस जाने के लिए उत्सुक हूं, लेकिन मुझे लगता है कि यह सब कुछ से एक अच्छा ब्रेक था।

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