महबूबा की बेटी इल्तिजा मुफ्ती से छीनी जा सकती है SSG सुरक्षा, लगे हैं गंभीर आरोप

नई दिल्ली- महबूबा मुफ्ती की बेटी पर खतरे के मद्देनजर उन्हें स्पेशल सिक्योरिटी ग्रुप की सुरक्षा मुहैया कराई गई है। लेकिन, हो सकता है कि जल्द ही उनसे यह सुरक्षा कवर छीन ली जाए। सिर्फ उन्हीं से नहीं उनके मामा तसद्दुक मुफ्ती को भी यही सुरक्षा मुहैया कराई गई है और उन्हें भी इसे हटाने के संबंध में नोटिस दिया जा चुका है। इल्तिजा पर आरोप है कि वह एसएसजी के सिक्योरिटी प्रोटोकॉल का जानबूझकर उल्लंघन करती रहती हैं, जिससे उनकी सुरक्षा में लगे सुरक्षाकर्मियों के लिए कई बार असहज स्थिति पैदा हो जाती है। ध्यान देने वाली बात ये है कि खुद इल्तिजा भी आरोप लगा चुकी हैं कि सिक्योरिटी से उनकी निजता भंग हो रही है।

इल्तिजा से वापस ली जा सकती है एसएसजी कवर

इल्तिजा से वापस ली जा सकती है एसएसजी कवर

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती पर बार-बार सिक्योरिटी प्रोटोकॉल तोड़ने के आरोप लग रहे है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक उनपर आरोप लग रहे हैं कि वो सिर्फ सुरक्षा प्रोटोकॉल ही नहीं तोड़ती हैं, बल्कि अपने व्यवहार से एसएसजी के जवानों और अफसरों के सामने बड़ी ही अजीब स्थिति पैदा कर देती हैं। उनकी इस तरह की हरकतों को देखते हुए एसएसजी की ओर से पिछले 23 जनवरी को गृह विभाग को खत लिखने की जानकारी मिली है, जिसमें एसएसजी डायरेक्टर ने उनसे एसएसजी सुरक्षा कवर हटाने की गुजारिश की है। उनके अलावा महबूबा के भाई तसद्दुक मुफ्ती से भी एसएसजी सुरक्षा कवर हटाने के संबंध में 10 जनवरी को नोटिस दिया गया है। गौरतलब है कि जिस दिन एसएसजी निदेशालय ने गृह विभाग को ये खत भेजा, इल्तिजा ने अपनी मां के ट्विटर हैंडल के जरिए आतंकियों के साथ पकड़े गए डीएसपी देविंदर सिंह का हवाला देते हुए आरोप लगाया था कि, 'कश्मीर में गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखने और प्रताड़ित करने के बाद अब मुझे दिल्ली में एसएसजी की ओर से तंग किया जा रहा है। एसएसजी सीधे गृहमंत्रालय को रिपोर्ट करती है। मेरी आजादी और निजता के अधिकार को सिक्योरिटी की आड़ में भंग किया जा रहा है।' माना जा रहा है कि अगर मामा-भांजी की एसएसजी सुरक्षा हटाई जाती है तो उसकी जगह उन्हें दूसरी सुरक्षा मुहैया कराई जा सकती है।

इल्तिजा पुलिस-प्रशासन पर लगा चुकी हैं गंभीर आरोप

इल्तिजा पुलिस-प्रशासन पर लगा चुकी हैं गंभीर आरोप

पिछले महीने की शुरुआत में ही इल्तिजा ने आरोप लगाया था कि वह अपने नाना और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की कब्र पर जाना चाहती थीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें उनके घर पर ही रोक लिया। उन्होंने कहा था कि उन्होंने अनंतनाग जिले के बिजबेहरा इलाके में अपने नाना की कब्र पर जाने की इजाजत मांगी थी, लेकिन मुझे घर पर ही रोक दिया गया और कहीं जाने की इजाजत नहीं दी गई। हालांकि, जम्मू-कश्मीर के एडिश्नल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (लॉ एंड ऑर्डर) मुनीर खान ने उनके आरोपों को खारिज कर दिया था और कहा था कि अनंतनाग जिला प्रशासन ने उनके वहां जाने को मंजूरी ही नहीं दी। खान ने तब कहा था, 'हमें यह बात भी ध्यान में रखना है कि वह एक एसएसजी प्रोटेक्टी हैं, जिन्हें कहीं जाने के लिए पुलिस से मंजूरी लेनी जरूरी है।' लेकिन, इजाजत नहीं मिलने पर उन्होंने पुलिस-प्रशासन पर जमकर भड़ास निकाली थी। उन्होंने तब कहा था, 'क्या एक ग्रैंडडाउटर का अपने ग्रैंडफादर की कब्र पर जाना कोई अपराध है या वे सोचते हैं कि वहां पत्थरबाजी करवाने जा रही हूं या विरोध करने के लिए....। 'उन्होंने आरोप लगाया था कि वे (सरकार) घाटी में शांति चाहते ही नहीं हैं।

सरकार पर लगाया है आवाज दबाने का आरोप

सरकार पर लगाया है आवाज दबाने का आरोप

बता दें कि इल्तिजा पिछले साल 20 सितंबर से ही अपनी मां के ट्विटर हैंडल का इस्तेमाल सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए करती आ रही हैं। उन्होंने हाल ही में महबूबा के ट्विटर हैंडल पर लिखा है, 'ठीक 6 महीने पहले, तब मैं बेबसी के साथ देखती रही, जब अधिकारी मेरी मां को ले गए। दिन हफ्तों में बदल गए और हफ्ते महीनों में, कश्मीर में अब तक राजनीतिक नेता गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में हैं। ये एक बुरे सपने जैसा है। सरकार अपने ही लोगों की आवाज दबा रही है।' वो यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने आरोप लगाया कि 'भारत के विचार पर हमला हो रहा है और इस दौरान चुप रहना आपराधिक सहभागिता है।' उन्होंने दावा किया कि इस संकट के आर्थिक और मानसिक असर ने जम्मू-कश्मीर को कमजोर कर दिया है। उनके मुताबिक अभी भी कुछ नहीं बदला है। उन्होंने आगे लिखा- मैं लड़ना जारी रखूंगी और एक पीड़ित कश्मीरी के तौर पर बोलती रहूंगी। एक बेटी के तौर पर हर दिन अपनी मां के वापस घर आने तक। जो भारत को महान बनाता है वो यहां की विविधता है, समानता और भाईचारा है। इन मूल्यों की रक्षा के लिए एक जन आंदोलन शुरू किया गया है, जिसके साथ मैं मजबूती से खड़ी हूं।

महबूबा को सरकारी बंगले में शिफ्ट किया गया है

महबूबा को सरकारी बंगले में शिफ्ट किया गया है

बता दें कि पिछले साल 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से धारा-370 हटाने के बाद से प्रदेश के बड़े नेता अभी भी हिरासत में हैं, उनमें इल्तिजा मुफ्ती की मां महबूबा मुफ्ती के अलावा, नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुला भी शामिल हैं। बुजुर्ग अब्दुल्ला को श्रीनगर के गुपकर रोड स्थित उनके निजी आवास में ही हिरासत में रखा गया है, जबकि उनके बेटे और पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला हरि निवास में हिरासत में रोककर रखा गया है। महबूबा मुफ्ती को भी पहले चश्मेशाही हट में रखा गया था, लेकिन बाद में उन्हें श्रीनगर के मुख्य इलाके में सरकारी बंगले में शिफ्ट कर दिया गया है। फारूक अब्दुल्ला पर पहली बार 17 सितंबर को पब्लिक सेफ्टी ऐक्ट लगाया गया था, जिसमें 16 दिसंबर,2019 को और तीन महीने के लिए बढ़ा दिया गया था।

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