'मैं महज 5 साल की थी, जब उस पादरी ने मुझे अपना निजी अंग दिखाया और कहा...'
महिला की उम्र इस समय 44 साल है। महिला के आरोपों पर संज्ञान लेते हुए एक कैथोलिक समूह ने कहा है कि वह इस मामले की आंतरिक जांच कराएगा।
नई दिल्ली। यौन शोषण की घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाने के लिए मीटू मूवमेंट अब महिलाओं का प्रमुख मंच बनता जा रहा है। मीटू मूवमेंट में बॉलीवुड और मीडिया जगत की दिग्गज हस्तियों के घिरने के बाद अब चर्च के दो पादरियों पर यौन शोषण के आरोप लगे हैं। मेघालय के खासी समुदाय की एक महिला ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर चर्च के दो पादरियों पर आरोप लगाते हुए कहा है कि इन दोनों ने दशकों पहले उस वक्त उसका यौन शोषण किया, जब वह नाबालिग थी। महिला की उम्र इस समय 44 साल है। महिला के आरोपों पर संज्ञान लेते हुए एक कैथोलिक समूह ने कहा है कि वह इस मामले की आंतरिक जांच कराएगा।

'वो लगातार मेरा शोषण करता रहा'
इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक इस महिला ने सोशल मीडिया पर लिखे अपने आरोपों में कहा है, 'उस वक्त मेरी उम्र महज पांच साल की रही होगी। उनमें से एक पादरी ने एक दिन मुझे अपने पास बुलाया और अपना निजी अंग दिखाते हुए कहा कि इस छुओ। इसके बारे में जब मैंने अपने परिवार के एक सदस्य को बताया तो उसने मुझे थप्पड़ मारा और कहा कि इस तरह की कहानी आगे से फिर मत बनाना। मैं बेहद डर गई। इसके बाद भी मुझपर उस पादरी का शोषण जारी रहा। लेकिन...फिर मैंने उससे मिलने से मना करने और उससे बात करने की हिम्मत जुटाई, क्योंकि मुझे गर्भवती होने का डर था। वो आदमी इन दिनों पश्चिम बंगाल में है।'

'वो हमारी जांघ पर हाथ फेरते हुए हमें ऊपर उठा लेता'
महिला ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा है, 'दूसरा पादरी अक्सर मुझे और दूसरे बच्चों को अपनी टेबल की दराज से टॉफियां लेने के लिए बुलाता था। जब हम लोग उसकी दराज से टॉफी निकालते तो वो हमारी जांघ पर हाथ फेरते हुए हमें ऊपर उठा लेता। वह ये सब उस वक्त करता था, जब बड़े बच्चे टेबल के दूसरी तरफ खड़े होते थे। मैंने इस दूसरे पादरी की हरकतों के बारे में अपने परिवार के किसी सदस्य को कभी नहीं बताया क्योंकि इससे बड़ा यौन शोषण मैं पहले पादरी के हाथों झेल चुकी थी। शायद इसीलिए मुझे उस वक्त वो सब बिल्कुल भी गंभीर नहीं लगा। इस सब के बावजूद वो पादरी शिलांग में धार्मिक कार्य करता रहा।'

'मैंने तीन बार आत्महत्या करने की भी कोशिश की'
महिला ने अपने साथ हुई इस वीभत्स घटना के बारे में बताते हुए लिखा है, 'वो मेरे बचपन का दुख और अंधकार से भरा एक बेहद बुरा दौर था। मैंने एक लंबे समय तक डर और गहरी शर्मिंदगी के बीच अपना बचपन बिताया। मैं एक गहरे सदमें में थी और मैंने तीन बार आत्महत्या करने की भी कोशिश की। मुझे बेहद गंभीर हालत में दो बार अस्पताल भी ले जाया गया। लेकिन...अब यौन शोषण की घटनाओं के खिलाफ वैश्विक स्तर पर मीटू मूवमेंट छिड़ने पर मुझे इंसाफ की उम्मीद जगी है। मेरे अंदर एक भरोसा जगा है कि अब मुझे भी न्याय मिलेगा।'












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