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जज का फैसला- तलाक चाहिए तो कुल्लू, मनाली और शिमला घूम कर आइये

जयपुर। कोर्ट को किसी भी लोकतंत्र का सबसे मजबूत स्तंभ कहा जाता है। इनकी जिम्मेदारी सिर्फ न्याय करना नहीं बल्कि समाज को मजबूत करने और उसे जोड़े रखने का भी कर्तव्य है जिसे राजस्थान कोर्ट के जज बखूबी निभाते हैं और एक मिशाल कायम करते हैं।

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राजस्थान के श्रीगंगानगर के पारिवारिक कोर्ट में जज राजेंद्र शर्मा अपने अलग अंदाज के लिए काफी सुर्खियां बटोर रहे हैं। जी हां तलाक की अर्जी देने वालों को जज राजेंद्र शर्मा कुछ अलग ही न्याय देते हैं। जब भी कोई दंपति जज राजेंद्र शर्मा की कोर्ट में तलाक के लिए पहुंचता है तो वह उन्हें तलाक देने की बजाए दंपति को साथ में घूमने और लंच करने की सलाह के साथ वापस भेज देते हैं।

गौर करने वाली बात है जज राजेंद्र शर्मा तीन महीने पहले ह जज नियुक्त हुए हैं और इस दौरान उन्होंने 308 मामलों का निपटारा कर दिया है। इनमें से अधिकतर मामले तलाक के ही थे। पिछले कुछ दिनों पहले जब राहुल और नैंसी नाम के दंपति ने तलाक की अर्जी दी तो जज ने दोनों को अकेले और फिर परिवार के सामने समझाया लेकिन जब दोनों दंपति नहीं मानें तो उन्होंने दंपति को कुल्लू घूमने के लिए भेज दिया।

जज ने कहा कि जब दंपति घूमकर वापस आयेंगे उसके बाद ही वह अपना फैसला देंगे। लेकिन घूमकर वापस लौटने के बाद दंपति ने तलाक की अर्जी वापस ले ली। यही नहीं एक अन्य दंपति को भी जज ने शिमला घूमने भेजा और वापस लौटने के बाद उन्होंने दंपति द्वारा बिताये समय की बात की और उन्हें समझाया जिसके बाद दंपति ने तलाक लेने से इनकार कर दिया। यही नहीं ऐसे कई मामले हैं जिसमें जज साहब ने ऐसे ही नायाब तरीकों से तलाक के मामले बिना तलाक दिये निपटा दिये।

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