ISRO ने पहले प्रयास में लगाईं थी मंगल पर छलांग, पूरी दुनिया हो गई थी हैरान, जानें क्या था मिशन Mangalyaan?
Mission Mangalyaan: चंद्रयान-3 की सफलता के बाद भारत चांद के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला पहला देश बन चुका है। जो काम अब तक बड़ी-बड़ी सुपरपावर नहीं कर पाई, भारत ने अपने मून मिशन चंद्रयान-2 के असफल होने के चार साल के भीतर कर दिखाया। इससे पहले भारत ने अपने पहले ही प्रयास में मंगल पर भी सफलता हासिल की थी।
भारत की ओर से भेजा गया मंगलयान दुनिया का पहला ऐसा मंगल मिशन था, जो अपने पहले ही प्रयास में सफल साबित हुआ। एक झटके में भारत ने मंगल पर सीधी छलांग लगाकर उस वक्त भी पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था।

सितंबर 2014 में पहुंचा मंगल ग्रह
इसरो ने 5 नवंबर, 2013 को मंगलयान (मार्स ऑर्बिटर मिशन) लॉन्च किया, जो 24 सितंबर 2014 तक मंगल ग्रह की कक्षा में स्थापित हो गया। इस मिशन के सफल होने के बाद भारत दुनिया का पहला देश बन गया था, जो एक बार में ही मंगल ग्रह पर पहुंच गया था।
8 साल तक किया उपग्रह ने काम
हालांकि उपग्रह को केवल छह महीने के लंबे मिशन के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन इसने 8 सालों तक शानदार काम करते हुए डेटा भेजा। हालांकि साल अक्टूबर 2022 में ISRO के मंगलयान मिशन का अंत हो चुका था. करीब 8 साल 8 दिन के बाद मंगलयान का ईंधन और बैटरी खत्म हो चुकी थी। जिसके बाद उसकी कोई खबर नहीं आई।
मंगल से जुड़ी अहम जानकारी मिली
इसरो के मंगलयान का मकसद मंगल ग्रह के चारों ओर एक कक्षा स्थापित करना था। 15 किलोग्राम वजन वाले मार्स ऑर्बिटर मिशन में पांच पेलोड्स थे। इनका काम मंगल ग्रह की भौगोलिक, बाहरी परतों, वायुमंडलीय प्रक्रियाओं, सतह के तापमान आदि की जांच करना था।
मंगलयान से इसरो के मुताबिक वैज्ञानिको ने सतह भूविज्ञान, आकृति विज्ञान, वायुमंडलीय प्रक्रियाओं, सतह के तापमान और वायुमंडलीय पलायन प्रक्रिया पर डेटा मिला है। इस अभियान से ऐसे डेटा भी मिले हैं, जिससे हमारी और दुनिया की मंगल ग्रह के बारे में समझ बदल गई। वहीं मंगलयान के मार्स कलर कैमरे से ली गईं तस्वीरों में से 1000 से भी ज्यादा फोटो से मार्स एटलस तैयार किया गया है।












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