जम्मू कश्मीर में 10 वर्षों के भीतर कई बड़े बदलाव, केंद्र की पहल से जीवन स्तर में कितना सुधार?
जम्मू कश्मीर में एक दशक बाद चुनाव होने जा रहे हैं। ऐसे में चर्चा इस बीच की है कि पिछले एक दशक में एक विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त प्रांत अगर केंद्र शासित राज्य बना तो यहां केंद्र सरकार वो कौन-कौन से प्रयास हैं, जिनके चलते आतंकवाद से ग्रस्त क्षेत्र में बड़े बदलाव आए। एक बार फिर से झीलों, पहाड़ों का क्षेत्र पर्यटकों से गुजजार हो रहा है।
अगर एक दशक पूर्व जम्मू कश्मीर के हालात की चर्चा करें तो यहां पर्यटक जाने से कतराते थे। सोचिए कि जिस क्षेत्र को धरती का स्वर्ग कहा जाता है, वहां से टूरिस्ट ने दूरी क्यों बना ली थी? इसका जवाब सिर्फ एक ही था, वहां आतंकवाद और टारगेटेड किलिंग जैसी घटनाएं उन दिनों आम थीं। लेकिन पिछले 10 वर्षों की तुलना अगर पिछले 60 वर्षों के शासन से जाए तो फर्क साफ नजर आएगा। आज यहां कोई भी लाख प्रयास कर ले युवाओं को जबरन पत्थर नहीं थमा सकता।

जम्मू कश्मीर कभी ऐसा राज्य था, जहां पर दो ध्वज का मान्यता दी जा रही थी, लेकिन यहां से धारा 370 हटने के बाद हालात में धीरे- धीरे कई बड़े बदलाव देखे गए। छिटपुट हिंसा, आतंकी घटनाओं (जिसमें कुछ बड़े आतंकी हमले भी शामिल हैं) के अलावा पिछले एक दशक में पाकिस्तान की सीमा से सटे केंद्र शासित प्रदेश धीरे- धीरे शांति को ओर बढ़ रहा है।
जम्मू कश्मीर में डोडा, पुंछ, राजौरी जैसे कुछ क्षेत्र ऐसे हैं, जहां आए दिन आतंकी घटनाएं सामने आती थीं। पिछले 10 वर्षों के भीतर सेना और सुरक्षा बलों के मुस्तैदी और आतंकियों पर नकेल कसने के लिए केंद्र की खुली छूट के चलते घाटी में हालात काफी बदल चुके हैं।
पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विकास पर फोकस
केंद्र शासित प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विकास, कनेक्टिविटी में सुधार और पर्यटन को बढ़ावा देने पर सरकार ने फोकस किया है। पिछले एक दशक में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यात्रियों का आवागमन यहां काफी बढ़ा है। केंद्र ने जम्मू कश्मीर में नए राजमार्गों, हवाई अड्डों और रेल संपर्कों के विकास को प्रमुखता दी है। जिसके चलते पर्यटकों के लिए राज्य की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत तक पहुंच काफी आसान हो पाई है।
केंद्र ने पूरी की यूटी की मांग
विकास के बात करें तो जम्मू कश्मीर भारत के विभाजन के कुछ वर्षों बाद से ही हिंसा से ग्रस्त क्षेत्र बना हुआ था। पिछले कई वर्षों से यहां प्रायोजित आतंकवाद लगातार क्षेत्र में दहशत, नफरत का पर्याय बना हुआ था। ऐसे में केंद्र ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 को हटाने का फैसला 5 अगस्त 2019 के दिन लिया। राज्य से विशेष राज्य का दर्जा छिनने के साथ कई जगह विरोध और हिंसा की संभावनाओं को देखते हुए केंद्र ने पूरी तैयारी के साथ बड़ा निर्णय लिया।
5 अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर बना भारत का अभिन्न अंग
जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटते ही राज्य पूरी तरह से भारत का अंग बना। इसके बाद यहां निवेश, आर्थिक वृद्धि और विकास के अवसर खुल गए। केंद्र के इस फैसले के साथ जम्मू-कश्मीर के हर कोने में तिरंगा फहराया जाने लगा, जो कि भारत की एकता और संप्रभुता का प्रतीक है।
घाटी में ऐसे बदले हालात
जम्मू कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने से बाद यहां सुरक्षा स्थिति में बड़ा सुधार देखा गया। क्षेत्र में ना सिर्फ आतंकी घटनाओं में कमी आई बल्कि यहां आने वाले पर्यटकों का सुरक्षा के प्रति एक बार फिर से विश्वास मजबूत हुआ। मौजूदा समय की बात करें तो जम्मू कश्मीर में मनमोहक घाटियां, झीलें, पहाड़ों को देखने फिर से टूरिस्ट्स पहुंच रहे हैं। र्यटन क्षेत्र के विकास के साथ ही यहां हॉस्पिटिलिटी, परिवहन, हस्तशिल्प समेत कई केंद्र शासित प्रदेश के कई आय के परंपरागत क्षेत्रों के अलावा शिक्षा और जॉब सेक्टर में भी सकारात्मक बदलाव आया है। जिससे यहां लोगों के जीवन स्तर पर बदलाव देखा गया है। जम्मू कश्मीर के युवा अब स्थिति से पूरी तरह जागरूक हो रहे हैं। ऐसे में यहां अब युवाओं को पत्थर और गोला बारूद पकड़ाने वाली आतंकी मानसिकता बेअसर साबित होती दिख रही है।












Click it and Unblock the Notifications