अधिकारियों की सिफारिश से डॉक्टरों ने हटवाई अपनी कोविड ड्यूटी, फोन पर लिख रहे हैं दवाएं

नई दिल्ली। कोरोना के खिलाफ जंग में इस समय डॉक्टर और नर्सें सबसे अहम भूमिका निभा रहे हैं। इस दौरान देश में सैकड़ों की तादात में डॉक्टर और नर्सें कोरोना संक्रमित हो गए हैं। गाजियाबाद जिला संयुक्त अस्पताल इस समय डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहा है। कई डॉक्टरों ने अपनी उम्र और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें बताकर कोविड ड्यूटी से नाम वापस ले लिया है। टाइम्स ऑफ इंडिया में एक रिपोर्ट के अनुसार, 100 बेड वाले आइसोलेशन सेंटर में रजिस्टर्ड 26 डॉक्टरों में से केवल 12 ही कोविड -19 के रोगियों की देखभाल कर रहे हैं।

डॉक्टरों के अंदर तनाव और असंतुष्टता का माहौल

डॉक्टरों के अंदर तनाव और असंतुष्टता का माहौल

रिपोर्ट में कहा गया है कि, कुछ डॉक्टरों ने नौकरशाहों की सिफारिश से ऐसे वार्ड में अपनी ड्यूटी लगवा ली है जहां पर कोरोना संक्रमित होने का खतरा ना के बराबर है। इससे कोविड ड्यूटी कर रहे अन्य डॉक्टरों के अंदर तनाव और असंतुष्टता का माहौल है। यही नहीं 10 डॉक्टरों को कोविड ड्यूटी के लिए अन्य जिलों से बुलाया गया है। अस्पताल के सीएमएस का कहना है कि 14 डॉक्टर्स को संक्रमण के कम जोखिम वाले काम में तैनात किया गया है। इनमें से अधिकांश डॉक्टर्स 55 वर्ष से ज्यादा आयु वाले हैं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं, उन्हें संक्रमण का खतरा ज्यादा है।

बीमारी और उम्र का हवाला देकर ड्यूटी से बच रहे हैं डॉक्टर

बीमारी और उम्र का हवाला देकर ड्यूटी से बच रहे हैं डॉक्टर

यह मामला तब सामने आया जब कंबाइंड अस्पताल को एल-2 बनाया गया है। सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि शुरू में पाँच डॉक्टरों ने "गंभीर बीमारियों का हवाला देते हुए" कोरोना ड्यूटी से छूट की मांग की थी। इसके बाद से यह लिस्ट लगातार लंबी होती जा रही है। बाद में शासन स्तर से इस जांच बैठाई गई तो सभी डॉक्टर्स को कोविड वॉर्ड के बाहर कम जोखिम वाले काम पर लगाया गया। टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल में एक प्रशासनिक अधिकारी की पत्नी भी डॉक्टर हैं। उन्हें अस्पताल से हटाकर आईडीएसपी लैब से अटैच कर दिया गया है। इस मामले को लेकर भी अस्पताल स्टाफ में खासा रोष है।

फोन पर लिख रहे हैं दवाएं

फोन पर लिख रहे हैं दवाएं

सूत्रों ने आरोप लगाया कि कोविड -19 ड्यूटी पर रखे गए कुछ डॉक्टर आइसोलेशन वार्ड के अंदर जाने से मना कर देंगे। इसके बजाय वे वार्ड के बाहर नर्सों से बात करके मरीजों की स्थिति की निगरानी करते हैं और फोन पर दवाएं लिखेंगे। अस्पताल के सूत्रों का कहना है कि कई ऐसे डॉक्टर्स हैं जिनकी कोविड वॉर्ड में ड्यूटी लगाई गई है लेकिन, वे पीपीई किट पहनने से बचने के लिए वॉर्ड में जाते ही नहीं हैं। गुरुवार को डीएम के निरीक्षण के दौरान भी यह बात उजागर हुई थी।

डॉक्टरों की भारी कमी

डॉक्टरों की भारी कमी

अस्पताल के सीएमएस डॉ. नरेश विज का कहना है कि अस्पताल डॉक्टरों की भारी कमी का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को कोविड ड्यूटी से हटा दिया गया है और अन्य काम दिए गए है वे सभी 55 वर्ष से अधिक उम्र के हैं। हम लगातार सरकार से डॉक्टरों और नर्सों की मांग रहे हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। हमें कम से कम 12 और डॉक्टरों और इतनी ही नर्सों की आवश्यकता है।

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