'2024 में मोदी बनाम केजरीवाल' : क्या विपक्षी एकता में पलीता साबित होगा सिसोदिया का ऐलान ?

बिहार में सत्ता परिवर्तन को 2024 के चुनाव की आहट भी माना गया। नीतीश बनाम मोदी पर चर्चाएं होने लगीं। अब दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया का दावा है कि 2024 का चुनाव केजरीवाल बनाम मोदी होगा। manish sisodia 2024 modi vs

नई दिल्ली, 20 अगस्त : भाजपा को मात देने के लिए तमाम राजनीतिक दल एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। महाराष्ट्र के बाद बिहार में हुए सत्ता परिवर्तन के मद्देनजर कयास लगाए जा रहे हैं कि 2024 के लोक सभा चुनाव में विपक्ष किसी खास रणनीति पर काम कर रहा है। भले ही नीतीश ने खुद राष्ट्रीय राजनीति में पदार्पण का ऐलान नहीं किया है, लेकिन बिहार में डिप्टी सीएम बने तेजस्वी यादव ने नीतीश को राष्ट्रीय राजनीति के लिए तैयार करार दिया है। जो विपक्षी पार्टियां राज्य स्तर पर भाजपा को कड़ी चुनौती दे रही हैं, इनमें आम आदमी पार्टी (AAP) सबसे आगे है। विपक्षी एकता में AAP की भूमिका भी उल्लेखनीय रहेगी, लेकिन दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया का मानना है कि 2024 में लोक सभा चुनाव भाजपा बनाम आप होगा। इस बयान को विपक्षी एकता में सेंध या टूट के रूप में देखा जा रहा है। सिसोदिया ने दावा किया, केजरीवाल 'राष्ट्रीय स्तर पर एक विकल्प' के रूप में उभरे हैं।

2024 का आम चुनाव बीजेपी बनाम आप

2024 का आम चुनाव बीजेपी बनाम आप

दरअसल, दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया बीजेपी पर लगातार हमले बोल रहे हैं। आबकारी विभाग के मामले में सीबीआई की कार्रवाई से क्षुब्ध सिसोदिया ने शनिवार को कहा कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर डराने की कोशिश हो रही है, लेकिन वे पीछे हटने वाले नहीं है। एक और कदम आगे बढ़ाते हुए शनिवार को सिसोदिया ने सयासी हुंकार भरी और कहा, 2024 का आम चुनाव बीजेपी बनाम आप होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल को डराने के लिए सभी हथकंडे आजमा रहे हैं।सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली की आबकारी नीति पूरी पारदर्शिता के साथ लागू की गई थी और कोई घोटाला नहीं हुआ।

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    केजरीवाल और मोदी में अंतर

    केजरीवाल और मोदी में अंतर

    शनिवार को डिप्टी सीएम सिसोदिया ने कहा, दिल्ली की शराब नीति के बहाने बीजेपी केजरीवाल और उनके विकास के मॉडल को बदनाम करने में जुटी है। पीएम मोदी पर सीधा हमला करते हुए सिसोदिया ने सीबीआई रेड के बाद पहली प्रेस वार्ता में कहा, मोदी अरबपतियों के लिए सोचते हैं, केजरीवाल आम आदमी के लिए सोचते हैं। केजरीवाल और मोदी में अंतर बताते हुए सिसोदिया ने कहा, केजरीवाल अच्छा काम करने वालों की तारीफ कर उसे अपनाते हैं, लेकिन मोदी अच्छा काम करने वालों की राह में रोड़े बिछाने का काम करते हैं।

    आठ साल पहले काशी में केजरीवाल की करारी हार

    आठ साल पहले काशी में केजरीवाल की करारी हार

    आक्रामक लहजे में बोलते हुए सिसोदिया ने कहा, सीबीआई दो-चार दिनों में उन्हें गिरफ्तार कर लेगी, लेकिन वे डरने वाले नहीं है। बकौल सिसोदिया, "हम भगत सिंह की संतान हैं, सीबीआई की छापेमारी से डरने वाले नहीं।" उन्होंने कहा, 2024 का चुनाव मोदी बनाम केजरीवाल होगा। उन्होंने दोहराया, 2024 का चुनाव बीजेपी बनाम आम आदमी पार्टी होगा। सियासत में दावे तो हर कोई करता है, लेकिन सिसोदिया के दावों से इतर एक तथ्य यह भी है कि 2014 के लोक सभा चुनाव में वाराणसी में पीएम मोदी के खिलाफ ताल ठोकने वाले अरविंद केजरीवाल को बुरी हार का मुंह देखना पड़ा था। मोदी ने केजरीवाल को 3.37 लाख वोटों के अंतर से हराया था। मोदी को 5.16 लाख से अधिक, जबकि केजरीवाल को 1.79 लाख से अधिक वोट मिले थे। करीब 10.28 लाख कुल वोटों में 50 फीसद से अधिक मोदी के पक्ष में पड़े थे। समीक्षकों के मुताबिक वाराणसी में नरेंद्र मोदी को हर जाति और धर्म के लोगों का समर्थन मिला।

    भाजपा के सामने सबसे बड़ी चैलेंजर AAP ?

    भाजपा के सामने सबसे बड़ी चैलेंजर AAP ?

    लोक सभा में भाजपा अकेले 272 के मैजिक नंबर यानी बहुमत के आंकड़े से काफी आगे है। ऐसे में पार्टी को 31 सीटों पर पटखनी देना लोहे के चने चबाने जैसा होगा। भले ही वर्तमान 17वीं लोक सभा में आम आदमी पार्टी के पास एक भी सीट नहीं है, लेकिन पंजाब विधानसभा चुनाव में मिली अभूतपूर्व जीत से उत्साहित AAP का मानना है कि वह भाजपा के सामने सबसे बड़ी चैलेंजर है। शायद इसका एक कारण पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह और भाजपा की करीबी के बावजूद 117 सदस्यीय विधानसभा में AAP को 92 सीटें यानी प्रचंड बहुमत मिला। बता दें कि कांग्रेस से अलग होने के बाद शाही परिवार से ताल्लुक रखने वाले कैप्टन अमरिंदर ने पंजाब लोक कांग्रेस (PLC) नाम की पार्टी का गठन किया और बाद में भाजपा का साथ देने का ऐलान किया। इसे भाजपा के लिए गेमचेंजर माना जा रहा था, क्योंकि अकाली दल से अलग होने के बाद भाजपा पहली बार पंजाब में अधिक सीटों पर चुनाव लड़ रही थी। हालांकि, अमरिंदर खुद अपनी सीट पर जीत हासिल करने में नाकाम रहे।

    लोक सभा की गणित में किसका पलड़ा भारी

    लोक सभा की गणित में किसका पलड़ा भारी

    संसदीय चुनाव के आंकड़ों के हिसाब से तोलें तो लोक सभा में भाजपा के 303 सांसद हैं। कांग्रेस 53 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर है। तीसरे नंबर पर तमिलनाडु की सत्तारुढ़ पार्टी डीएमके (24 सीटें) जबकि चौथे नंबर पर 23 सीटों के साथ पश्चिम बंगाल में भाजपा को धूल चटाने वाली ममता बनर्जी की ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) है। बिहार में भाजपा से अलग होने वाले नीतीश की पार्टी जदयू 16 सांसदों के साथ सातवें नंबर पर है। महाराष्ट्र में भाजपा से अलग हो चुकी शिवसेना 19 सांसदों के साथ छठे नंबर पर है। हालांकि, शिवसेना एकनाथ शिंदे की अगुवाई में रहेगी या उद्धव ठाकरे को पार्टी वापस मिलेगी, इस पर सस्पेंस बना हुआ है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट या निर्वाचन आयोग के अंतिम फैसले तक इन 19 लोक सभा सीटों पर अनिश्चितता रहेगी।

    KCR पर भी रहेंगी नजरें

    KCR पर भी रहेंगी नजरें

    जिन अन्य दलों ने भाजपा के खिलाफ आवाज बुलंद की है, इनमें तेलंगाना की सत्तारूढ़ पार्टी TRS (तेलंगाना राष्ट्र समिति) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) भी शामिल है। इन दलों के सांसद भी लोक सभा चुनाव परिणाम के मद्देनजर अहम साबित हो सकते हैं। 543 में तीन सीटें निर्दलीय सांसदों के पास हैं।

    क्या बिहार से बहेगी बदलाव की बयार ?

    क्या बिहार से बहेगी बदलाव की बयार ?

    यह भी दिलचस्प है की बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में भाजपा से अलग होकर राष्ट्रीय जनता दल समेत सात दलों की महागठबंधन सरकार बनाई है। नीतीश की जदयू में राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने नीतीश के खिलाफ साजिश जैसे गंभीर आरोप भी लगाए। राजद का आरोप है कि भाजपा क्षेत्रीय पार्टियों को कमजोर करती है। तेजस्वी ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि लोकतंत्र की जननी बिहार में आकर नड्डा कहते हैं कि क्षेत्रीय पार्टियां समाप्त हो जाएंगी और भाजपा का जनाधार बढ़ेगा, बिहार की जनता ऐसी सोच को बर्दाश्त नहीं करेगी।

    सियासी चौसर पर CBI की भूमिका ?

    सियासी चौसर पर CBI की भूमिका ?

    गौरतलब है कि सीबीआई ने दिल्ली की आबकारी नीति में कथित भ्रष्टाचार के आरोप के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की है। FIR के आधार पर शुक्रवार सुबह सिसोदिया और आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा) अधिकारी अरवा गोपी कृष्ण के आवास पर छापेमारी हुई। जांच एजेंसी ने 19 अन्य स्थानों की भी तलाशी ली। इस कार्रवाई से क्षुब्ध सिसोदिया ने मोदी बनाम केजरीवाल की हुंकार तो भरी है, लेकिन अब नजरें विपक्षी एकता पर रहेंगी।

    विपक्षी एकता की कवायद

    विपक्षी एकता की कवायद

    बता दें कि सिसोदिया के 'मोदी बनाम केजरीवाल' बयान से पहले केजरीवाल पीएम मोदी के गृह राज्य गुजरात में आगामी विधानसभा चुनाव में ताल ठोक रहे हैं। बात राष्ट्रीय राजनीति की करें तो पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव और एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार को विपक्षी एकता की कवायद करते देखा जा चुका है।

    '2024 में मोदी बनाम केजरीवाल' विपक्षी एकता में पलीता ?

    '2024 में मोदी बनाम केजरीवाल' विपक्षी एकता में पलीता ?

    बिहार में सत्ता परिवर्तन यानी नीतीश का महागठबंधन की सरकार बनाने के बाद उन्हें सर्वमान्य नेता के रूप में देखा जा रहा है। सियासी पंडितों की नजर में 'मोदी बनाम कौन ?' का सवाल भाजपा के नैरेटिव को सूट करता है। ऐसे में '2024 में मोदी बनाम केजरीवाल' कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि 'विपक्षी एकता और सर्वमान्य नेता' के आधार पर ही भाजपा को चुनौती दी जा सकती है। इसके अलावा जातिगत समीकरणों की भी अहम भूमिका रहेगी। बंगाल में भाजपा को पटखनी देने में अहम रोल निभाने वाले रणनीतिकार प्रशांत किशोर भी स्थानीय मुद्दों के आधार पर भाजपा को हराने के पक्ष में हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि जिस क्षेत्र में जो नेता मजबूत हैं, वहां उनको पूरी ताकत से मुकाबला करना चाहिए। ऐसे में 2024 के चुनाव में सिसोदिया का 'मोदी बनाम केजरीवाल' ऐलान 'विपक्षी एकता' की परिकल्पना को पलीता लगा सकता है।

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