मणिपुर हिंसा: कुकी समुदाय के 35 लोगों के शव आज नहीं दफनाए जाएंगे, गृह मंत्रालय से बातचीत के बाद फैसला टला

मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदाय के बीच जारी हिंसा को 3 महीने पूरे हो गए हैं। लेकिन अभी भी कहीं-कहीं छिटपुट हिंसा जारी है। इस संघर्ष में अब तक राज्य में 150 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। कई लोगों के शव इंफाल और चूराचांदपुर के अस्पतालों की मॉर्चुरी में रखे हैं। इस बीच एक जानकारी सामने आई कि कुकी समुदाय के लोग 35 शव को एक साथ दफनाने वाले हैं। लेकिन अब गृह मंत्रालय की अपील के बाद अब इस फैसले को टाल दिया गया है।

दरअसल, स्वदेशी जनजातीय नेता मंच (ITLF) ने एक बैठक की और दफनाने में पांच दिन की देरी के लिए गृह मंत्रालय के अनुरोध पर चर्चा की। गृह मंत्रालय का अनुरोध इस शर्त के साथ आया था कि यदि कुकी समुदाय इसका अनुपालन करता है तो उन्हें उसी स्थान पर शवों को दफनाने की अनुमति दी जाएगी और सरकार दफनाने के लिए भूमि को वैध कर देगी।

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कुकी समुदाय ने गृह मंत्रालय के सामने रखी ये मांग
दफनाने के फैसले को टालने के लिए कुकी समुदाय ने कुछ मांग रखी है। इसके तहत उन्होंने कहा कि कुकी-जो समुदायों की सुरक्षा के लिए सभी पहाड़ी जिलों में मैतेई राज्य बलों को तैनात नहीं करना चाहिए। चूंकि दफनाने में देरी होगी, इसलिए इंफाल में पड़े कुकी-ज़ो समुदायों के शवों को लमका (चुराचांदपुर) लाया जाना चाहिए। हमारी राजनीतिक मांग यह है कि मणिपुर से पूर्ण अलगाव की प्रक्रिया तेज की जाए। इंफाल में आदिवासी जेल के कैदियों को उनकी सुरक्षा के लिए दूसरे राज्यों में स्थानांतरित किया जाना चाहिए।

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