'चीन उठा सकता है फायदा, देश की सुरक्षा के लिए चिंता', विपक्षी नेताओं ने मणिपुर दौरे के बाद क्या-क्या कहा?
Opposition MPs Manipur visit: हिंसा प्रभावित मणिपुर की दो दिवसीय यात्रा के बाद I.N.D.I.A के विपक्षी सांसद रविवार को दिल्ली आए। विपक्षी नेताओं ने सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि वह मणिपुर जातीय संघर्ष को नियंत्रित करने में पूरी तरह से विफल रही है।
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने चेतावनी दी कि अगर मणिपुर जातीय संघर्ष को जल्दी से हल नहीं किया गया, तो यह देश के लिए सुरक्षा समस्याएं पैदा कर सकता है। अधीर रंजन चौधरी ने राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में बोलते हुए कहा कि चीन पूर्वोत्तर राज्य में अशांति का दुरुपयोग कर सकता है।

10 प्वाइंट में समझें, मणिपुर पर किस विपक्षी नेता ने क्या कहा...?
1. अधीर रंजन चौधरी ने कहा, "मणिपुर दो हिस्सों में बंट गया है। सरकार स्थिति को समझ नहीं रही है, म्यांमार के साथ केवल 75 किलोमीटर सीमा पर बाड़ लगाई गई है और चीन इसके ठीक पीछे है। यह एक चिंताजनक स्थिति है, मैं राजनीति नहीं कर रहा हूं। यह अब देश के लिए चिंता का विषय है।"
2. मणिपुर से लौटने के बाद, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने कहा, "मणिपुर की स्थिति अभी भी खराब है। राहत शिविरों में लोगों की ठीक से देखभाल नहीं की जा रही है... सभी सुविधाओं की तत्काल आवश्यकता है।"
3. झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माजी ने कहा, "दोनों समुदायों के सदस्य मणिपुर में चिंतित हैं। हिंसा अभी भी जारी है...राज्यपाल ने हमें पहल करने और समाधान निकालने के लिए कहा है। वह खुद वहां असहाय महसूस कर रहे हैं। सोमवार को हमारी संसद में बैठक होगी जिसके बाद हम आगे की कार्रवाई तय करेंगे।''
4. कांग्रेस सांसद फूलो देवी नेताम ने कहा, ''दो लड़कियों के साथ बलात्कार किया गया। पीड़ितों ने पुलिस के सामने मुझे बताया कि उनके साथ बलात्कार किया गया। लेकिन सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। किसी को भी इतना बेशर्म नहीं होना चाहिए। हमारी मांग है कि वहां जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल की जाए, हम एक प्रामाणिक रिपोर्ट बनाएंगे और सदन के सामने पेश करेंगे।''
5. एनसीपी (शरद पवार गुट) के सांसद पीपी मोहम्मद फैजल ने कहा, "हमने जो कुछ भी देखा और सुना है वह हमारी उम्मीदों से परे है...उन लोगों की पीड़ा को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता...। अगर सरकार ने शुरू में कार्रवाई की होती तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।''
6. डीएमके सांसद कनिमोझी ने कहा, "हमने राज्यपाल को अपनी चिंताएं बताई हैं, वह भी चिंतित हैं। मैं चाहती हैं कि हम केंद्र सरकार को बताएं कि हमने क्या देखा है... हम बहस के लिए कहेंगे, और हम सरकार को बताना चाहते हैं कि हमने क्या देखा है, और लोग यह भी चाहते हैं कि सभी दलों के नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल वहां (मणिपुर) जाए और देखे कि क्या हो रहा है... वहां शांति वार्ता होनी चाहिए, यही एक रास्ता है।''
7. जेडीयू सांसद राजीव रंजन ने कहा, "दोनों समुदायों में असुरक्षा की भावना और विश्वास की कमी है। 3 मई के बाद से घटनाएं हुईं लेकिन राज्य सरकार ने इसे नियंत्रित करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। राज्यपाल ने कहा कि वह सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए अपनी शक्ति में सब कुछ कर रही हैं।"
8. तृणमूल कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव कहा, "हमने कहा कि हम एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल चाहते थे, लेकिन सरकार सहमत नहीं थी और इसीलिए विपक्षी गठबंधन ने दौरा किया...जब पीएम मोदी संसद में आते तो, हम अपनी बात रखते। लेकिन पीएम मोदी न तो राज्यसभा में आए और न ही लोकसभा में।''
9. आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा, "हम चाहते हैं कि मणिपुर में शांति बहाल हो। हमारी एकमात्र मांग है कि दोनों समुदाय सद्भाव से रहें। मणिपुर में स्थिति खतरनाक है। संसद में पहले ही चर्चा हो चुकी है। एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को मणिपुर का भी दौरा करना चाहिए।''
10. IUML सांसद ईटी मोहम्मद बशीर ने कहा, ''वहां की स्थिति वास्तव में नर्क जैसी है। लोग पीड़ित हैं... हमारी यात्रा सार्थक थी और हम जमीनी हकीकत को समझने में सक्षम थे। हमने राज्यपाल से मुलाकात की और उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन दिया, हमने अपील की कि सामान्य स्थिति बहाल की जानी चाहिए।''












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