Manipur Violence: मणिपुर में फिर से क्यों भड़की हिंसा? क्या है मुख्य वजहें ? Timeline में जानें सबकुछ
Manipur Violence Timeline: मणिपुर एक बार फिर हिंसा की आग में झुलस रहा है। हालिया हिंसा का कारण जिरीबाम जिले में छह लोगों की हत्या है। इन हत्याओं के पीछे कुकी उग्रवादियों का हाथ होने का शक है। मारे गए लोगों में तीन महिलाएं और तीन बच्चे शामिल थे। इसके बाद से राज्य में तनाव बढ़ गया है और हिंसा का दौर शुरू हो गया।
आपको बता दें कि 3 मई 2023 से लगातार कुकी बनाम मैतेई की जंग जारी है। इसकी मुख्य वजह मैतेई को ST का दर्जा देने की मांग है। पिछले साल भड़की इस हिंसा में करीब 200 से ज्यादा लोगों की मौत हुई, जबकि 1100 से ज्यादा जख्मी हुए थे। उसी दौरान सामने आए पिटाई के कई वीडियो ने हिंसा की आग में घी डालने का काम किया था।

मणिपुर सरकार का कदम
- राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा नीत एनडीए सरकार ने इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रस्ताव पारित किया है।
- 7 दिन में अपराधियों पर कार्रवाई करने की समयसीमा तय की गई है।
- हिंसा रोकने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए 7,000 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की गई है।
- केंद्र सरकार ने कई संवेदनशील इलाकों में AFSPA (आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर्स एक्ट) के तहत सेना की कार्रवाई बढ़ा दी है।
टाइमलाइन में जानें हिंसा कैसे बढ़ी?
7 नवंबर की घटना
- छह लोगों का अपहरण और हत्या।
- इसके जवाब में मेइती समुदाय के कुछ समूहों ने ज़ैरावन गांव पर हमला किया, जिसमें महिलाओं के साथ दुष्कर्म, हत्या और संपत्ति जलाने के आरोप लगे।
नवंबर की मुठभेड़
- सीआरपीएफ ने संदिग्ध कुकी उग्रवादियों से मुठभेड़ की।
- 10 उग्रवादी मारे गए और भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए।
15-16 नवंबर की घटना
- अपहृत परिवारों के शव मिलने से गुस्साई भीड़ ने कई जगहों पर हिंसा की।
- चर्च, विधायकों के घर और अन्य सार्वजनिक संपत्ति पर हमले हुए।
इंटरनेट और कर्फ्यू का प्रतिबंध
- हिंसा और गलत जानकारी फैलने से रोकने के लिए इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं 20 नवंबर तक बंद कर दी गई हैं।
- कई इलाकों में कर्फ्यू बढ़ाया गया है।

क्या है मणिपुर हिंसा के पीछे की मुख्य वजहें ?
जातीय तनाव
- मणिपुर की जनसंख्या मुख्य रूप से मैतेई (हिंदू) और आदिवासी (कुकी, नागा - ईसाई) समुदायों में बंटी है।
- मेइती समुदाय राज्य की राजनीति और व्यापार पर हावी है, जबकि कुकी और नागा समुदाय संसाधनों और प्रतिनिधित्व में भेदभाव का आरोप लगाते हैं।
जमीन और जनजातीय दर्जा
- मैतेई समुदाय अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जा मांग रहा है, जिसका आदिवासी समुदाय विरोध कर रहा है।
- संरक्षित वन क्षेत्रों से कुकी बस्तियों को हटाए जाने से आदिवासी समुदायों में नाराजगी बढ़ी।
पुराना जातीय संघर्ष
- मई 2023 में भी हिंसा भड़की थी, जिसमें 160 से ज्यादा लोगों की मौत हुई।
- इस संघर्ष की जड़ें जमीन, संसाधनों और सामाजिक-राजनीतिक अधिकारों को लेकर हैं।
केंद्र और राज्य सरकार की प्रतिक्रिया
- गृह मंत्री अमित शाह ने स्थिति पर कड़ी नजर रखते हुए सुरक्षा बलों को हिंसा रोकने के सख्त निर्देश दिए।
- एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) को महत्वपूर्ण मामलों की जांच सौंपी गई है।
- सीआरपीएफ और सेना को संवेदनशील इलाकों में अभियान चलाने और स्थिति नियंत्रण में लाने का आदेश दिया गया है।
हालात कैसे सामान्य होंगे?
- जातीय समूहों के बीच संवाद स्थापित करना।
- हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई।
- इंटरनेट और कर्फ्यू के माध्यम से गलत जानकारी पर रोक।
- स्थायी समाधान के लिए सभी समुदायों को शामिल करके एक संयुक्त नीति बनाना।
एक नजर में जानें
- मणिपुर हिंसा कुकी बनाम मैतेई की वजह: मैतेई को ST का दर्जा देने की मांग
- हिंसा की शुरुआत: 3 मई 2023 से
- कितनी हुईं मौतें: 200+
- घायल: 1100
- मणिपुर की आबादी: 38 लाख
- मैतेई: 53% ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं
- नगा-कुकी: 40% ज्यादातर पहाड़ी जिलों में रहते हैं












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