Manipur Violence: 267 और 176 नियम को लेकर केंद्र और विपक्ष का टकराव! जानें क्या है दोनों में अंतर?
Manipur Violence: संसद के दोनों सदनों (राज्यसभा और लोकसभा) में मणिपुर में भड़की हिंसा को लेकर विपक्ष और केंद्र आमने-सामने है। दोनों ही संसद के नियमों को लेकर बहस में लगे है।
Manipur Violence: मणिपुर में भड़की हिंसा में कुकी समुदाय की दो महिलाओं को निवस्त्र सड़क पर घुमाने वाले वीडियो ने घी डालने का काम किया। शुक्रवार को इंफाल के इलाके में हिंसा भडकी। वहीं, मानवता शर्मसार करने वाले वीडियो के सामने आने के बाद देशभर में आक्रोश का माहौल बना है। जिसका असर संसद के मॉनसून सत्र में भी देखने को मिला।
विपक्षी दल केंद्र सरकार को घेरने में लगा रहा। संसद के दोनों सदनों (राज्यसभा और लोकसभा) में सरकार और विपक्ष आमने-सामने नजर आई। मानसून सत्र के दूसरे दिन भी मणिपुर पर चर्चा नहीं हो सकी। वहीं, विपक्षी दलों ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों को नोटिस दिया है। एक तरफ सरकार का मानना है कि संसद के नियम 176 के तहत केंद्र मणिपुर मसले पर चर्चा हो। वहीं, विपक्षी दल नियम 267 के तहत संसद में चर्चा करने का नोटिस जारी किया है। आइए जानते हैं क्या हैं दोनों के नियम?

क्या है नियम 267 ?
राज्यसभा नियम 267 के मुताबिक, सदन में पूर्व निर्धारित कामकाज को रोककर किसी खास मसले पर सभापति की सहमति से चर्चा की जाती है। साथ ही सरकार से सवाल-जवाब होते हैं। उदाहरण के तौर पर मणिपुर में महिलाओं के साथ हुए दुर्व्यवहार के मामले पर संसद में नियम 267 लागू होते ही सिर्फ इसी मसले पर सत्र में चर्चा करनी की अनुमति होगी।
क्या है नियम 176 ?
इस नियम के मुताबिक, खास मुद्दे पर निश्चित समय के लिए ही चर्चा होती है। जैसे की तय समय एक या दो घंटे यानी कि अल्पकालिक चर्चा की जाती है।
11 बार ऐसे बने हालात जब दोनों नियमों पर हुई बहस
आपको बता दें कि दोनों नियमों को लेकर 11 बार ऐसे हालात बने, जब मुद्दे पर चर्चाओं के लिए राज्यसभा नियम 267 का इस्तेमाल किया गया। साल 1990 से लेकर 2016 के बीच ऐसी स्थिति बनी।












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