मणिपुर में सुरक्षा बलों ने बदली रणनीति, सभी 16 जिलों के लिए अलग-अलग फोर्स, जानें क्या है टारगेट?
मणिपुर में तीन महीनों से जारी उपद्रव को नियंत्रण करने में छिपे हुए उपद्रवी बहुत बड़े चुनौती बने हुए हैं। अब सुरक्षा बलों का फोकस है कि वह इन उपद्रवियों को चुन-चुनकर निकालें, जिससे हिंसा पर रोक लगाई जा सके। इसके लिए एक जिला, 'एक फोर्स वाली रणनीति' पर काम शुरू किया गया है।
राज्य के पहाड़ी और घाटी के सभी 16 जिलों में इसके लिए केंद्रीय सुरक्षा बल राज्य पुलिस के साथ मिलकर साझा अभियान चलाएंगे। 3 मई से जारी हिंसा को देखते हुए राज्य में बीएसएफ, आईटीबीपी के साथ अन्य केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

मणिपुर में सुरक्षा बलों का पहला टारगेट
दरअसल, तीन महीने होने को हैं, लेकिन मणिपुर में हिंसा का दौर खत्म नही हो रहा है। बुधवार को भी उपद्रवियों ने मोरेह में 15-16 घरों, दुकानों और जंगल में बने घरों को आग के हवाले कर दिया। नॉर्थ ब्लॉक के एक अधिकारी के मुताबिक अभी सुरक्षा बलों ने जो रणनीति बदली है, उसका टारगेट उपद्रवियों को बाहर निकालने के साथ-साथ उनके पास मौजूद लूटे हुए हथियारों को भी वापस छीन लेना है।
हर जिले के लिए अलग कंपनियों की तैनाती
उन्होंने कहा, 'राज्य प्रशासन ने पूरे मणिपुर में तैनात सेंट्रल फोर्स के साथ ऑपरेशन चलाने में आने वाली दिक्कतों के बारे में जानकारी दी, जिसके बाद केंद्र ने सलाह दिया कि हर जिले के लिए अलग-अलग सीआरपीएफ और बीएसएफ की कंपनियों को चिह्नित किया जा सकता है और एसपी, उसके कमांडर के साथ तालमेल कर सकते हैं।'
मणिपुर में 125 से अधिक अर्धसैनिक बल तैनात
अधिकारियों का कहना है कि 'एक जिला, एक फोर्स' से हालात को सामान्य करने में मदद मिलेगी, क्योंकि केंद्र का मानना है कि सुरक्षा बलों को वहां लंबे समय तक तैनात रहना होगा। करीब 3 महीनों से राज्य में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 125 से ज्यादा कंपनियां तैनात हैं। केंद्रीय सुरक्षा बलों के अलावा उग्रवाद-रोधी अभियान के लिए असम राइफल्स भी तैनात है।
वायरल वीडियो के बाद से राजनीतिक उबाल
मणिपुर हिंसा में अबतक 150 से अधिक लोगों की जानें जा चुकी हैं, कई घरों, निजी और सरकार प्रॉपर्टी और वाहनों को निशाना बनाया गया है। मणिपुर में जारी उपद्रव अब अंतरराष्ट्रीय जगत का ध्यान खींच रहा है। खासकर 19 जुलाई को बिना कपड़ों में महिलाओं को एक भीड़ के द्वारा जिस तरह से घुमाने, उनके साथ अमानवीय बर्ताव करने और उनका यौन उत्पीड़न करने का वीडियो वायरल हुआ, उसने इस मुद्दे को बड़ा राजनीतक मसला भी बना दिया है। उसमें से एक महिला के साथ कुकर्म का भी आरोप है।
सीबीआई को सौंपा गया मामला
इनके अलावा भी हत्या और महिलाओं के साथ जबर्दस्ती के कई मामले दर्ज हैं। वायरल वीडियो वाले मामले में 5 संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद गुरुवार को केंद्र सरकार ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी है। सीबीआई को मामला सौपे जाने से पहले तक राज्य में तीन महीनों की हिंसा के सिलसिले मे 6,000 से अधिक एफआईआर दर्ज किए जा चुके हैं। हालांकि, इस दौरान सुरक्षा बलों ने उपद्रवियों से छीने गए करीब 2,000 हथियार वापस भी लिए हैं।
सीआरपीएफ की टीम में महिला सुरक्षाकर्मियों को भी तैनात किया गया है, ताकि महिला प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित किया जा सके। हिंसाग्रस्त राज्य में बेहतर तैनाती के लिए सीआरपीएफ ने हाल ही में दो अतिरिक्त डीआईजी रैंक के अफसरों को भी वहां भेजा है। इससे पहले से डीआईजी स्तर के एक अघिकारी वहां पहले से तैनात हैं।












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