Manipur President Rule: राष्ट्रपति शासन क्या है और कैसे चलता है प्रशासन? मणिपुर में क्यों बनी ऐसी स्थिति?
Manipur president rule: शुक्रवार, 4 अप्रैल को सुबह करीब चार बजे राज्यसभा (Rajya Sabha) में मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की घोषणा की गई। राज्यसभा में आने से एक दिन पहले इसे लोकसभा में भी पारित कर दिया गया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने राज्यसभा में मणिपुर से संबंधित प्रस्ताव को पारित करने के लिए सदन में पेश किया था इसके बाद उच्च सदन ने ध्वनिमत से इसे पारित कर दिया।
मणिपुर में 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था। क्या है राष्ट्रपति शासन? इस दौरान कैसे चलता है प्रशासन और मणिपुर में इसे लागू करने की नौबत क्यों आन पड़ी है? आईए विस्तार से जानते हैं..

Manipur president rule: मणिपुर में क्यों लगाना पड़ा राष्ट्रपति शासन?
दरअसल, भारत के सुदूर पूर्वोत्तर राज्य में मई 2023 से जातीय संघर्ष चल रहा है। राज्य में कुकी और मैतैई दो समुदायों के बीच पिछले डेढ़ सालों से हिंसा चली आ रही है। इसी बीच 9 फरवरी को सीएम एन बीरेन सिंह ने राज्यपाल को अजय कुमार भल्ला को अपना इस्तिफा सौंप दिया था। इसके बाद से राज्य में सीएम के नए चेहरे को लेकर कई बार बैठकें हुई लेकिन अभी तक किसी नाम पर मुहर नहीं लग सका है।
राज्य विधानसभा का अंतिम सत्र पिछले 12 फरवरी 2024 को ही पूरा हो गया था अगला सत्र छह महीने के अंदर होना तय था लेकिन ये सत्र नहीं हो सका। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 174 (1) कहता है कि किसी भी विधानसभा के दो सत्रों के बीच 6 महीने से ज्यादा का अंतर नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो विधानसभा भंग हो जाती है।
राजनीतिक विश्लेषणों का कहना है कि राज्य में पार्टी के बीच काफी मतभेद है और विधायक बीरेन सिंह को लेकर बंटे हुए हैं। कई बार दिल्ली हाईकमान के साथ उनकी बातचीत भी हुई, हालांकि इसका कोई हल नहीं निकल सका।
दरअसल, कुकी लोग बीरेन सिंह को लेकर आसक्त हैं और मैतई समाज राज्य की कमान किसी कुकी के हाथों में नहीं देना चाहतें हैं। अभी तक राज्य में ऐसा कोई चेहरा नहीं है जिस पर दोनों गुटों की सहमति बनती नजर आई हो और सारा पेंच यहीं फंसा हुआ है।
Manipur president rule: क्या है राष्ट्रपति शासन?
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 355 और 356 के अनुसारा राष्ट्रपति शासन लगाए जाने का प्रावधान है।
- अनुच्छेद 355 केंद्र सरकार को राज्यों की आंतरिक अशांति और बाहरी आक्रमण से बचाने की शक्ति देता है।
- इसके अलावा आर्टिकल 356 के तहत किसी राज्य में संवैधानिक तंत्र के फेल हो जाने या कमजोर पड़ने पर राष्ट्रपति अपनी शक्तियों के इस्तेमाल से राज्य सरकार की शक्तियों को अपने अपने अधीन कर लेता है।
- राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए राज्यपाल, राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजता है उसके बाद राष्ट्रपति केंद्रीय कैबिनेट की सलाह के बाद इसे लागू करते हैं।
- राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद मंत्रिपरिषद भंग हो जाती है और राज्य सरकार के सभी मामले राष्ट्रपति के अधिन हो जाते हैं।
- किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन को छह महीने से लेकर अधिकतम तीन साल तक लगाया जा सकता है। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में इसे बढ़ाया भी जा सकता है।
- देश में पहली बार 1951 में पंजाब में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ था। अनुच्छेद 356 का पहली बार इस्तेमाल जवाहरलाल नेहरू ने किया था। उस दौरान पंजाब में एक साल तक राष्ट्रपति शासन था।
Manipur president rule: राष्ट्रपति शासन में क्या-क्या बदलेगा?
- राज्य में आर्टिकल 355 और 356 के लागू होते ही सरकार चलाने की सारी जिम्मेदारी और सारी शक्तियां राज्यपाल के पास चली जाती है।
- राज्यपाल ही राष्ट्रपति के नाम पर राज्य के सचिव या राष्ट्रपति की ओर से नियुक्त किसी सलाहकार की सहायता से शासन चलाता है।
- इस दौरान विधानसभा और विधान परिषद निलंबित रहती है।
- राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद विधेयक और प्रस्ताव संसद द्वारा पारित होता है।
- संसद को ये अधिकार है कि राज्य के लिए कानून बनाने की शक्ति राष्ट्रपति या नामित किसी व्यक्ति विशेष को दे सकती है।
- संसद नहीं चलने या स्थगित होने की स्थिति में राष्ट्रपति उस राज्य में अध्यादेश जारी कर सकता है।












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