Manipur से राष्ट्रपति शासन हटते ही राज्य को मिला नया मुख्यमंत्री, युमनाम खेमचंद सिंह ने ली CM पद की शपथ
Manipur new CM Yumnam Khemchand Singh takes oath: करीब एक साल की राजनीतिक अनिश्चितता के बाद मणिपुर में स्थायी सरकार का रास्ता साफ हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्य में लागू राष्ट्रपति शासन को समाप्त करने की घोषणा कर दी है। इसके चंद घंटे बाद ही भाजपा नेता वाई. खेमचंद सिंह के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है।
मणिपुर के लोकभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल ने उन्हें सीएम पद की शपथ दिलवाई। उन्होंने लोक भवन में कई पार्टी नेताओं की उपस्थिति में पदभार संभाला। इसके साथ ही मणिपुर में राजनीतिक स्थिरता और सुशासन की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) द्वारा मणिपुर से तत्काल प्रभाव से राष्ट्रपति शासन हटाने की अधिसूचना जारी करने के एक दिन बाद यह शपथ हुई। बुधवार, 4 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा जारी आधिकारिक उद्घोषणा में मणिपुर से राष्ट्रपति शासन हटाने की पुष्टि की गई। नोटिस में कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 356(2) के तहत 13 फरवरी 2025 को जारी की गई उद्घोषणा को 4 फरवरी 2026 से प्रभावी रूप से रद्द किया जाता है। इसके साथ ही राज्य में लोकतांत्रिक सरकार की बहाली सुनिश्चित हो गई।
भाजपा को नए नेतृत्व से बड़ी उम्मीदें
भाजपा मणिपुर ने अपने बयान में कहा कि वाई. खेमचंद सिंह के अनुभवी और दूरदर्शी नेतृत्व में राज्य शांति, विकास और सुशासन के पथ पर आगे बढ़ेगा। पार्टी ने उम्मीद जताई कि नई सरकार मणिपुर में स्थिरता लाने के साथ-साथ विकास कार्यों को भी गति देगी।
राज्यपाल से मिलकर पेश किया था सरकार बनाने का दावा
मुख्यमंत्री पद के लिए नाम तय होने के बाद वाई. खेमचंद सिंह के नेतृत्व में NDA विधायक दल के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से Lok Bhavan में मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने लोकप्रिय सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश किया। 62 वर्षीय वाई. खेमचंद सिंह को मंगलवार को नई दिल्ली में भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया था। इसके बाद उन्हें NDA विधायक दल का भी नेता नामित किया गया।
मणिपुर में क्यों लगा था राष्ट्रपति शासन?
फरवरी 2025 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन पर मई 2023 में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हुई जातीय हिंसा को संभालने में विफल रहने के आरोप लगे थे। इसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था, जो लगभग एक वर्ष तक जारी रहा।












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