Manipur Hinsa से विचलित रिटायर्ड सैन्य अधिकारी बोले- लेबनान और सीरिया जैसे हालात
Manipur Hinsa से विचलित एक रिटायर्ड सैन्य अधिकारी ने SOS मैसेज में कहा, हालात मध्य पूर्व के देशों- लेबनान और सीरिया जैसे हो गए हैं। पूर्व सैन्य अधिकारी का ये ट्वीट वायरल हो रहा है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से होता है कि केंद्रीय मंत्री और महिला मंत्री के घरों में आगजनी हुई है।
विगत लगभग डेढ़ महीने से मणिपुर में हिंसा का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा है। 3 मई से जातीय संघर्ष की खबरें आ रही हैं। अब, एक सेवानिवृत्त शीर्ष सैन्य अधिकारी ने अपने राज्य की स्थिति की तुलना युद्ध-ग्रस्त लीबिया, लेबनान और सीरिया से करते हुए गंभीर स्थिति पर ट्वीट किया है।

लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एल निशिकांत सिंहने ट्वीट किया, "मैं मणिपुर का एक साधारण भारतीय हूं जो सेवानिवृत्त जीवन जी रहा है। राज्य अब 'स्टेटलेस' है। जीवन और संपत्ति किसी के द्वारा कभी भी नष्ट की जा सकती है, जैसे लीबिया, लेबनान, नाइजीरिया, सीरिया आदि देशों में।"
Im just an ordinary Indian from Manipur living a retired life. The state is now stateless. Life and property can be destroyed anytime by anyone just like in Libya, Lebanon, Nigeria, Syria, etc. It appears Manipur has been left to stew in its own juice. Is anyone listening ? pic.twitter.com/VqfwLrF2DR
— Lt Gen L Nishikanta Singh (R) (@VeteranLNSingh) June 15, 2023
पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल ने सवाल किया, "ऐसा लगता है कि मणिपुर को अपने ही हाल पर छोड़ दिया गया है। क्या कोई सुन रहा है?" जिस प्रोफाइल से ट्वीट किया गया है, इसके ट्विटर बायो के अनुसार, निशिकांत 40 वर्षों तक भारतीय सशस्त्र बलों की सेवा कर चुके हैं।
पूर्व सेना प्रमुख वेद प्रकाश मलिक ने सिंह के पोस्ट को रीट्वीट कर कहा, "मणिपुर से एक सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल का एक असाधारण दुखद कॉल। मणिपुर में कानून और व्यवस्था की स्थिति पर उच्चतम स्तर पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।"
मलिक ने अपने ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को भी टैग किया। बता दैं कि शाह चार दिनों के मणिपुर दौरे के दौरान शांति समिति का गठन करने की पहल की थी।
पूर्वोत्तर भारतीय राज्य मणिपुर के हालात कितने गंभीर हो चुके हैं, इसका अंदाजा इसी से होता है कि हजारों लोगों के शरणार्थी शिविरों में होने की सूचना है। लाखों महिला-पुरुष और बच्चे विस्थापन का दंश झेल रहे हैं।
बता दें कि इंफाल घाटी के मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल करने की मांग के खिलाफ जनजातीय एकजुटता मार्च के बाद शुरू हुई हिंसा में 115 से अधिक लोग मारे गए हैं।
पीटीआई की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि शुक्रवार को इंफाल में भीड़ द्वारा एक गोदाम में आग लगा दी गई, जिसके बाद उनकी मणिपुर की रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) से झड़प हुई। हालांकि, आग पड़ोस के घरों में नहीं फैली, क्योंकि दमकल कर्मियों और सुरक्षा बलों ने घटनास्थल पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया।
नागरिक समाज का प्रधानमंत्री को पत्र
हिंसा के बीच, कई नागरिक समाज समूहों ने पीएम मोदी से मणिपुर में सामान्य स्थिति और शांति बहाल करने के लिए हस्तक्षेप का आह्वान किया है। अदालत की निगरानी में न्यायाधिकरण बनाने का आग्रह किया जा रहा है। प्रभावित लोगों को वित्तीय मुआवजा दिए जाने की मांग भी हो रही है।
कहां से शुरू हुआ बवाल
गौरतलब है क मेइती समुदाय ने अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग का विरोध किया। कई जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' के आयोजन के बाद पहली बार 3 मई को झड़पें हुईं।
मेइती मणिपुर की आबादी का लगभग 53 प्रतिशत हैं और ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं। आदिवासी - नागा और कुकी - आबादी का 40 प्रतिशत हिस्सा हैं और पहाड़ी जिलों में रहते हैं।












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