India-Myanmar border: मणिपुर उपद्रव के बाद FMR पर नए सिरे से विचार, जानें क्या है ये?

मणिपुर में तीन महीनों से जारी जातीय संघर्ष की वजह से भारत-म्यांमार सीमा से जुड़े फ्री मूवमेंट रिजीम (एफएमआर) फिर से चर्चा में है और इसको लेकर मंथन शुरू है। इसके बारे में नागालैंड में भी पहले काफी विचार-विमर्श हो चुका है और उससे भी इस चुनौती का समाधान निकलने की उम्मीद की जा रही है।

गौरतलब है कि फ्री मूवमेंट रिजीम के कथित दुरुपयोग को देखते हुए नागालैंड सरकार ने साल 2019-20 में कुछ कानूनी प्रावधान लागू किए थे, इस मकसद के साथ कि एफएमआर को और मजबूत किया जा सके, ताकि कोई इसका गलत इस्तेमाल न कर पाए।

manipur clashes and fmr

फ्री मूवमेंट रिजीम (एफएमआर) क्या है?
फ्री मूवमेंट रिजीम म्यांमार के साथ सीमा पर आवाजाही को लेकर हुआ 6 दशक पुराना समझौता है। एफएमआर दोनों ओर के समुदायों को 72 घंटे तक ठहरने की अनुमति देता है। बशर्ते की उनके पास कानूनी परमिट हो; और एक साल की वैद्यता वाले इस बॉर्डर पास को दोनों ओर के सक्षम अधिकारियों के द्वारा जारी किया गया हो।

नागालैंड पुलिस का सुझाव आ सकता है काम
लेकिन, मणिपुर में जारी हिंसा को लेकर यह आशंका जताई जा रही है कि कुछ उपद्रवी ताकतें इस व्यवस्था का गलत फायदा उठा रही हैं। जब नागालैंड में इस तरह की चिंता उठी थी तो वहां की पुलिस ने एक लिस्ट तैयार करने का सुझाव दिया था। अधिकारियों के मुताबिक इसमें एफएमआर के बेहतर तामील के लिए म्यांमार की तरफ खेती लायक जमीन, संपत्ति और रिश्ते रखने वाले लोगों को शामिल किया जाना था।

'एफएमआर पर जागरूकता की आवश्यकता'
2019-20 में इस अध्ययन प्रक्रिया में शामिल रहे एक अधिकारी के मुताबिक 'एफएमआर कैसे काम करता है, यह किस पर लागू होता है और किन शर्तों के साथ इससे छूट मिलती है, इसके बारे में स्थानीय लोगों में जागरूकता का अभाव है। इसे सही तरीके से परिभाषित करने की आवश्यकता है।'

अधिकारियों के मुताबिक 'अस्पष्टता और अनिश्चितता से समस्याएं पैदा होती हैं। सीमा के आसपास के लोगों को यह डर लगा रहता है कि उनके परंपरागत अधिकारों को नुकसान पहुंच सकता है या वे सीमा पार रहने वाले अपने रिश्तेदारों से संपर्क नहीं कर पाएंगे या वे अपने पशुधन और मवेशियों तक नहीं जा सकेंगे। उनके इस डर को दूर करने के लिए एफएमआर के प्रति जागरूकता पैदा करना एक बेहतर विकल्प हो सकता है। दोनों देशों को भी द्वीपक्षीय सीमा व्यवस्था को अच्छे तरीके से अमल में लाना होगा।'

'37,000 प्रवासियों को निगेटिव लिस्ट में डाला'
एक अन्य अधिकारी के मुताबिक इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियों में भी बेहतर तालमेल की व्यवस्था तैयार करने की जरूरत है। अधिकारी ने जानकारी दी है कि मिजोरम और मणिपुर सरकारों ने अभी तक ऐसे 37,000 प्रवासियों की पहचान की है, जिन्हें आधार और वोटर आई कार्ड के लिए निगेटिव लिस्ट में डाला गया है।

म्यांमार में तख्तापलट के बाद बढ़ गई है समस्या
अवैध प्रवासियों के प्रवेश की समस्या तब से और बढ़ गई है, जबसे 2021 में म्यांमार की सेना ने तख्तापलट कर दिया था और विरोधियों के साथ बर्बरता को अंजाम देने लगी थी। लेकिन, मणिपुर में 3 मई से जो उपद्रव शुरू हुआ है और वहां हिंसा में जिस तरह के अत्याधुनिक हथियार इस्तेमाल हो रहे हैं, उसके बाद से सीमा पार से आने वाले उपद्रवियों को लेकर चिंता बढ़ गई है और उसे रोकने के तमाम विकल्पों की तलाश चल रही है।

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