मणिपुर चुनाव: शिविरों में रह रहे उग्रवादी भी डाल सकेंगे वोट, EC ने दी इजाजत
इंफाल, 22 जनवरी: मणिपुर में हो रहे विधानसभा चुनाव में शिविरों में रह रहे उग्रवादी समूहों के सदस्य भी वोट डाल सकेंगे। चुनाव आयोग ने शुक्रवार को इसकी इजाजत दी है। हालांकि ये लोग मतदान केंद्रों पर जाकर ईवीएम के जरिए वोट नहीं डालेंगे, इनको पोस्टल बैलेट के जरिए मतदान करने की इजाजत दी गई है। राज्य में फरवरी और मार्च में वोट डाले जाएंगे।
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कौन से समूह के लोग डाल सकेंगे वोट
चुनाव आयोग ने मणिपुर के उन उग्रवादी समूहों के सदस्यों को पोस्टल बैलेट के जरिए वोट डालने की इजाजत दे दी है, जिनका सरकार के साथ युद्धविराम का समझौता हुआ है और ये राज्य के अलग-अलग शिविरों में रह रहे हैं। बता दें कि मणिपुर में यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट (यूपीएफ) और कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (केएनओ) के करीब 20 उग्रवादी समूहों ने राज्य और केंद्र सरकारों के साथ संघर्षविराम समझौता साइन किया है। जिसके बाद इन समूहों के सदस्यों को सरकार ने विशेष शिविरों में रखा है।
मणिपुर में दो चरण में मतदान
देश के पांच राज्यों- मणिपुर, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और पंजाब में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। 60 विधानसभा सीटों वाले मणिपुर राज्य में विधानसभा चुनाव दो फेज में होंगे। मणिपुर में 27 फरवरी और 3 मार्च को वोटिंग होगी। 10 मार्च को वोटों की गिनती होगी और नतीजों का ऐलान किया जाएगा। मणिपुर में बीजेपी इस समय सत्ता में हैं। वहीं कांग्रेस मुख्य विपक्षी है। इन दोनों दलों में ही इस चुनाव में मुख्य टक्कर मानी जा रही है। इन दोनों बड़े दलों के अलावा कई क्षेत्रीय दल भी चुनाव मैदान में हैं। खासतौर से नेशनल पीपल्स पार्टी और नगा पीपल्स फ्रंट के प्रदर्शन पर निगाहें रहेंगीं। इनके अलावा टीएमसी भी चुनाव लड़ रही है।
मणिपुर में बीते विधानसभा चुनाव यानी 2017 के चुनाव में किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। यहां बहुमत का आंकड़ा 31 सीटों का है लेकिन 2017 में कांग्रेस को इससे तीन कम, 28 सीटें मिली थीं और वो सबसे बड़ा दल थी। भाजपा को 60 में 21 सीटें मिलीं थीं लेकिन सरकार बनाने में कामयाब रही थी। भाजपा ने छोटे दलों को साथ लेकर सरकार बनाई थी।












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