आम खाने वालों के लिए 'बुरी खबर'

इसमें कहा गया है कि संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, बांग्लादेश और अन्य देशों से बढ़ते निर्यात आर्डर के कारण घरेलू उपभोक्ताओं को आम की उपलब्धता की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
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एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने चैंबर के अध्ययन को जारी करते हुए कहा कि भारत भर में आम का उत्पादन करीब 15 से 20 प्रतिशत कम होने की संभावना है जो पिछले वर्ष 1.8 करोड़ टन था और निर्यात भी कम रहने की संभावना है।
अध्ययन में कहा गया है कि अनुमान है कि आम की करीब 50 प्रतिशत फसल प्रभावित हुई। मार्च के आरंभ में बेमौसम बरसात के कारण आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में फलों को भी नुकसान हुआ है।












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