भाजपा के हिंदुत्व से निपटने के लिए ममता बनर्जी राहुल गांधी के रास्ते पर
कोलकाता। गुजरात चुनाव के दौरान जिस तरह से राहुल गांधी ने खुद को हिंदू नेता के तौर पर दिखाने की कोशिश की उसके बाद अब इस कड़ी में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी जुड़ गई है। भाजपा के हिंदुत्व के निपटने के लिए अब ममता ने भी खुद को बतौर हिंदू के तौर पर दिखाना शुरू कर दिया है। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए मायावती ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि वह सहिष्णु हिंदू हैं।

मैं सहिष्णु हिंदू
ममता बनर्जी ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि वह एक सहिष्णु हिंदू हैं, इसके बाद उन्होंने गंगासागर दौरे के दौरान कपिलमुनि आश्रम में मुख्य पुजारी के साथ तकरीबन एक घंटे का समय बिताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं यहा फिर से आउंगी। माना जा रहा है कि ममता ने यह कदम खुद को अल्पसंख्यकों के समर्थक की छवि से बाहर निकालने के लिए यह कदम उठाया है।

भाजपा के वोट बढ़े
जिस तरह से हाल में राज्य के भीतर हुए उपचुनाव के दौरान सबांग और दक्षिण कांति जैसी जगहों पर भाजपा के वोट शेयर में बढ़ोतरी हुई और भाजपा की स्थिति मजबूत हुई उसके बाद ममता बनर्जी ने के इस कदम को इससे जोड़कर देखा जा रहा है। सबंगा में टीएमसी को 106179 वोट मिले थे जबकि भाजपा को 37476 वोट मिले ते। लेकिन यहां याद रखने वाली बात यह है कि 2016 में भाजपा को यहां सिर्फ 5610 वोट मिले थे।

ममता की हिंदू को लुभाने की राह पर
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा ने हिंदुओं को एकजुट करके वोट की संख्या बढ़ाने में सफलता हासिल की है, यही नहीं प्रधानमंत्री मोदी ने अपने खाते में हिंदू के अलावा ओबीसी वोट को भी जोड़ लिया है, साथ ही पार्टी यह संदेश देने में सफल हुई है कि वह सिर्फ ब्राह्मण व सवर्ण वर्ग की पार्टी नहीं है। ममता बनर्जी ने भाजपा की सियासत से निपटने के लिए एससी एडवायजरी काउंसिल बनाने का फैसला लिया है, साथ ही उत्तर बंगाल में राजबंशी के लिए एक वेलफेयर बोर्ड बनाने का भी फैसला लिया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने तारापीठ तारकेश्वर और कालीघाट मंदिर के पुनर्रुद्धार के लिए भी बोर्ड बनवाने का फैसला लिया है।
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