Bengal Chunav: मालदा हिंसा का ‘असली गुनहगार’ फरार? ममता का बड़ा आरोप, कांग्रेस के साथ आने पर भी कही ये बात
Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मालदा के मोथाबाड़ी इलाके में हुई हिंसा को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में असली आरोपी अभी भी गिरफ्त से बाहर हैं, जबकि जांच एजेंसी NIA निर्दोष स्थानीय युवाओं को उठाकर परेशान कर रही है।
मालदा के माणिकचक में आयोजित एक जनसभा में ममता ने आरोप लगाया कि जांच के नाम पर करीब 50 निर्दोष लोगों को हिरासत में लिया गया है। उन्होंने कहा कि जो लोग वास्तव में हिंसा और न्यायिक अधिकारियों के घेराव में शामिल थे, वे आराम से फरार हैं, लेकिन कार्रवाई उन लोगों पर हो रही है जिनका इस घटना से कोई सीधा संबंध नहीं है।

न्यायिक अधिकारियों का घेराव और हिंसा की पूरी कहानी
दरअसल, 1 अप्रैल को मालदा के मोथाबाड़ी इलाके में हालात अचानक बिगड़ गए थे। मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के विरोध में जुटी भीड़ ने हिंसक रूप ले लिया। इस दौरान सात न्यायिक अधिकारियों को बीडीओ कार्यालय के अंदर कई घंटों तक बंधक बनाकर रखा गया, जबकि एक अन्य अधिकारी को गाड़ी में करीब नौ घंटे तक रोका गया।
इस घटना में सड़क जाम, वाहनों में तोड़फोड़ और पुलिस पर हमले जैसी घटनाएं भी सामने आईं। राज्य सीआईडी ने अब तक 35 लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन मामला गंभीर होने के चलते चुनाव आयोग (ECI) के निर्देश पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद NIA को जांच सौंपी गई।
'उकसावे में मत आइए', ममता की कार्यकर्ताओं को सलाह
ममता बनर्जी ने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से साफ तौर पर कहा कि वे किसी भी तरह के राजनीतिक प्रदर्शन या उकसावे से बचें। उन्होंने लोगों से अपील की कि जिनके नाम मतदाता सूची से हटे हैं, वे सड़कों पर उतरने के बजाय ट्रिब्यूनल में आवेदन करें और कानूनी तरीके से अपने नाम जुड़वाएं।
सभा के दौरान जब ममता ने हाथ उठाकर पूछा कि कितने लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटे हैं, तो बड़ी संख्या में लोगों ने हाथ खड़े किए। यह देखकर उन्होंने हैरानी जताई और इसे गंभीर मुद्दा बताया।
BJP पर आरोप-पहले हिंसा, फिर एजेंसियों का इस्तेमाल
ममता ने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर आरोप लगाया कि पार्टी जानबूझकर हिंसा भड़काना चाहती है। उनका कहना था कि पहले माहौल बिगाड़ा जाता है और फिर केंद्रीय एजेंसियों के जरिए लोगों को निशाना बनाया जाता है।
उन्होंने मोथाबाड़ी की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि दो सांप्रदायिक दलों ने न्यायिक अधिकारियों को घेरा और मौके से निकल गए, लेकिन अब कार्रवाई आम लोगों पर हो रही है। उन्होंने संकेत देते हुए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और राष्ट्रीय सेक्युलर मजलिस पार्टी की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
कांग्रेस पर भी तंज-'साथ आते तो तस्वीर अलग होती'
अपने भाषण में ममता बनर्जी ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उन्होंने कई बार कांग्रेस को साथ आने और चुनाव आयोग के पास संयुक्त रूप से जाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन कांग्रेस ने इस पहल में दिलचस्पी नहीं दिखाई।
ममता ने कहा कि आज कांग्रेस चुनाव लड़ने और जीतने की बात कर रही है, लेकिन जब लोगों को समर्थन की जरूरत थी, तब वह उनके साथ खड़ी नहीं हुई। उनके इस बयान को विपक्षी एकता पर एक बड़ा सवाल माना जा रहा है।
'मोटा भाई तैयार रहें'-अमित शाह को खुली चुनौती
ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2026 में दिल्ली की सत्ता बदलेगी और BJP सरकार का पतन होगा। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अमित शाह बंगाल में आकर उन लोगों से बात करें जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं।
ममता ने आरोप लगाया कि केंद्र से फोन करके अधिकारियों को निर्देश दिए जाते हैं कि खास समुदाय के लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके अपने निर्वाचन क्षेत्र में भी वोट काटे गए हैं।
'राष्ट्रपति शासन की साजिश'-पहले भी लगा चुकी हैं आरोप
ममता बनर्जी इससे पहले भी कह चुकी हैं कि मालदा की हिंसा के पीछे बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करने की साजिश हो सकती है। वहीं BJP लगातार इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार पर हमलावर है और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा रही है।
चुनावी माहौल में बढ़ी तल्खी
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर सियासी माहौल पूरी तरह गरमा गया है। राज्य में दो चरणों में मतदान होना है और मतगणना 4 मई को होगी। पहले चरण में 152 सीटों पर वोट डाले जाएंगे और 6 अप्रैल तक नामांकन प्रक्रिया जारी रहेगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि मालदा हिंसा सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह अब चुनावी राजनीति का बड़ा केंद्र बन चुका है। ममता बनर्जी जहां केंद्र और BJP पर हमला कर रही हैं, वहीं विपक्ष इसे राज्य सरकार की विफलता बता रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने वाला है, क्योंकि जांच आगे बढ़ेगी और चुनावी रैलियों में आरोप-प्रत्यारोप और तेज होंगे।












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