मलाला दिवस: मिलिए भारत की 10 'गुमनाम' मलालाओं से
बेंगलोर। लड़कियों की शिक्षा के लिए आवाज उठाने के कारण तालिबान की गोलियों की शिकार बनी मलाला युसुफजई का जन्मदिन मलाला दिवस के रूप में मनाया जाने लगा है। मलाला युसुफजई ने अपने योगदान के बल पर कई मुकाम हासिल किए हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए उन्हेांने पूरी दुनिया को बेहतर संदेश दिया था। संयुक्त राष्ट्र ने प्रत्येक वर्ष 12 जुलाई को मलाला दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।
जानें मलाला से जुड़ी ख़ास बातें-
• मलाला यूसुफजई को उसकी बहादुरी और स्वात की प्रतिकूल परिस्थितियों में महिलाओं की शिक्षा के लिए आवाज उठाने हेतु वर्ल्ड पीस एंड प्रॉस्पेरिटी फाउंडेशन के वीरता पुरस्कार से 19 नवंबर 2012 को सम्मानित किया गया।
• 9 अक्टूबर 2012 को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में तालिबान के आतंकियों ने मलाला यूसुफजई के सिर में गोली मार दी थी।
• मलाला यूसुफजई को फ्रांस के सिमोन डी बेवॉर पुरस्कार से 9 जनवरी 2013 को सम्मानित किया गया।
• वह बीबीसी के लिए ऊर्दू डायरी लिखने के कारण चर्चा में आई थीं।
अब जानें हमारे देश की 10 गुमनाम 'मलाला' को-

तेंदुए से लड़ी मर्दानी
तेंदुए से लड़कर दो लड़कों की जान बचाने वाली हिमाचल की बहादुर बेटी शिल्पा को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार देकर सम्मानित किया था। आज उस पर ना मीडिया की नज़र है और ना ही राजनीति की।

कुमारी जिस्मी का अद्भुत साहस
बहादुरी पुरुस्कार पाने वाली केरल की 14 वर्षीय कुमारी जिस्मी पी एम के नाम का कभी बेशुमार जिक्र हुआ था। कुमारी जिस्मी ने तेज धार में दो बच्चों को डूबने से बचाने के दौरान अदभुत साहस का परिचय दिया था।

खुद की जान गंवाकर दूसरों को बचाया
13 वर्षीय श्रुति लोधी ने पिछले साल उत्तराखंड में पलक झपकते ही अपने दो मित्रों की जान बचाने के लिए उन्हें दूर ढ़केल दिया लेकिन स्वयं को एक पेड़ के नीचे आने से नहीं बचा सकी।

वीरता पुरुस्कार और आसू
दिल्ली में वीरता पुरुस्कार पाने वाली आसू कँवर ने सड़क पर दो बाइक सवारों को ना सिर्फ छेडछाड़ के आरोप में गिरा दिया था, साथ ही उन्हें घसीटते हुए पुलिस के पास भी गई थी।

‘भारत पुरस्कार विजेता'
भारतीय बाल कल्याण परिषद ने राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार का एलान किया था जिसमें आठ वर्षीय दिल्ली की कुमारी महिका का नाम आया था। उसने उत्तराखंड की तबाही में यात्री के तौर पर जवानों की मदद की थी।

खुद को लगा करंट पर दूसरे को बचाया
वीरता पुरस्कार पाने वाली सौभाग्यशाली बालिका मध्यप्रदेश के खरगौन जिले के सनावद की 9 वर्षीय बालिका प्राची संतोष सेन भी बहादुर बेटियों में से एक है। इस बच्ची ने अपनी जान की परवाह किए बगैर चार बच्चों की जान बचाई, जिसमें प्राची का बाया हाँथ करंट से झुलस गया था और अपने हाथों की उंगलियाँ खो दीं थीं।

शोषण के खिलाफ आवाज
दिल्ली की रहने वाली 18 साल की रेनू को दिया गया। रेनू ने बाल सुधार गृह में हो रहे शारीरिक व मानसिक शोषण के खिलाफ आवाज उठाई थीं।

बदमाशों के चंगुल से छुड़ाया
यूपी के छोटे से गांव घसारा से आकांक्षा गौते ने अपने साहसपूर्ण काम से तीन बदमाशों को पकड़वाया। ये बदमाश बमबारी व बारूद हथियारों से लैस गांव में आतंक मचाने आए थे।

ड्रग्स की लत से छुटकारा
इटावा की शान्या ने लगभग दो साल पहले ड्रग तस्करी का भंडाफोड़ किया था। बताया जाता है कि हजारों छात्रों में ड्रग्स की लत लगाई जा रही थी। आज वह भी गुमनाम है।

मलाला यूसुफजई
मलाला यूसुफजई की कहानी भी निराली है। मलाला ने शिक्षा के लिए जागरुकता अभियान शुरु किया। तालिबानी हमले की शिकार मलाला ने यूएन तक का ध्यान खींचा।












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