अधिकारी ने पेश की मानवता की मिसाल, बीमार था ड्राइवर तो रखे उसके हिस्से के रोजे
नई दिल्ली। महाराष्ट्र के बुलढाणा में एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां एक अधिकारी ने मानवता की शानदार मिसाल पेश की। यहां के डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर संजय एन माली ने अपने बीमार ड्राइवर जफर की जगह पर उनके नाम का रोजा रखा है।

ड्राइवर की सेहत नहीं देती रोजे में साथ
माली ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि- '6 मई को मैंने अपने ड्राइवर जफर से पूछा कि क्या वह रमजान का रोजा रख रहा है? तो उसने कहा कि- नहीं कामकाज के बीच मेरी सेहत अभी इसके लिए मेरा साथ नहीं देती।' ऐसे में मैंने उससे कहा कि मैं तुम्हारी जगह रोजा रखूंगा।

6 मई से लगातार रोजा रख रहे माली
उन्होंने बताया कि वे 6 मई से लगातार रोजा रख रहे हैं। माली ने कहा कि मैं सुबह 4 बजे उठकर कुछ खाता हूं और फिर शाम को 7 बजे के बाद अपना रोजा खोलता हूं। माली मानते हैं कि हर किसी को सामुदायिक सौहार्द के लिए अपने हिस्से का काम करना चाहिए।

'हर धर्म हमें कुछ अच्छा सिखाता है'
माली ने कहा कि ये करना सामुदायिक सौहार्दता का आदर्श उदाहरण है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि हर धर्म कुछ न कुछ अच्छा सिखाता है। हमें सामुदायिक सौहार्दता फैलानी चाहिए। हम पहले मानवता को प्राथमिकता देते हैं धर्म बाद में आता है। उन्होंने कहा कि रोजा रखकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।

प्रेग्नेंट महिला को खून देने के लिए तोड़ा रोजा
मानवता की मिसाल पेश करते कई और मामले आते रहते हैं। हाल ही में राजस्थान के चूरू जिले के सुजानगढ़ में प्रसव के दौरान जीवन की जंग लड़ रही एक प्रसूता सावित्री देवी को खून देने में जब रोजा आड़े आया तो मोहम्मद अशरफ नाम के शख्स ने खुशी खुशी रोजा तोड़ा और महिला की जान बचा ली।
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