पढ़िए उस घायल 'शेरनी' की कहानी जिसने टाइगर को लाठियों से भगा दिया
नई दिल्ली। महाराष्ट्र के भंडारा जिले की रहने वाली 21 साल की युवती रुपाली मेश्राम जान की परवाह किए बिना बकरी को बचाने के लिए बाघ से भिड़ गई। इस भिंड़त में रुपाली गंभीर रुप से घायल हो गई। घायल रुपाली ने अपनी लहूलुहान तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की थी। जिसके बाद ये तस्वीरें वायरल हो गईं। रुपाली सकोली तालुका के अंतर्गत आने वाले उसगांव की रहने वाली है। रुपाली के साथ ये घटना 23 मार्च को घटी थी। उसके घर के बाहर बंधी एक बकरी पर बाघ ने हमला कर दिया। आधी रात बकरी की आवाज सुनकर घर से बाहर आई रुपाली ने देखा कि बाघ ने बकरी को दबोच रखा है।

मां बचाई रुपाली की जान
एक डंडे की मदद से रुपाली ने बकरी को बाघ के चुंगल से छुड़ाने की कोशिश की। बाघ ने बकरी को छोड़कर उस पर हमला कर दिया। हालांकि, यह सब देखकर रुपाली की मां ने उन्हें घर के अंदर खींच लिया और दरवाजा बंद कर दिया। इस दौरान दोनों को चोटें आईं। इस हमले में रुपाली मेश्राम को सिर, पैर और हाथ में चोट लगीं। रुपाली ने हमले की सूचना पास में रहने वाले अंकल को दी। उन्होंने वन विभाग को गांव में बाघ होने खबर दी। बाघ के भाग जाने के 30 मिनट बाद वन कर्मी घटनास्थल पर पहुंचे।

रुपाली की मां ने गहने बेच कराया इलाज
लड़की और उसकी घायल मां को जिला अस्पताल भिजवाया। इसके बाद दोनों की गंभीर हालत को देखते हुए नागपुर के मेडिकल कालेज के लिए रेफर कर दिया। रुपाली ने अपने इलाज में खर्च हुए पैसे वन विभाग से मांगे हैं। उसका कहना है कि वन विभाग की ओर से उन्हें इलाज के लिए कोई मदद नहीं मिली है। इलाज के लिए मां को गहने बेचने पड़े हैं।

वन विभाग का दावा बाघ नहीं तेंदुए ने किया था हमला
वन विभाग के उप संरक्षक विवेक होशिंद ने रुपाली के दावे का खंडन करते हुए कहा कि हमला करने वाला जानवर बाघ नहीं था। घटना के स्थान पर जो पैरों के निशान मिले हैं वे तेंदुए के हैं। उस इलाके में बाघ के होने के कोई भी सबूत नहीं मिले हैं।
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