विधानसभा चुनावों में बीजेपी को कहां किन सहयोगी दलों से मिल सकती है चुनौती?

विधानसभा चुनाव 2024: जम्मू और कश्मीर और हरियाणा विधानसभा चुनावों के बाद अक्टूबर-नवंबर महीने में ही महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा के भी चुनाव होने हैं। इन दोनों राज्यों में अबकी बार भाजपा को अपने कुछ नए सहयोगी दलों से भी दो-दो हाथ करना पड़ सकता है।

बिहार-यूपी में भाजपा की तीन सहयोगी पार्टियां झारखंड से लेकर महाराष्ट्र तक विधानसभा चुनावों में उसे चुनौती देती नजर आ सकती हैं। भाजपा की ये सहयोगी पार्टियां वैसे तो विधानसभा चुनावों में पार्टी के साथ गठबंधन करना चाहती हैं, लेकिन मामला नहीं बना तो अकेले भी चुनाव मैदान में उतर सकती हैं।

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झारखंड के कुर्मी मतदाताओं की वजह से नीतीश की पार्टी की दावेदारी!
जैसे बिहार में सत्ताधारी गठबंधन की अगुवा और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू झारखंड में भी विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। पार्टी लगातार अपने विस्तार में लग रही है। पूर्वोत्तर में उसे सफलता भी मिल चुकी है। अबकी बार वह झारखंड में अपना बेस और मजबूत करना चाती है।

झारखंड में जनता दल (यूनाइटेड) के प्रभारी और बिहार में नीतीश सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने ईटी से कहा है, वहां (झारखंड में) 22 फीसदी कुर्मी और 10 फीसदी बिहारी वोटर हैं और हमारे नेता नीतीश कुमार का उनपर सीधा प्रभाव है।'

झारखंड में जेडीयू लड़ना चाहती है 10-11 सीटों पर चुनाव!
पार्टी का कहना है कि एक जमाना था कि झारखंड में उसके चार एमएलए भी रह चुके हैं। चौधरी का कहना है, 'सीटों के बंटवारे को लेकर हमारी पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की बीजेपी से बातचीत चल रही है और जल्द ही फैसला ले लिया जाएगा।'

जदयू से जुड़े लोगों का कहना है कि नीतीश कुमार की पार्टी झारखंड में 10-11 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, इनमें से जमशेदपूर पूर्व विधानसा क्षेत्र भी शामिल है, जहां के मौजूदा निर्दलीय विधायक सरयू राय इस बार पार्टी के प्रत्याशी हो सकते हैं।

पिछले चुनाव में इन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री और भाजपा उम्मीदवार रघुबर दास को हराया था। राय जेएमएम के बागी और पूर्व सीएम चंपई सोरेन को भी जेडीयू में आने का ऑफर दे चुके हैं।

रांची में एलजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में विधानसभा चुनावों पर भी चर्चा
बिहार से बीजेपी की एक और सहयोगी एलजेपी (राम विलास) भी झारखंड में अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्टी हरियाणा के लिए भी संभावनाएं तलाश रही है। झारखंड में चुनाव लड़ने और पार्टी के जनाधार बढ़ाने के इरादे से ही रविवार को रांची में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई है, जिसमें केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को दोबारा पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है।

झारखंड में 28 सीटों पर लड़ सकती है एलजेपी!
इस बैठक के बाद चिराग ने खुद कहा कि इसमें झारखंड, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर विधानसभा को लेकर भी चर्चा हुई। झारखंड के बारे में वे बोले कि राज्य में उनकी पार्टी सहयोगी बीजेपी के साथ या अकेले भी चुनाव लड़ सकती है।

जानकारी के मुताबिक अगर भाजपा के साथ गठबंधन नहीं हो सका तो एलजेपी (आर) राज्य में 28 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की सोच रही है। झारखंड में विधानसभा की 81 सीटें हैं। ऐसे में देखना है कि बीजेपी यहां जेडीयू और एलजेपी के लिए सीटें छोड़ने के लिए तैयार होती है या नहीं। क्योंकि, दोनों ही दलों के साथ झारखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा का गठबंधन पहले नहीं होता रहा है।

SBSP लड़ सकती है महाराष्ट्र में चुनाव
इसी तरह से यूपी में बीजेपी की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) ने इस बार महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में अपनी संभावनाएं देखनी शुरू कर दी हैं।

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर की पार्टी ने इसी महीने पहली बार यूपी से बाहर पार्टी का सम्मेलन किया है, जो कि मुंबई में आयोजित किया गया है। इस पार्टी की नजर वहां उत्तर भारतीय मतदाताओं पर है।

इस तरह से इन तीनों दलों ने अगर अपने-अपने सियासी एजेंडे को आगे बढ़ाया तो भारतीय जनता पार्टी की चुनौती बढ़ भी सकती है।

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