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महाराष्ट्र: ऑपरेशन कमल पर भारी पड़ा पवार का 'पावर', इमोशनल कार्ड से ऐसे जीती बाजी

महाराष्ट्र में भाजपा के 'ऑपरेशन कमल' को शरद पवार ने कैसे दी शिकस्त और किस तरह जीती हारी हुई बाजी, जानिए...

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में एनसीपी नेता अजित पवार के समर्थन से बनी भारतीय जनता पार्टी की सरकार महज चार दिनों के भीतर गिर गई। भाजपा सरकार के खिलाफ शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि राज्यपाल ने असंवैधानिक तरीके से देवेंद्र फडणवीस को सीएम और अजित पवार को डिप्टी सीएम पद की शपथ दिलाई है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में फ्लोर टेस्ट कराए जाने का आदेश दे दिया और फ्लोर टेस्ट से पहले ही सीएम देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम अजित पवार ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इस पूरे घटनाक्रम में भाजपा के 'ऑपरेशन कमल' पर शरद पवार की पावर भारी पड़ी।

अजित को समझाने के लिए शरद पवार ने उतारी खास टीम

अजित को समझाने के लिए शरद पवार ने उतारी खास टीम

दरअसल, भतीजे अजित पवार के भाजपा के साथ जाने के बाद शरद पवार ने एक सधी हुई रणनीति के तहत इमोशनल कार्ड के जरिए भाजपा के 'ऑपरेशन कमल' को शिकस्त दी। शरद पवार ने इस काम के लिए अपने भरोसेमंद और वरिष्ठ नेताओं की टीम को मैदान में उतारा, जिन्हें अजित पवार को मनाने का जिम्मा सौंपा गया। इन नेताओं ने अजित पवार से मुलाकात कर उन्हें समझाने का काम बखूबी किया। सरकार गठन के बाद बदले समीकरणों में एनसीपी के नेताओं ने अजित पवार को भरोसा दिलाया कि अगर वो अपना फैसला बदलते हैं तो उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी और पार्टी में उनकी सम्मानजनक वापसी होगी।

शरद पवार ने खुुद भी दिया अजित को मैसेज

शरद पवार ने खुुद भी दिया अजित को मैसेज

इस दौरान शरद पवार ने अजित पवार को विधायक दल के नेता के पद से तो हटाया, लेकिन पार्टी से नहीं निकाला। यानी शरद पवार ने खुद अजित पवार को मैसेज दिया कि वो अब भी पार्टी में वापसी कर सकते हैं। एनसीपी की तरफ से पार्टी के दिग्गज नेता छगन भुजबल और प्रफुल्ल पटेल ने अजित पवार से बातचीत की। इनमें से छगन भुजबल को खासतौर पर शरद पवार ने अजित पवार को समझाने की जिम्मेदारी सौंपी। यहां तक कि जब देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री कार्यालय में अपना कार्यभार संभालने गए, उस वक्त भी छगन भुजबल लगातार अजित पवार के संपर्क में थे और उन्हें अपना फैसला वापस लेने के लिए समझाने की कोशिश में लगे थे।

सटीक बैठा शरद पवार का दांव

सटीक बैठा शरद पवार का दांव

अजित पवार को लेकर शरद पवार का दांव कितना सटीक रहने वाला है, इसका अंदाजा कांग्रेस आलाकमान को भी था। इसी बात को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने भी बयान दिया कि अगर अजित पवार जरा भी समझदार हैं तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देकर हमारे साथ आ जाना चाहिए। बीते चार दिनों के दौरान एनसीपी के प्रवक्ता नवाब मलिक भी पूरे आत्मविश्वास के साथ यह कहते हुए नजर आए कि अजित पवार को मनाने की कोशिशें लगातार जारी हैं। इसके बाद सोमवार शाम को होटल में 162 विधायकों के एकजुट होने से अजित पवार पर अपना फैसला वापस लेने का दबाव बढ़ गया। अजित पवार को यकीन आ गया कि अब उनके हाथ में कुछ नहीं बचा है।

शरद पवार ने खुद कहा- अब शिवसेना के साथ हूूं

शरद पवार ने खुद कहा- अब शिवसेना के साथ हूूं

शरद पवार ने पार्टी को एकजुट रखने की रणनीति के तहत ही सोमवार को बयान दिया, 'मैं अब शिवसेना के साथ बहुत आगे निकल आया हूं। मैंने शिवसेना को वादा दिया था, इसलिए उनके साथ कुछ भी बुरा नहीं कर सकता। हमें पांच साल तक तीन पार्टियों के साथ सरकार चलानी है, इसलिए हम जल्दबाज़ी में काम नहीं कर सकते।' देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के इस्तीफे के बाद यह भी स्पष्ट हो गया है कि अब महाराष्ट्र में फ्लोर टेस्ट नहीं होगा। शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं ने सोमवार को ही राजभवन जाकर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया था। अब बुधवार को राज्यपाल तीनों दलों के गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे।

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