शरद पवार खा गए भाजपा से गच्चा, लेकिन नीतीश कुमार निकले 'सवा शेर', पढ़िए Inside Story
विपक्ष को एकजुट करने के लिए एनसीपी चीफ शरद पवार ने पूरी ताकत लगा दी थी, लेकिन अब उनकी ही पार्टी उनके हाथ से जाती नजर आ रही। इस मामले में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार काफी शातिर निकले, जिन्होंने बहुत पहले ही बीजेपी के खेल को समझ लिया था, जबकि पवार अनुभवी होने के बाद भी बड़ी गलती कर बैठे।
दरअसल जेडीयू का खेल बिगाड़ने के लिए बीजेपी जीतन राम मांझी पर दांव लगा रही थी, लेकिन नीतीश कुमार बीजेपी की चाल समझ रह थे। जब मांझी का झुकाव बीजेपी की तरफ थोड़ा-थोड़ा हो रहा था, तो ही उन्होंने बड़ा फैसला लेते हुए उनकी पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा को गठबंधन से बाहर कर दिया।

वहीं मांझी के बेटे डॉ. संतोष सुमन के पास बिहार में अनुसूचित जाति जनजाति कल्याण मंत्रालय था। उनसे इस्तीफा भी ले लिया। नीतीश कुमार का आरोप था कि मांझी और उनके बेटे अहम बैठक की सारी बातें बीजेपी को लीक करते थे। ऐसे में उनको ये कदम उठाना पड़ा।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक नीतीश राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं। उनको शक था कि जो आज महाराष्ट्र में हुआ वो किसी दिन बिहार में ही हो सकता था। ऐसे में उन्होंने संभावित खतरे को ही रास्ते से हटा दिया।
शरद पवार ने क्या गलती की?
2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद शिवसेना ने बीजेपी का साथ छोड़ दिया। उस वक्त अजित पवार ने शरद पवार को धोखा दिया और देवेंद्र फडणवीस के साथ बागी विधायकों को ले जाकर सरकार बना ली। हालांकि ये कुछ ही दिन में गिर गई।
इस घटना के बाद भी शरद पवार ने सबक नहीं लिया। उन्होंने अजित को माफ करते हुए उनको नेता प्रतिपक्ष बना दिया। इसके अलावा पार्टी में कई अहम जिम्मेदारी थी। वहीं हाल ही में जब पार्टी हाईकमान में बदलाव हुआ, तो अजित को कोई पद नहीं मिला।
पद नहीं मिलने से अजित पवार नाराज थे, ऐसे में आशंका जताई जा रही थी कि वो फिर से बीजेपी के साथ चले जाएंगे, लेकिन शरद पवार निश्चिंत होकर विपक्षी एकजुटता पर ध्यान देते रहे। उन्होंने उसी वक्त पार्टी पर फोकस किया होता, तो आज ये नौबत ना आती।












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