उद्धव की पार्टी शिवसेना के 15 विधायक बदलेंगे पाला? मोदी के मंत्री का दावा, शरद पवार के खेमे में भी खलबली

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बहुत बड़ा भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। शिवसेना यूबीटी (UBT) के विधायक दल में तीसरी बार बड़ी टूट की खबरें सामने आ रही हैं। इस बार दावा किसी और ने नहीं बल्कि मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले ने किया है।

आठवले के मुताबिक उद्धव ठाकरे के साथ बचे मुट्ठी भर विधायकों में से एक बड़ा ग्रुप बहुत जल्द उनका साथ छोड़ सकता है। इस खबर के बाहर आते ही न सिर्फ ठाकरे गुट बल्कि शरद पवार की पार्टी (NCP SCP) के अंदर भी भारी घबराहट देखी जा रही है।

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टीवी9 मराठी समेत कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई है कि उद्धव ठाकरे गुट के 14 से 15 विधायक इस समय टूटने की कगार पर हैं। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने साफ कहा कि उद्धव ठाकरे के साथ फिलहाल जो 20 विधायक बचे हैं, उनमें से 14-15 विधायक पाला बदल सकते हैं।

आठवले ने यह भी संकेत दिया कि अगर ये नेता महायुति (बीजेपी-शिंदे-अजीत पवार गठबंधन) में शामिल होना चाहते हैं, तो मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से बातचीत करके उनका स्वागत किया जाएगा। हालांकि उन्होंने अभी किसी भी विधायक के नाम या तारीख का खुलासा नहीं किया है।

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अगर 15 विधायक टूटे, तो उद्धव ठाकरे के पास कितने बचेंगे?

आइए अब उस गणित को समझते हैं जो इस समय उद्धव ठाकरे की नींद उड़ाए हुए है। विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों पर नजर डालें तो, उद्धव ठाकरे गुट के पास कुल विधायकों की संख्या 20 है। टूटने की आशंका वाले विधायकों की संख्या 14 से 15 है। अगर यह दावा सच साबित होता है, तो उद्धव ठाकरे के पास सिर्फ 5 से 6 विधायक ही रह जाएंगे।

यह शिवसेना यूबीटी के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका हो सकता है, क्योंकि इससे पहले उनके सांसद और विधान परिषद (MLC) के कई बड़े चेहरे पहले ही एकनाथ शिंदे का दामन थाम चुके हैं।

दलबदल कानून से बचने के लिए एकनाथ शिंदे का 'सुपर 15' प्लान

इस पूरे खेल के पीछे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पार्टी की एक बहुत बड़ी कानूनी और राजनीतिक रणनीति काम कर रही है। सूत्रों की मानें तो शिंदे गुट पिछले कई दिनों से उद्धव ठाकरे के करीब 10 विधायकों के साथ लगातार सीक्रेट मीटिंग्स कर रहा था। ये 10 विधायक पाला बदलने के लिए लगभग राजी हो चुके हैं।

लेकिन कहानी में एक कानूनी पेंच है। दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) की कार्रवाई से बचने के लिए एकनाथ शिंदे को उद्धव गुट के कम से कम दो-तिहाई विधायकों की जरूरत होगी। इसी वजह से शिंदे गुट अब 5 और विधायकों को अपने पाले में लाने की कोशिश में जुटा है।

अगर कुल 15 विधायक एक साथ टूटते हैं, तो उन पर कोई कानूनी आंच नहीं आएगी और वे आसानी से विलय कर सकेंगे। इसके अलावा उद्धव गुट के एक मौजूदा लोकसभा सांसद पर भी डोरे डाले जा रहे हैं।

Amit Shah बोले- 'एक ही शिवसेना बची है', उद्धव गुट में 6 सांसदों की बगावत के बाद अमित शाह के बयान ने मचाई खलबली
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नासिक में पार्षदों को बचाने के लिए उद्धव ठाकरे ने भेजा संकटमोचक

जैसे ही उद्धव ठाकरे को इस बड़ी बगावत की भनक लगी, उन्होंने तुरंत एक्शन मोड में आते हुए अपनी रणनीति तैयार की। खबर है कि नासिक नगर निगम के लगभग 12 पार्षद इस समय एकनाथ शिंदे की शिवसेना के संपर्क में हैं। इस खतरे को भांपते हुए उद्धव ठाकरे ने अपने सबसे भरोसेमंद संकटमोचक रवींद्र मिर्लेकर को फौरन नासिक भेजा।

मिर्लेकर ने वहां पहुंचकर सभी पार्षदों और स्थानीय पदाधिकारियों की एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है, ताकि वक्त रहते इस डैमेज को कंट्रोल किया जा सके और नेताओं को टूटने से बचाया जा सके।

शरद पवार की पार्टी में भी बेचनी, कई बड़े चेहरे महायुति के संपर्क में!

यह खलबली सिर्फ उद्धव ठाकरे के खेमे तक सीमित नहीं है, बल्कि विपक्षी महाविकास आघाड़ी (MVA) के दूसरे बड़े पार्टनर शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के लिए भी खतरे की घंटी बज चुकी है।

चर्चा इस बात कि है कि शरद पवार गुट के कुछ बेहद खास और बड़े विधायक, साथ ही लोकसभा सांसद भी इस समय मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं। बताया जा रहा है कि इन नेताओं के साथ शिंदे गुट की शुरुआती बातचीत काफी पॉजिटिव रही है, जिससे पवार खेमे के अंदर भी भारी बेचैनी का माहौल है।

'मेरी बात मानते तो आज प्रधानमंत्री होते', आठवले ने शरद पवार को दिया NDA में आने का न्योता

इस पूरे राजनीतिक ड्रामे के बीच रामदास आठवले ने शरद पवार को लेकर एक और बड़ा बयान देकर हलचल बढ़ा दी है। आठवले ने शरद पवार को खुलेआम एनडीए (NDA) में शामिल होने का न्योता दे दिया। उन्होंने कहा कि पवार साहब देश के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक हैं और उनके तजुर्बे का फायदा देश और महाराष्ट्र को मिलना चाहिए।

आठवले ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए एक दिलचस्प किस्सा भी साझा किया। उन्होंने कहा, "जब मैं पवार साहब के साथ था, तब मैंने उन्हें अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में करने की सलाह दी थी। अगर उन्होंने उस समय मेरी यह बात मान ली होती, तो शायद वह बहुत पहले ही देश के प्रधानमंत्री बन गए होते।"

फिलहाल शरद पवार या उनकी पार्टी ने आठवले के इस बयान पर कोई ऑफिशियल रिएक्शन नहीं दिया है, लेकिन महाराष्ट्र के बदलते राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए इस बयान के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।

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