Maharashtra politcs: जानिए क्‍या होता है फ्लोर टेस्‍ट और कैसे होती है सदन में वोटिंग

नई दिल्ली। बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस और एनसीपी के अजित पवार के बीच रातों रात हुए गठबंधन से महाराष्ट्र में सरकार गठन के बाद रार थमने की जगह और बढ़ ही गया। यह रार सुप्रीम कोर्ट के आज के फैसले के बाद जिसमें कल फ्लोर टेस्ट करवाने की बात कही गयी है, से कुछ थमता नजर तो जरूर आ रहा है क्योंकि, अब दूध के दूध और पानी के पानी होने का वक्‍त काफी नजदीक है। खैर, अब जब सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट करवाने का फैसला दे दिया है तो एक नजर डालते हैं इसपर कि फ्लोर टेस्ट कैसे होता है और क्रॉस वोटिंग होने पर राजनीतिक पार्टियां क्या कर सकती हैं?

विश्‍वासमत साबित करने की प्रक्रिया

विश्‍वासमत साबित करने की प्रक्रिया

फ्लोर टेस्‍ट किसी सरकार के लिए वह मौका होता है जब वह विधानसभा या लोकसभा में यह साबित कर सकती है कि उसके पास विश्‍वासमत है। इस प्रक्रिया में राज्‍यपाल की तरफ से नियुक्‍त मुख्‍यमंत्री को विधानसभा में बहुमत साबित करना होता है। फ्लोर टेस्ट, इस प्रक्रिया में राज्यपाल का किसी भी तरह से कोई हस्तक्षेप नहीं होता। सत्ताधारी दल के लिए यह जरूरी होता है कि जरूरी सदस्‍य संख्‍या के साथ सदन में अपना बहुमत साबित करे।

अगर सरकार रही असफल तो...

अगर सरकार रही असफल तो...

मुख्‍यमंत्री को विश्‍वासमत प्रस्‍ताव सदन में लाना होता है और फिर जो भी सदस्‍य सदन में मौजूद हैं, उस संख्‍याबल के आधार पर वोटिंग के जरिए बहुमत हासिल करना होता है। अगर विश्‍वासमत हासिल करने में सरकार असफल रहती है तो फिर मुख्‍यमंत्री को इस्‍तीफा देना पड़ता है। संविधान में फ्लोर टेस्‍ट का मकसद संवैधानिक प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना था। महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनावों में बीजेपी सबसे बड़े दल के तौर पर है लेकिन उसके पास बहुमत के लिए जरूरी विधायकों की संख्‍या नहीं है।

अगर टाई हुआ सारा मामला फिर क्‍या होगा

अगर टाई हुआ सारा मामला फिर क्‍या होगा

हो सकता है कल सदन में कुछ विधायक न हों या फिर कुछ विधायक वाटिंग में हिस्‍सा लेना पसंद न करें। इस केस में जो लोग मौजूद हैं उनके आधार पर बहुमत का फैसला होगा और फिर वोटिंग कराई जाएगी। वोटिंग के बाद बहुमत वाली पार्टी सरकार बनाएगी लेकिन अगर मैच टाई रहा तो फिर स्पीकर भी वोट कर सकते हैं।

कैसे होती है वोटिंग

कैसे होती है वोटिंग

व्‍यॉइस वोट- व्‍यॉइस वोट में विधायकों को मौखिक तौर पर जवाब देना होता है।
डिविजन वोट- डिविजन वोट में, वोटिंग इलेक्‍ट्रॉनिक गैजेट्स, स्लिप्‍स या फिर बैलेट बॉक्‍स का प्रयोग होता है।
बैलेट बॉक्‍स-बैलेट बॉक्‍स, आमतौर पर सी‍क्रेट वोटिंग यानी गुप्‍त मतदान के तौर पर जाना जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने मंगलवार के आदेश में महाराष्‍ट्र में गुप्‍त मतदान के लिए मना किया है।

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