अजित पवार को NCP से क्यों नहीं निकाल रहे? इस सवाल पर शरद पवार ने दिया ये जवाब

मुंबई। महाराष्ट्र में सियासी उठापटक के बीच एनसीपी नेता नवाब मलिक ने सोमवार को दावा किया कि उनके पास 165 विधायकों का समर्थन है, जबकि,अजित पवार को छोड़कर 53 विधायक एनसीपी के साथ खड़े हैं, ऐसे में एनसीपी हर हाल में सरकार बनाएगी, अजित पवार से गलती हुई है इसलिए उन्हें पार्टी से इस्तीफा दे देना चाहिए, उन्होंने बीजेपी के साथ जाकर अच्छा नहीं किया है तो वहीं एनसीपी चीफ शरद पवार ने भी एक दिन पहले प्रेसवार्ता में फिर से दोहराया कि बीजेपी के साथ अजित पवार गए हैं ना कि एनसीपी, भाजपा के साथ जाने का फैसला उनके अकेले का है।

अजित को पार्टी से निकालने पर ये बोले NCP चीफ शरद पवार?

अजित को पार्टी से निकालने पर ये बोले NCP चीफ शरद पवार?

लेकिन इन सबके बावजूद शरद पवार अपने भतीजे अजित पवार को मनाने में क्यों लगे हैं, क्यों नहीं उन्हें पार्टी से निकाल देते, जिसके जवाब पर शरद पवार ने कहा कि ये फैसला मेरे अकेले का नहीं है, किसी को निकालने और रखने का फैसला पार्टी की बैठक में सारे नेताओं के विचार-विमर्श के बाद लिया जाता है।

शरद पवार ने अजित पवार को लेकर दिया बड़ा बयान

यह कोई ऐसा मुद्दा नहीं है, जिसके लिए कोई एक व्यक्ति ही फैसला लेगा। इस मामले को लेकर पूरी पार्टी फैसला तय करेगी, पार्टी को यह फैसला तब करना पड़ता है जब मामला उसके सामने आता है, हमें अभी उम्मीद है कि अजित, पार्टी के साथ वापस आ जाएंगे।

दल बदल कानून है वजह

हालांकि शरद पवार ने पार्टी का नाम लेकर अजित पवार को एनसीपी से आउट न किए जाने वाले सवाल को टाल दिया लेकिन राजनीतिक पंडितों के मुताबिक इसके पीछे एक खास वजह है, सियासी जानकारों का मानना है कि शरद पवार राजनीति के पुराने पुरोधा है, उन्हें अच्छी तरह से पता है कि अगर अजित पवार को अभी पार्टी से निकाल दिया जाएगा तो इसका नुकसान उन्हीं को उठाना पड़ेगा, दरअसल अगर पार्टी, अजित पवार को, एनसीपी से बाहर निकालती है तो अजित के ऊपर दल-बदल कानून लागू नहीं होगा।

शरद पवार को पता है कि इससे नुकसान हो सकता है...

शरद पवार को पता है कि इससे नुकसान हो सकता है...

दरअसल दलबदल नियम के अनुसार यदि कोई विधायक या सांसद पार्टी से निकाल दिया जाता है तो उसके ऊपर दल-बदल कानून लागू नहीं होता, इसका उदाहरण उत्तर प्रदेश में तब देखने को मिला था, जब सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने अमर सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया था लेकिन इसके बावजूद अमर सिंह अभी भी स्वतंत्र रूप से राज्यसभा सदस्य हैं।

कहीं कारण इमोशन तो नहीं?

तो वहीं कुछ लोगों का मानना है कि इसके पीछे कारण इमोशन हैं, दरअसल अजित पवार एनसीपी चीफ के परिवार के बड़े बेटे हैं, ऐसे में उन्हें लग रहा हो कि अजित को बाहर करने का मतलब परिवार का टूटना है, उम्र के जिस पड़ाव पर शरद पवार खड़े हैं, वहां कोई नहीं चाहेगा कि उसका परिवार बिखरे, ऐसे में अभी तक अजित पवार को पार्टी में बनाए रखने की ये एक बहुत बड़ी वजह हो सकती है शरद पवार की।

शरद पवार इंतजार कर रहे हैं कि अजित पवार पार्टी छोड़ें...

शरद पवार इंतजार कर रहे हैं कि अजित पवार पार्टी छोड़ें...

इन सबके अलावाअगर एनसीपी अजित पवार को निकालती है तो वह एमएलए बने रहेंगे और पार्टी को एक विधायक का नुकसान उठाना पड़ेगा। इसलिए शायद शरद पवार इंतजार कर रहे हैं कि अजित पवार खुद पार्टी छोड़ें, जिससे उन्‍हें बर्खास्‍त किया जा सके। इससे अजित पवार की विधानसभा सदस्‍यता खत्‍म हो जाएगी। बता दें कि अजित पवार बारामती विधानसभा सीट से विधायक हैं जो कि शरद पवार का गढ़ कहा जाता है।

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