महाराष्ट्र कॉल रिकॉर्डिंग केस में CBI जांच, Fadnavis और भाजपा नेताओं से जुड़ा है मामला
महाराष्ट्र की खुफिया विभाग से लीक हुई कॉल रिकॉर्डिंग मामले में CBI जांच होगी। मुंबई पुलिस ने पूर्व CM फडणवीस समेत बीजेपी नेताओं से जुड़े दो मामलों की जांच सीबीआई को ट्रांसफर की गई है।
मुंबई, 23 जुलाई : महाराष्ट्र सरकार ने एक आदेश जारी कर पुलिस को राज्य के खुफिया विभाग (SID) से संवेदनशील कॉल रिकॉर्डिंग लीक मामले (Maharashtra phone tapping) में CBI जांच का निर्देश दिया है। बता दें कि पुलिस ने मामले की जांच के दौरान महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बयान दर्ज किया था।
बता दें कि देवेंद्र फडणवीस फिलहाल महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम हैं। उनके अलावा भाजपा नेता गिरीश महाजन के मामले में भी अब सीबीआई जांच होगी। गिरीश महाजन और 28 अन्य पर जबरन वसूली और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया गया था। अब ये केस भी सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया है।
बता दें कि उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री रहने के दौरान महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे देवेंद्र फडणवीस ने आरोप लगाया था कि प्लम पोस्टिंग के लिए आईपीएस अधिकारियों ने जबरदस्त लॉबिंग की थी। पोस्टिंग के बदले तत्कालीन महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार में शामिल नेताओं पर पैसे लेने के आरोप भी लगे। इसके बाद मुंबई पुलिस ने मार्च 2021 में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (Official Secrets Act-OSA) के तहत अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
फडणवीस ने कहा था कि उनके पास तत्कालीन एसआईडी कमिश्नर रश्मि शुक्ला द्वारा कथित तौर पर किए गए फोन टैपिंग से प्राप्त कॉल रिकॉर्ड का 6.3 जीबी डेटा है। जिसमें कई प्रमुख पुलिस अधिकारियों के नामों पर चर्चा की गई थी।
फडणवीस के आरोप के बाद MVA सरकार ने तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) सीताराम कुंटे से फोन टैपिंग और रिकॉर्डिंग कैसे लीक हुई थी, इसकी जांच करने को कहा था। इसके बाद, मुंबई पुलिस द्वारा मामला दर्ज किया गया। फडणवीस के अलावा

महाराष्ट्र कॉल रिकॉर्डिंग लीक केस में इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी ) कार्यालय के सूत्रों ने शुक्रवार को पुष्टि की और कहा, अब मुंबई पुलिस ये केस सीबीआई को सौंप रही है।
इसी तरह, भाजपा नेता गिरीश महाजन और 28 अन्य पर जबरन वसूली और आपराधिक साजिश के एक अन्य मामले की जांच भी सीबीआई को ट्रांसफर कर दी गई है। इस मामले में प्राथमिकी वकील विजय पाटिल द्वारा दायर एक शिकायत पर दर्ज की गई थी। विजय जलगांव में एक सहकारी शैक्षणिक संस्थान - जिल्हा मराठा विद्या प्रसार सहकारी समाज के निदेशकों में से एक हैं। उनकी शिकायत पर दिसंबर 2020 में जलगांव के निंभोरा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था। मामले की जांच पुणे के कोथरुड पुलिस स्टेशन को सौंपी गई थी।
कथित वारदात को जनवरी 2018 और दिसंबर 2020 के बीच अंजाम दिया गया था। प्राथमिकी के अनुसार, सभी आरोपियों की आपराधिक साजिश के तहत पाटिल को धमकी दी गई। उन्हें सहकारी शैक्षणिक संस्थान से इस्तीफा देने के लिए भी कहा गया। पाटिल ने आरोप लगाया है कि 2018 में पुणे की यात्रा के दौरान उन्हें जबरन सदाशिव पेठ इलाके के एक फ्लैट में ले जाया गया। बकौल विजय पाटिल, फ्लैट में उन्हें जबरन रखा गया और पैसों की मांग की गई। पाटिल ने कहा कि उन्हें झूठे मामले में फंसाने की धमकी भी दी गई। उन्होंने कहा, जलगांव के सहकारी शैक्षणिक संस्थान पर कब्जे के लिए कुछ संदिग्धों ने जालसाजी भी की।

अब दोनों मामलों की जांच सीबीआई करेगी। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल में मुंबई पुलिस ने फोन टैपिंग मामले में रश्मि शुक्ला के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। उद्धव ठाकरे की सरकार के दौरान देवेंद्र फडणवीस और गिरीश महाजन के मामले खूब सुर्खियों में रहे थे। अब सरकार बदलने के बाद दोनों मामलों की सीबीआई जांच के आदेश दिए गए हैं।












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