Maharashtra Karnataka Bus dispute: कितना गंभीर है विवाद, क्यों शुरू हुआ बवाल? 7 प्वाइंट में पूरी जानकारी

Maharashtra Karnataka Bus dispute: महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच सीमा विवाद आजादी के कुछ वर्षों बाद से ही शुरू हो गया था। हाल ही में फिर से इस मुद्दे पर दोनों राज्यों के बीच तनाव ज्यादा बढ़ गया है। दोनों प्रदेशों के बीच का सीमा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचे भी दशकों से अधिक बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है, जिसकी वजह से समय-समय पर दोनों ही राज्यों को सियासी तलवारें खींचने का मौका मिल जाता है। अभी इस विवाद को ज्यादा गंभीरता से लेने की जरूरत है, क्योंकि दोनों ही राज्यों में अलग-अलग और विरोधी विचारधाराओं वाली सरकारें हैं।

मौजूदा विवाद बेलगावी में एक कन्नड़ बस कंडक्टर के साथ कथित मारपीट और फिर एक मराठी बस कंडक्टर के साथ चित्रदुर्ग में बदसलूकी की वजह से इतना बढ़ गया है कि दोनों राज्यों ने एक-दूसरे प्रदेशों के लिए अंतरराज्यीय बस सेवाएं पूरी तरह से बंद ही कर दी हैं। इसकी वजह से दोनों राज्यों की सीमाओं के नजदीक रहने वाले लोगों को आवाजाही में बहुत ही ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

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आइए इस विवाद को सात अहम बिंदुओं में समझते हैं:

Maharashtra Karnataka Border issue: 1) दोनों राज्यों के बीच विवाद की जड़ क्या है?

यह विवाद 1956 में भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के बाद शुरू हुआ था। महाराष्ट्र का दावा है कि बेलगावी (पहले बेलगाम),निपानी, कारवार समेत 865 गांवों में मराठी बोलने वालों की बहुलता है, इसलिए ये क्षेत्र महाराष्ट्र का हिस्सा होने चाहिए। कर्नाटक इस दावे को नहीं मानता है।

Maharashtra Karnataka Bus dispute: 2) महाजन आयोग की भूमिका क्या रही?

1966 में केंद्र सरकार ने इस विवाद को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व सीजेआई (CJI) मेहर चंद महाजन की अगुवाई में एक आयोग बनाया। महाजन आयोग ने बेलगावी को कर्नाटक का हिस्सा माना, जबकि 264 गांव महाराष्ट्र को देने की सिफारिश की। महाराष्ट्र ने इस रिपोर्ट को नामंजूर कर दिया। हालांकि, कर्नाटक ने इसे स्वीकार कर लिया। मतलब यह रिपोर्ट भी विवाद का समाधान नहीं कर पाई।

Maharashtra Karnataka Bus dispute: 3) सुप्रीम कोर्ट में मामला कहां तक पहुंचा?

महाराष्ट्र ने 2004 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस सीमा विवाद को नए सिरे से उठाते हुए, कर्नाटक को दिए गए हिस्से पर फिर से दावा जताया। यह मामला आज भी लंबित है। 2010 में केंद्र ने अदालत में कहा कि 1956 का राज्य पुनर्गठन अधिनियम वैधानिक था।

Maharashtra Karnataka Bus dispute: 4) कर्नाटक ने कैसे कड़ा रुख अपनाया?

कर्नाटक ने बेलगाम का नाम बदलकर बेलगावी किया और वहां विधानसभा का निर्माण करके शीतकालीन सत्र आयोजित करने शुरू कर दिए। इसे महाराष्ट्र के दावे को कमजोर करने की रणनीति के तौर पर देखा गया। कर्नाटक ने इसे अपनी दूसरी राजधानी बनाने की भी बात कही है।

Maharashtra Karnataka Bus controversy: 5) इससे पहले विवाद कब और क्यों भड़का?

2022 में महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (मौजूदा उपमुख्यमंत्री) ने सीमा क्षेत्रों में रहने वाले इस विवाद से जुड़े आंदोलनकारियों को स्वतंत्रता सेनानियों का पेंशन और मुफ्त इलाज देने की घोषणा की। जवाब में कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने महाराष्ट्र के कन्नड़ स्कूलों के लिए अनुदान का ऐलान किया और महाराष्ट्र के सांगली जिले के जत तालुका के 40 गांवों पर दावा जता दिया। इससे विवाद और गहरा गया।

Maharashtra Karnataka Bus dispute: 6) राजनीतिक दलों का क्या रुख है?

दोनों राज्यों के राजनीतिक दल अपने-अपने राज्यों के पक्ष में एकजुट रहते हैं। महाराष्ट्र विधानसभा ने 2022 में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर कर्नाटक के मराठी बहुल क्षेत्रों को राज्य का हिस्सा बताया और कानूनी लड़ाई जारी रखने की बात कही।

Maharashtra Karnataka Bus dispute: 7) समाधान के लिए आगे क्या हो सकता है?

महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच के सीमा विवाद का हल अदालत से ही संभव है। लेकिन, फिलहाल दोनों राज्यों में तनाव कम करने के लिए संवाद जरूरी है। क्योंकि, इसकी वजह से आम जनता को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

लेकिन, मुश्किल ये है कि महाराष्ट्र में बीजेपी की अगुवाई वाली महायुति (NDA) की सरकार है,वहीं कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी सत्ता में है और यह दोनों ही कट्टर राजनीतिक विरोधी हैं।

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