भाजपा के दंश से बचाने के लिए कांग्रेस अपने विधायकों को भेजेगी भोपाल, NCP भी सुरक्षित ठिकाने की तैयारी में

नई दिल्ली। महाराष्ट्र की सियासत में शनिवार सुबह नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला। भाजपा के देवेंद्र फडणवीस ने सीएम और एनसीपी के अजित पवार ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ले ली। 30 नवंबर तक उनको बहुमत साबित करना होगा। अजित पवार ने एनसीपी के विधायकों का समर्थन भाजपा को होने की बात कही है लेकिन पार्टी प्रमुख शरद पवार ने इसको पूरी तरह खारिज कर दिया है। कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी को अपने विधायकों के टूटने का डर सता रहा है। तीनों पार्टियां अपने विधायकों को महाराष्ट्र के बाहर भेज सकती हैं।

कांग्रेस विधायक जाएंगे भोपाल

कांग्रेस विधायक जाएंगे भोपाल

महाराष्ट्र में भाजपा को 30 नवंबर तक बहुमत साबित करना है। जबकि उसके पास आंकड़े से 40 विधायक कम हैं। दूसरे दल टूट से बचना चाहते हैं। ऐसे में कांग्रेस अपने विधायकों को मध्य प्रदेश भेजने की तैयारी कर रही है। मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है, ऐसे में पार्टी को लगता है कि वहां विधायक रहेंगे तो भाजपा का संपर्क उन तक नहीं हो पाएगा। पार्टी अपने विधायकों को भोपाल के किसी रिजॉर्ट में भेज सकती है।

 एनसीपी -शिवसेना भी सुरक्षित ठिकाने की तलाश में

एनसीपी -शिवसेना भी सुरक्षित ठिकाने की तलाश में

कांग्रेस के अलावा एनसीपी और शिवसेना भी अपने विधायकों को सुरक्षित ठिकाने पर भेजने की तैयारी कर रहे हैं। इन दोनों पार्टियों को भी टूट का डर है। शिवसेना कई मौकों पर पहले भी कह चुकी है कि भाजपा उनके विधायक तोड़ सकती है। वहीं एनसीपी विधायक दल के नेता अजित पवार तो भाजपा को समर्थन दे ही चुके हैं। उन्होंने कहा है कि उनके साथ पार्टी के सभी विधायक हैं, वहीं पार्टी प्रमुख शरद पवार ने कहा है कि अजित अकेले हैं, सभी विधायक उनके फैसले के खिलाफ हैं।

क्या है महाराष्ट्र में दलों की स्थिति

क्या है महाराष्ट्र में दलों की स्थिति

महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव के नतीजे 24 अक्टूबर को आए थे। जिसमें बीजेपी के 105 और शिवसेना के 56 विधायक जीते हैं। कांग्रेस को 44 और एनसीपी को 54 सीटों पर जीत मिली। बहुमत के लिए यहां 145 सीटों की जरूरत है, ऐसे में साफ है कि कोई एक पार्टी अपने दम पर सरकार नहीं बना सकी। अब देवेंद्र फडणवीस के सीएम पद की शपथ लेने के बाद पार्टी बहुमत साबित करने का दावा कर रही है तो दूसरी पार्टियों को टूट का डर हो रहा है।

बता दें कि भाजपा-शिवसेना ने मिलकर चुनाव लड़ा था। दोनों दलों की सीटें भी बहुमत के आंकड़े से ज्यादा आई हैं लेकिन नतीजे आने के बाद शिवसेना ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद पर अड़ गई, तो भाजपा इस पर तैयार नहीं हुई। इसी को लेकर नई सरकार का रास्ता साफ नहीं हो पाया। जिसके बाद महाराष्ट्र में 12 दिसंबर को राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया। इसके बाद एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस के बीच सरकार बनाने को लेकर बातचीत चल रही थी। इसी बीच शनिवार सुबह अचानक ही अजित पवार ने भाजपा के समर्थन की बात कही और देवेंद्र फडणवीस ने सीएम पद की शपथ ले ली।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+