Maharashtra council polls: भाजपा ने जूनियर्स पर भरोसा जताया, सीनियर्स को क्यों चौंकाया ?
नई दिल्ली- भारतीय जनता पार्टी ने महाराष्ट्र विधान परिषद के लिए अपने जिन चार प्रत्याशियों के नाम घोषित किए हैं, उससे पार्टी के टिकट की आस में बैठे चार धुरंधरों को जोरदार झटका लगा है। भाजपा ने वरिष्ठों के बजाय जिन नए नामों पर भरोसा जताया है, वह बहुत ही चौंकाने वाला फैसला बताया जा रहा है। खासकर इसलिए कि जिन 9 सीटों के लिए चुनाव होने हैं उसके हिसाब से पार्टी के पास इतने पर्याप्त वोट हैं कि उनके चारों उम्मीदवार बिना किसी दुविधा के आसानी से उच्च सदन में दाखिला पा जाएंगे। ऐसे में जो दिग्गज अपनी पुनर्वास की उम्मीदों में बैठे हुए थे, उनका मायूस होना बहुत ही स्वाभाविक है। आइए उन आठों नेताओं की सियासी कुंडली खंगालते हैं जिनका सियासी भविष्य फिलहाल चमक गया है और उनके बारे में भी जानते हैं जिनका सारे रसूख के बाद भी पत्ता साफ हो गया है। बड़ी बात ये भी है कि जिन चारों वरिष्ठों के काउंसिल का रास्ता रुका है वो सारे के सारे पहले मंत्री रह चुके हैं।

चंद्रशेखर बावनकुले
तीन बार विधायक रह चुके चंद्रशेखर बावन कुले महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के कद्दावर नेता माने जाते हैं। पिछली देवेंद्र फडणवीस सरकार में वो ऊर्जा और एक्साइज मंत्री थे, बावजूद इसके पार्टी ने उन्हें विदर्भ की उनकी सीट से टिकट नहीं दिया था। यहां से वो लगातार 2004 से ही जीतते आ रहे थे। बावनकुले को भरोसा था कि विधानसभा में विदर्भ क्षेत्र में पार्टी को झटका लगने के बाद उन्हें काउंसिल में भेजकर पार्टी रिझाने की कोशिश जरूर करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। विधानसभा चुनाव के बाद बावनकुले के समर्थकों ने सार्वजनिक तौर पर दावा किया था कि उनका टिकट काटने के चलते भाजपा को विदर्भ में कम से कम 6 सीटों का नुकसान हुआ है। (तस्वीर में बाएं से दूसरे)

विनोद तावड़े
बावनकुले की तरह ही विनोद तावड़े भी महाराष्ट्र भाजपा के बहुत बड़े नेता हैं। 2014 के विधानसभा चुनाव में वो मुंबई की बोरिवली सीट से बहुत बड़े मार्जिन से जीते थे और उन्हें फडणवीस सरकार में उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा मंत्री बनाया गया था। लेकिन, उनपर आरोप लगे कि वे डिपार्टमेंट को उम्मीदों के मुताबिक नहीं चला सके और उनका टिकट भी पिछले विधानसभा चुनाव में काट लिया गया था। तावड़े का भाजपा में कद बहुत ही बड़ा रहा है और महाराष्ट्र में पार्टी के महासचिव और मुंबई भाजपा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। एक समय वह महाराष्ट्र विधानपरिषद में नेता विपक्ष की भूमिका भी निभा चुके हैं। लेकिन, पार्टी ने उन्हें न तो विधानसभा का टिकट थमाया था और न ही परिषद में ही चौथी बार घुसने का मौका दिया है।

पंकजा मुंडे
पंकजा मुंडे की राजनीतिक पहचान पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे के नाम से शुरू हुई थी। 2014 में पिता की सड़क हादसे में निधन बाद पंकजा भाजपा में सक्रिय हुईं और उनका राजनीतिक कद बढ़ता गया। वह भी पिछली फडणवीस सरकार में ताकतवर मंत्री थीं, लेकिन मराठवाड़ा क्षेत्र के बीड जिले की परली विधानसभा सीट से पिछला चुनाव हार गई थीं। हार के बाद उन्होंने पार्टी पर अपनी हार का ठीकरा फोड़ा था और एक वक्त इतनी आक्रमक तेवर में नजर आती थीं कि उनके पार्टी छोड़ने तक की चर्चाएं होने लगी थी। 40 साल की पंकजा को उनके गढ़ में उनके चचेरे भाई और एनसीपी के नेता धनंजय मुंडे ने ही हराया था, जिन्होंने बाद में उद्धव की सरकार बनवाने में अहम किरदार निभाया था।

एकनाथ खडसे
एकनाथ खडसे भी भाजपा के उन वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें पिछले विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं दिया गया था। वो पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से साइडलाइन चल रहे हैं। वह भी देवेंद्र फडणवीस सरकार में मंत्री थे, लेकिन उनपर कई तरह के आरोप लगे थे, जिसके चलते उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इस बार विधान परिषद में घुसने की इच्छा उन्होंने सार्वजनिक तौर पर जाहिर की थी और पार्टी को बनाने में 40 साल के योगदान का वास्ता दिया था, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उनका टिकट काट लिया। फडणवीस सरकार में एक वक्त उनका कद नंबर दो का था और उनके पास नौ-नौ विभाग थे। खडसे जलगांव की मुक्ताईनगर से 6 बार विधानसभा के लिए चुने जा चुके हैं।

प्रवीण दटके
प्रवीण दटके भाजपा के नागपुर नगर अध्यक्ष हैं। वह विदर्भ क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए विधान परिषद में दाखिल होने के लिए तैयार हैं। पार्टी ने दटके को वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बावनकुले की जगह टिकट देकर प्राथमिक दी है।

गोपीचंद पडलकर
2019 के विधानसभा चुनाव में गोपीचंद पडलकर ने बारामती सीट से महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के खिलाफ चुनाव लड़ा था। पडलकर एक धानगर नेता हैं। उनको काउंसिल में लाने का पार्टी का मकसद धानगर समुदाय को अपने साथ एकजुट रखना है।

अजीत गोपचडे
अजीत गोपचडे पेशे से डॉक्टर हैं और उन्हें टिकट देने का फैसला थोड़ा चौंकाने वाला है। अजीत गोपचडे महाराष्ट्र के नांदेड़ इलाके से आते हैं और भारतीय जनता पार्टी के ऑल इंडिया मेडिकल सेल के अध्यक्ष भी हैं। वह महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल के भी उपाध्यक्ष हैं।

रणजीत सिंह मोहिते पाटिल
रंजीत सिंह मोहिते पाटिल पिछले साल लोकसभा चुनाव से पहले एनसीपी छोड़कर भाजपा में आए थे। वह एनसीपी से राज्यसभा के सांसद थे। रणजीत सिंह वरिष्ठ एनसीपी नेता और राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री विजयसिंह मोहिते पाटिल के बेटे हैं। उन्हें काउंसिल में लाने का भारतीय जनता पार्टी का मकसद पश्चिमी महाराष्ट्र में पार्टी का जनाधार मजबूत करना है, क्योंकि इलाके के म्हाडा में उनका राजनीतिक जनाधार माना जाता है।
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