Maharashtra Politics: महायुति में विस्फोटक क्यों हो चुके हैं हालात? चुनावों से पहले मुश्किल में बीजेपी
महाराष्ट्र में बीजेपी, शिवसेना और अजित पवार की एनएसपी वाले सत्ताधारी महायुति गठबंधन में स्थानीय स्तर पर सबकुछ ठीक नहीं है। मुंबई में भले ही सब तरफ शांति नजर आ रही हो, लेकिन लोकल नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच कई जगह हालात विस्फोटक होते जा रहे हैं।
सबसे बड़ा उदाहरण तो उल्हासनगर वाली घटना है, जिसमें बीजेपी के कल्याण ईस्ट के एमएलए गणपत गायकवाड़ ने एक थाने के अंदर शिवसेना के पूर्व कॉर्पोरेटर महेश गायकवाड़ और अन्य कार्यकर्ताओं पर फायरिंग कर दी। लेकिन, जानकारों का कहना है कि यह सिर्फ ऐसा मामला है जो उजागर हो गया है।

महायुति के स्थानीय क्षत्रपों के बीच कई जगह भारी विवाद
कई स्थानीय क्षत्रपों के बीच हालात बेहद नाजुक बताए जाते हैं। राजनीतिक जानकारों की ओर से जो उदाहरण दिए जा रहे हैं, उनमें रायगढ़ में शिवसेना विधायक भरत गोगोवाले और एनसीपी मंत्री अदिति ठाकरे, नाशिक में शिवसेना एमएलए सुहास कांडे और एनसीपी मंत्री छगन भुजबल के बीच और ठाणे/कल्याण में शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे और बीजेपी कोटे से मंत्री रविंद्र चव्हाण के बीच तगड़ा संघर्ष है।
गणपत गायकवाड़ के खिलाफ शिवसेना में भारी नाराजगी
सोमवार को आधा दर्जन से ज्यादा शिवसेना के मंत्रियों ने भाजपा विधायक गणपत गायकवाड़ के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर उपमुख्यमंत्री और राज्य के गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। उनका आरोप है कि गणपत मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं।
अपनी गिरफ्तारी से पहले बीजेपी विधायक ने सीएम शिंदे पर राजनीति में अपराध को बढ़ावा देने और उन्हें करोड़ों रुपए का चूना लगाने का आरोप लगाया था।
शिवसेना का पीड़ित कॉर्पोरेटर सीएम शिंदे के बेटे का करीबी है
दरअसल, महेश गायकवाड़ नाम के जिस शिवसेना नेता पर हमला हुआ है, वे मुख्यमंत्री के बेटे और कल्याण से पार्टी सांसद श्रीकांत शिंदे के बेहद करीबी माने जाते हैं। महेश को 6 गोलियां लगी थीं और एक और शिवसेना कार्यकर्ता राहुल पाटिल 2 गोलियों से जख्मी हुआ है। दोनों अभी तक अस्पताल में ही भर्ती हैं।
बीजेपी कार्यकर्ताओं में अपनी सरकार के खिलाफ ही पैदा हो रही है नाराजगी
बीजेपी की दिक्कत ये है कि उसके 40 कार्यकर्ताओं के खिलाफ केस दर्ज होने से पार्टी के स्थानीय नेताओं में काफी नाराजगी है। ये कार्यकर्ता आरोपी विधायक के समर्थन में अदालत के बाहर नारे लगा रहे थे।
भाजपा के पूर्व एमएलए नरेंद्र पवार ने कहा है कि अपने नेता का समर्थन करने के लिए अगर कार्यकर्ताओं पर केस दर्ज होगा तो कोई कार्यकर्ता पार्टी नेताओं के साथ खड़ा नहीं होगा, चाहे राज्य में अपनी ही सरकार क्यों न हो।
हालात बेहतर करने के लिए मुख्यमंत्री से दखल देने की हो रही है मांग
हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि ठाणे जिले में महायुति गठबंधन के दलों के स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ रहे तनाव को कम करने के लिए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से दखल देने की मांग होने लगी है।
अजित पवार के करीबी और ठाणे में एनसीपी के प्रमुख आनंद परांजपे ने सीएम से सभी सहयोगियों की एक बैठक बुलाने को कहा है।
हमले की घटना को निजी विवाद बताने की हो रही है कोशिश
उधर शिवसेना के प्रवक्ता और शिंदे के करीबी नरेश महास्के का दावा है कि उल्हासनगर में जो फायरिंग की घटना हुई, उसका राजनीति से कोई मतलब नहीं है, वह आपसी विवाद की वजह से हुआ है।
राजनीति के एक जानकार का कहना है, 'ये घटनाएं प्रदेश में नेतृत्व की ओर से नियंत्रण की कमी दिखाती हैं, क्योंकि क्षेत्रीय क्षत्रप स्थानीय स्तर पर निराशा महसूस कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के गृह जिले ठाणे में सबसे ज्यादा दिक्कत है। गणपत गायकवाड़ वाली घटना तो सिर्फ ऐसी घटना है, जो सामने आ गया है।'
उनके मुताबिक कई मामलों में ऐसा तूफान उठ सकता है, जो लोकसभा चुनावों से पहले गठबंधन को बहुत ज्यादा परेशानी में डाल सकता है। अगर कल्याण लोकसभा सीट का उदाहरण लें तो यहां की 6 विधानसभा सीटों में से 3 पर बीजेपी और शिवसेना का का सिर्फ 1 सीट पर विधायक है। बाकी दोनों सीट एनसीपी और एमएनएस के पास हैं।
ऐसे में बीजेपी नेताओं का दावा है कि अगर इस सीट पर लोकसभा चुनाव में पार्टी का उम्मीदवार उतरेगा तो उसकी जीत आसान हो सकती है। लेकिन, अभी यहां से सीएम शिंदे के बेटे सांसद हैं। इसी तरह का चुनावी समीकरण गठबंधन की एकता को कमजोर कर रहा है।












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