Maharashtra Election: कौन होगा महायुति के CM का चेहरा, BJP ने बनाई दूर की रणनीति, क्या मानेंगे शिवसेना-NCP?
Maharashtra Vidhan Sabha Chunav: महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री के मुद्दे पर 2019 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की अगुवाई वाला जीता हुआ गठबंधन टूट चुका है। इसलिए इस बार के विधानसभा चुनाव से पहले ही बीजेपी ने इस पद पर अपनी दावेदारी अभी से जताने की तैयारी कर ली है।
अभी 288 सीटों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में बीजेपी के पास उसके सहयोगी निर्दलीय विधायकों को मिलाकर 114 एमएलए का समर्थन है। जबकि, महायुति सरकार को इसके अलावा एनसीपी के 42 और शिवसेना के 39 विधायकों का समर्थन है। फिर भी, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे हैं, जिनके पास गठबंधन में सबसे कम विधायक हैं।

मुख्यमंत्री के पद की दावेदारी के लिए भाजपा की रणनीति
इसलिए बीजेपी ने अक्टूबर-नवंबर में होने वाले चुनाव से पहले महायुति गठबंधन में मुख्यमंत्री पद की दावेदारी के लिए अपनी रणनीति तैयार कर ली है। पार्टी को उम्मीद है कि वह निश्चित तौर पर 100 से ज्यादा सीटें जीतेगी और इसके साथ ही मुख्यमंत्री के पद पर उसका स्वाभाविक दावा होगा।
शिवसेना का कहना है कि सीएम पद पर नहीं करेंगे समझौता
बीजेपी ने हाल ही में कहा भी था कि जिस भी पार्टी के पास सबसे ज्यादा विधायक होंगे, मुख्यमंत्री का पद उसी को मिलना चाहिए। दूसरी तरफ सीएम शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना कह चुकी है कि सीएम पद पर किसी तरह का समझौता नहीं होगा।
पार्टी के एक नेता ने कहा, 'सीएम पद पर कोई समझौता नहीं होगा, शिंदे सीएम पद पर बने रहेंगे।' पार्टी का तर्क है कि महायुति सरकार इसी वजह से बनी है शिंदे की अगुवाई में ही शिवसेना में बगावत हुई थी।
बीजेपी 160 सीटों पर चुनाव लड़ने का ठोक रही है दावा
शनिवार को भाजपा के एक नेता ने कहा है कि विधानसभा चुनाव में पार्टी महायुति गठबंधन में कम से कम 160 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहेगी।
इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी की रणनीति का भी खुलासा कर दिया।
100 से ज्यादा सीटें जीतेंगे और सीएम पद पर दावा करेंगे- बीजेपी
उन्होंने कहा, '160 सीटों पर कोई समझौता नहीं होगा। बातचीत के दौरान हम इस संख्या पर जोर देंगे। हमें पूरा विश्वास है कि हम 100 से ज्यादा सीटें जीतेंगे और तभी जाकर हम मुख्यमंत्री के पद पर दावा करेंगे।'
2019 में क्या था बीजेपी-शिवसेना के गठबंधन का समीकरण
2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में 288 सीटों में से शिवसेना के साथ गठबंधन में बीजेपी 164 सीटों पर लड़कर 105 सीटें जीती थी। वहीं उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली तत्कालीन शिवसेना ने 126 सीटों पर लड़कर 56 सीटों पर सफलता दर्ज की थी।
कम से कम 80-80 सीटों पर दावा कर रही हैं एनसीपी-शिवसेना
लेकिन, इस बार अजित पवार की एनसीपी के भी गठबंधन में होने की वजह से सीट बंटवारे का पेच फंस रहा है। एक एनसीपी नेता ने कहा है कि हम 100 सीटों पर दावा ठोकेंगे और शिवसेना भी इतनी ही सीटें मांगेगी। उस नेता के मुताबिक, 'एनसीपी और शिवसेना 100-100 सीटें मांग रही हैं, हमें उम्मीद है कि 80-80 सीटों पर बात बन जाएगी।'
बीजेपी कम सीटों पर लड़ने के लिए कैसे तैयार होगी?
इस तरह से 288 सीटों में से अगर भाजपा को दोनों सहयोगियों को 160 सीटों पर भी राजी करना पड़ गया तो उसके लिए सिर्फ 128 सीटें ही बच पाएंगी। ऊपर से कुछ और छोटे सहयोगियों को भी साथ रखने का सवाल सामने आएगा। वैसे एनसीपी नेता ने यह भी कहा है कि आखिरी फैसला दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में लिया जाएगा।
भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये हो गई है कि हाल में हुए लोकसभा चुनावों में उसका प्रदर्शन उम्मीदों से कहीं ज्यादा खराब हुआ है। पार्टी 2019 से अधिक सीटें लड़कर भी सिर्फ 9 सीटें ही जीत सकी है। वहीं शिवसेना को 7 और एनसीपी को 1 सीट मिली है। ऐसे में बीजेपी के लिए दोनों सहयोगियों से मोल भाव करना इस बार ज्यादा कठिन लग रहा है।












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