नए संसद भवन के लिए 'सेंगोली' सौंपने वाले मदुरै के पुजारी ने 2024 में पीएम मोदी की वापसी को लेकर बोली ये बात
नए संसद भवन के लिए 'सेंगोली' पीएम मोदी जो पुजारी भेंट करेंगे, उन्होंने 2024 में प्रधानमंत्री की वापसी के लिए बोली ये बात

नए संसद भवन का उद्घाटन 28 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। जो सेंट्रल विस्टा के पुनर्विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर होगा। नए संसद भवन में सुबह स्पीकर की कुर्सी के पास 'सेंगोल' स्थापित किया जाएगा इस अवससर पर जो प्रार्थना सभा होगी उसमें शंकराचार्य सहित कई बड़े विद्वान, पंडित और संत मौजूद रहेंगे।
पीएम मोदी को सौंपेगे ऐतिहासिक सेंगोली
मदुरै अधीनम यानी मुख्य पुजारी हरिहर देसिका स्वामीगल रविवार को नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान पीएम को ऐतिहासिक सेंगोल सौंपने वाले हैं। उन्हीं पुजारी ने प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी आम चुनाव में तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर बड़ा बयान दिया है।
मदुरै के प्रधान पुजारी ने पीएम मोदी की वापसी को लेकर बोली ये बात
मदुरै अधीनम के मुख्य पुजारी श्री हरिहर देसिका स्वामीगल ने शुक्रवार को कहा नरेंद्र मोदी को 2024 में फिर से भारत के प्रधान मंत्री के रूप में वापस आना चाहिए। उन्होंने कहा पीएम मोदी एक ऐसे नेता हैं जिन्हें वैश्विक सराहना मिली है। वह लोगों के लिए अच्छे काम कर रहे हैं। 2024 में उन्हें फिर से पीएम बनना है और लोगों का मार्गदर्शन करना चाहिए। पुजारी ने कहा हम सभी को बहुत गर्व है क्योंकि विश्व नेता हमारे पीएम मोदी की सराहना कर रहे हैं।
सेंगोल एक महीने में बनकर हुआ था तैयार
मदुरै के प्रधान पुजारी ने कहा कि हम 'सेंगोल' के निर्माता हैं। इसे बनाने में हमें एक महीने का समय लगा था, यह चांदी और सोने से बना है। पुजारी ने कहा वुम्मिदी बंगारू ज्वैलर्स के चेयरमैन वुम्मिदी सुधाकर ने इस ऐतिहासिक राजदंड सेंनगोल को बनाया था।मैं उस समय 14 साल का था... हम पीएम मोदी के आभारी हैं।
देश के पहले पीएम को भेंट किया गया था ये सेंनगोल
बता दें भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को 14 अगस्त की रात को उनके आवास पर 'सेंनगोल' भेंट किया गया।यह अंग्रेजों से भारत में सत्ता के हस्तांतरण के प्रतीक का प्रतिनिधित्व करता है।
इसी सेंनगोल को सौंपकर सत्ता का हस्तांतरण हुआ था
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस घटना को याद करते हुए बताया था कि आजादी के 75 साल बाद भी भारत में ज्यादातर लोगों को इस घटना की जानकारी नहीं है, जिसमें पंडित जवाहर लाल नेहरू को 'सेनगोल' सौंपकर भारत की सत्ता का हस्तांतरण हुआ था। 14 अगस्त, 1947 की रात को भारत की आजादी का जश्न मनाने का यह एक विशेष अवसर था।
अमित शाह ने बताया महत्व
अमित शाह ने बताया इस रात को जवाहरलाल नेहरू ने तमिलनाडु में थिरुवदुथुराई अधीनम (मठ) के अधीनम (पुजारियों) से 'सेनगोल' प्राप्त किया, जो विशेष रूप से भारत की स्वतंत्रता के लिए पहुंचे थे। यह ठीक वह क्षण था जब अंग्रेजों द्वारा सत्ता भारतीयों के हाथों में स्थानांतरित की गई थी। हम जिसे स्वतंत्रता के रूप में मना रहे हैं, वह वास्तव में 'सेंगोल' को सौंपने के क्षण से चिह्नित है।
जानें क्या है सेंगोल का अर्थ
शाह ने कहा कि पीएम मोदी ने अमृत काल के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में 'सेंनगोल' को अपनाने का फैसला किया। उन्होंने दावा किया कि संसद का नया भवन उसी घटना का गवाह बनेगा, जिसमें अधीनम (पुजारी) समारोह को दोहराएंगे और पीएम को 'सेनगोल' देंगे। "'सेंगोल' अर्थ में गहरा है, जो तमिल शब्द 'सेम्माई' से लिया गया है, जिसका अर्थ है "धार्मिकता"।












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