मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के 3 अधिकारियों को 14 दिन के लिए भेजा जेल, जानिए क्या है मामला?
हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने माइनर पोर्ट पर तैनात तीन अधिकारियों को अदालत की अवमानना का दोषी पाया है। सभी को 14 दिन के लिए जेल भेजा गया है।
मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने राजमार्ग और माइनर पोर्ट विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रदीप यादव, तिरुनेलवेली जिले के मुनांचीपट्टी में जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान के तत्कालीन प्रिंसिपल बूपाला एंडो और तिरुनेलवेली जिले के मुनांचीपट्टी में जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान के तत्कालीन प्रिंसिपल बूपाला एंडो को 15 दिन के लिए जेल भेज दिया गया है। कोर्ट के आदेश के बाद अब ये तीनों अधिकारी 14 दिन तक जेल में रहेंगे।
याचिका पर न्यायमूर्ति बट्टू देवानंद की खंडपीठ ने सुनवाई की। अदालत ने तिरुनेलवेली के पी. ज्ञानप्रकाशम द्वारा 2020 में दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद बुधवार को फैसला सुनाया। कोर्ट की अवमानना का दोषी पाए जाने पर स्कूल शिक्षा विभाग के पूर्व सचिव दो सप्ताह के कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा शिक्षक शिक्षा अनुसंधान और प्रशिक्षण के तत्कालीन निदेशक मुथुप्पलानिचामी और तिरुनेलवेली जिले के मुनांचीपट्टी में जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान के तत्कालीन प्रिंसिपल बूपाला एंडो को 2 सप्ताह की जेल की सजा सुनाई।

मामले में वर्ष 2020 में दोषी तीनों अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई के लिए 9 अगस्त या फिर उससे पहले मदुरै पीठ के न्यायिक रजिस्ट्रार के समक्ष आत्मसमर्पण का निर्देश दिया गया था। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, जिसके बाद अदालत में पी ज्ञानप्रकाशम ने वर्ष 2020 में अवमानना याचिका दायर की थी। याचिका पर सुनावाई पूरी होने बाद दोषी पाए जाने पर हाईकोर्ट ने उन्हें दो सफ्ताह की जेल की सजा और 1000 रुपए जुर्माने से दंडित किया है।
क्या है मामला?
दरअसल, पी ज्ञानप्रकाशम को ओलियास्थानम शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान में वर्ष 1966 में स्वीपर व माली के रूप में नियुक्त किया गया था। वहां पूर्णकालिक आकस्मिक कर्मचारी के रूप में काम करने के बाद, 40 साल की सेवा के बाद, वह 2006 में सेवानिवृत्त हुए। कोर्ट को ज्ञान प्रकाशम् अवगत कराया गया था कि राज्य सरकार ने उन सभी आकस्मिक कर्मचारियों को लाने के लिए एक सरकारी आदेश जारी किया है, जिसके तहत पांच साल नियमित काम करने वाले कर्मचारियों का वेतन सबसे निचली श्रेणी को लाभ के दायरे में लाने का प्रयास किया जा रहा है। ज्ञान प्रकाशन में सरकारी आदेश को लागू करने की मांग की थी। लेकिन उसका हित नहीं हो रहा। उन्होंने सेवा को नियमित करने के लिए राज्य को कई बार आवेदन दिया था। चूंकि अभ्यावेदन पर विचार नहीं किया गया, इसलिए उन्होंने पहले राहत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने अधिकारियों को सेवा नियमित करने और सभी मौद्रिक लाभ देने का निर्देश दिया। लेकिन अदालत के निर्देश का अनुपालन नहीं किया गया था।
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