मध्य प्रदेश चुनाव में JDU ने क्यों उतारे कांग्रेस के खिलाफ उम्मीदवार? पार्टी प्रमुख ने बताई वजह

जेडीयू अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह 'ललन' ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के खिलाफ उम्मीदवार उतारने के नीतीश कुमार की पार्टी के फैसले का बचाव किया है। राज्य में इंडिया ब्लॉक में इसकी सहयोगी कांग्रेस का मुकाबला सीधे बीजेपी से है, लेकिन गठबंधन के सहयोगी दलों के चुनाव लड़ने की वजह से इसको लेकर बातें हो रही हैं।

बिहार में जेडीयू पिछले साल बीजेपी के साथ थी। उसे झटका देने के बाद विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया ब्लॉक बनाने में पार्टी सुप्रीमो और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ही बड़ी भूमिका निभाई है।

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संगठन के विस्तार की कोशिशें नहीं करेंगे-ललन सिंह
लेकिन, मध्य प्रदेश चुनाव में 230 सीटों में से पार्टी ने 5 उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। जब पटना में इसको लेकर ललन सिंह से पत्रकारों ने सवाल पूछे तो उन्होंने कहा , 'क्या हम अपने संगठन के विस्तार की कोशिशें नहीं करेंगे....।'

राज्यों में अलग तरह की परिस्थितियां-जेडीयू
उन्होंने यह भी सफाई दी कि 'इंडिया गठबंधन लोकसभा चुनावों में बीजेपी को हराने के लिए बना है, लेकिन राज्य विधानसभाओं में अलग तरह की परिस्थितियां होती हैं। उदाहरण के लिए कांग्रेस और सीपीएम दोनों केरल में एक-दूसरे के खिलाफ लड़ते हैं। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और लेफ्ट ऐसा ही करते हैं।'

जेडीयू अध्यक्ष के निशाने पर केंद्र सरकार
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की सफलताओं के प्रचार के लिए सरकारी अधिकारियों की 'रथ प्रभारियों' के रूप में नियुक्ति का फैसला बीजेपी कैडरों में 'भरोसे की कमी' को उजागर करता है।

बीजेपी और पीएम मोदी के खिलाफ भी बोला हमला
नीतीश के बहुत ही करीबी माने जाने वाले जेडीयू नेता ने दावा किया कि 'प्रधानमंत्री को पता है कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता पार्टी के अंदर लोकतंत्र की कमी की वजह से दबा हुआ महसूस कर रहे हैं.....उन्हें सरकार के प्रति बढ़ते जन-असंतोष का भी सामना करना पड़ रहा है....... जो कि काला धन वापस लाने और साल में दो करोड़ नौकरियां पैदा करने जैसे अपने वादों को पूरा करने में बुरी तरह नाकाम रही है।'

उनका आरोप है कि 'भ्रष्टातार के मुद्दे पर भी मोदी सरकार ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है। सीएजी ने केंद्र की प्रमुख योजना आयुष्मान भारत योजना में गंभीर अनियमितताओं को उजागर किया है......लेकिन, सरकार में इन सबकी जांच कराने की हिम्मत नहीं है.....।'

यही नहीं उन्होंने अग्निवीर जवानों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा कि इनकी चार साल में ही सेवाएं समाप्त हो जाती हैं, न कोई फायदा मिलता है और ऊपर से ड्यूटी के दौरान जान जाने पर भी शहीदों को मिलने वाली सुविधाएं मिलती हैं।

गौरतलब है कि जेडीयू एक बार पहले भी भाजपा का साथ छोड़कर कांग्रेस और आरजेडी के साथ महागठबंधन बना चुकी है, लेकिन जल्द ही वह दोबारा एनडीए का हिस्सा बन गई थी। लेकिन, पिछले साल अचानक नीतीश ने फिर से पलटी मार ली और उसके बाद भाजपा-विरोधी दलों को गोलबंद करना शुरू कर दिया। (इनपुट-पीटीआई)

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