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मध्यप्रदेश चुनाव में जीत का बीजेपी ने बनाया अचूक फार्मूला, क्या विरोधी निकाल पाएंगे इसकी काट ?

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    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में आगामी नवंबर-दिसंबर में विधानसभा के चुानाव होना संभावित है और इसे लेकर वहां जमीनी स्तर पर सरंगर्मियां भी काफी तेज हो गई हैं। राज्य में टक्कर तीन कार्यकाल से सत्तासीन बीजेपी और कांग्रेस के बीच रही है लेकिन इसमें छोटे दलों की भी अपनी भूमिका होगी। साथ ही हर चुनाव की तरह कई ऐसे मुद्दे रहेंगे जो वोटों का गणित बिगाड़ और बना सकते हैं। पार्टियां बूथ स्तर पर मैनेंजमैंट से लेकर बड़ी सभाओं तक सभी चीजों को प्लान कर रही हैं। ऐसे में एक मुद्दा धार्मिक आस्था का भी है। चुनावों में पार्टियों ने हमेशा लोगों की आस्था का अपने लिए इस्तेमाल किया है। बेशक सीधे तौर पर आवाहन ना भी होते हों पर चुनावों के वक्त धार्मिक स्थानों पर नेताओं की मौजूदगी मतदाताओं और समुदायों के लिए साफ संकेत होता है।

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    न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के अनुसार मध्यप्रदेश में चुनावों से पहले सत्तारूढ़ बीजेपी वहां के मंदिरों, मठों के संचालकों, साधु, संन्यासियों के बारे में जानकारी जुटा रही है। बीजेपी की इस कवायद को विधानसभा चुनाव की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि बीजेपी ने खुद इसका खुलासा नहीं किया है कि वो इन आंकड़ों का क्या करेगी।

    बीजेपी की गुप्त रणनीति

    बीजेपी की गुप्त रणनीति

    पीटीआई से बात करते हुए बीजेपी के प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने बताया कि " हां, हमने मंदिरों, मठों और इनसे जुड़े पुजारियों और संतों की जानकारी हासिल की है। " अग्रवाल ने बताया कि पार्टी ने बूथ स्तर पर सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं और समाज में असरदार लोगों का डाटा भी एकत्र किया है और हम इन लोगों से संपर्क करेंगे लेकिन इसके पीछे पार्टी की रणनीति क्या है अग्रवाल ने उसका खुलासा नहीं किया। खबर है कि बीजेपी ने प्रदेश में फैले 65 हजार मतदान केंद्रों के इलाकों में स्थित सभी मंदिरों, हिन्दू धर्मस्थलों, मठों इनके संचालक साधु, संतों, पुजारियों और इनसे जुड़े श्रद्धालुओं, सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं और अन्य महत्वपूर्ण लोगों के बारे में जानकारी जुटाई है। ये भी कहा जा रहा है कि पार्टी ने ये कवायद हाल ही में हुए एक पोल सर्वे के बाद की है जिसमें बीजेपी की हार की संभावना जताई गई थी।

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    कांग्रेस को भी मंदिरों का सहारा

    कांग्रेस को भी मंदिरों का सहारा

    कांग्रेस भी मंदिर दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहती है । खबर है कि मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ चुनावों में पार्टी राहुल गांधी को मंदिर-मंदिर भेजने की योजना बना रही है। इसकी शुरूआत महाकाल उज्जैन से होगी और ऐसे 10 मंदिर होंगे जहां राहुल गांधी मत्था टेकेंगे। इससे पहले प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद कमलनाथ ने भी सबसे पहले मंदिरों की तरफ ही रुख किया था। सबसे पहले वो भोपाल स्थित हनुमान मंदिर गए,वहां पर जमकर भजन-कीर्तन भी किया, इसके बाद उन्होंने उज्जैन में महाकाल के दर्शन किए और फिर दतिया की पीतांबरा पीठ में हाजिरी लगाई। वरिष्ठ कांग्रेसी दिग्विजय सिंह तो पहले ही नर्मदा यात्रा कर चुके हैं।

    माइक्रो लेवल पर प्लानिंग

    माइक्रो लेवल पर प्लानिंग

    साफ है कि पीछले 15 साल से मध्यप्रदेश में सत्ता की बागडोर संभाल रही बीजेपी इस बार भी किसी तरह का जोखिम नहीं उठानी चाहती है। पार्टी जानती है कि अगर उसके हाथ से मध्यप्रेदश फिसला तो इसका असर 2019 के लोकसभा चुनाव पर भी पड़ेगा। पार्टी माइक्रो लेवल पर अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी है और उसी के हिसाब से तमाम मुद्दों पर रणनीति बना रही है। बता दें कि बीजेपी उत्तर प्रदेश में भी 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर मंदिर, मठों, महंत और पुजारियों के आंकड़े जुटा रही है। इसके पीछे पार्टी का इरादा मठों और मंदिर के पुजारियों की बदौलत उनके भक्तों के वोट साधना है। पार्टी अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या का भी आंकड़ा भी जुटा रही है।

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    English summary
    Madhya Pradesh Assembly polls 2018: BJP Collects Data On Temples, Hindu Priests and influential people of the state.

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