मलखान सिंह और मोहर सिंह, चंबल के दो बागी, एक भाजपाई तो दूसरा कांग्रेसी
भिंड। सीएम शिवराज सिंह चौहान मंगलवार को अटेर विधानसभा क्षेत्र के परा गांव में सभा के लिए पहुंचे। मंच पर उनके साथ मलखान सिंह भी बैठे नजर आए। शिवराज के भाषण से पहले मलखान ने लोगों को संबोधित किया। उनका अंदाज ऐसा कि लोग हर बात पर ताली बजा रहे थे। इसी प्रकार से लहार में वह केंद्रीय मंत्री उमा भारती के साथ बैठे नजर आए। कभी चंबल के बीहड़ में खौफ का दूसरा नाम थे मलखान सिंह, जो अब भिंड के सबसे बड़े सियासी चेहरों में एक हैं। अब भले ही वह डकैत नहीं हैं और राजनीति में आ गए हैं, लेकिन मुकाबला यहां भी दिलचस्प चल रहा है। भिंड में बीजेपी के लिए वोट मांग रहे मलखान सिंह का सामना मोहर सिंह के साथ है, जो कांग्रेस के लिए काम कर रहे हैं।

शिवराज की तरह मलखान भी मामा के नाम से मशहूर
80 के दशक में चंबल को दहलाने वाले मलखान सिंह इन दिनों को कांग्रेस को कुछ यूं कोस रहे हैं। वह कहते हैं, 'हमने डकैतगीरी नहीं की, जो डाकूगीरी करते हैं, वो नष्ट हो जाते हैं। उनका कोई नामलेवा नहीं बचेगा। मलखान का तो नाम बार-बार लिया जाता है, लोग मलखान को डाकू के नाम से सम्मान देते हैं।' परा गांव में एक सभा के दौरान मलखान सिंह ने कहा कि बागी बनना आसान नहीं होता, चरित्रवान ही बागी बनता है। मलखान सिंह भी सीएम शिवराज की तरह भिंड के इलाके में मामा के नाम से मशहूर हैं। भिंड, शिवपुरी और मुरैना के इलाकों में मलखान सिंह का खास प्रभाव है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को वोट दोगे तो चंबल में डाकू ही डाकू दिखाई देंगे।

जमीन विवाद के चलते चंबल के बीहड़ में कूद गए थे मलखान सिंह
मलखान सिंह 100 बीघा जमीन के विवाद की वजह से बागी हो गए थे। चंबल के बीहड़ में उस समय ऐसा कोई डकैतों का गिरोह नहीं था, जिसके पास पुलिस से ज्यादा गोली-बम हों, लेकिन मलखान सिंह का गिरोह अलग था। उनके गिरोह की बंदूक में पुलिस से ज्यादा गोली भरी थीं। मलखान ने 80 के दशक में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के समक्ष हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया था। मलखान बताते हैं कि आत्मसमर्पण के दौरान उन्होंने जब अपनी मशीन गन सरेंडर की थी, एसपी भी उसे खोल नहीं पाए थे। हालांकि, उन्होंने यह खुलासा आज तक नहीं किया कि उनके पास इतने आधुनिक हथियार कहां से आते थे।

इंदिरा गांधी की वजह से जिंदा हैं, इसलिए कभी नहीं छोड़ा कांग्रेस का साथ
एक तरफ बीजेपी के पास मलखान सिंह हैं तो दूसरी ओर कांग्रेस का दामन थामा हुआ है मोहर सिंह ने। 100 से ज्यादा डकैतों के सरदार रहे मोहर सिंह कहते हैं कि अगर हम आज जिंदा हैं तो इंदिरा गांधी की वजह से, इसलिए कभी कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ा। करीब 90 वर्ष के हो चुके मोहर सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

चंबल के डकैतों में सबसे ज्यादा इनाम था मोहर सिंह के सिर पर
मोहर सिंह बताते हैं कि जब वह चंबल के बीहड़ों में उतरे तब उनकी उम्र बहुत कम थी। पहले तो उन्होंने सोचा कि घाटी में किसी बड़े गिरोह में शामिल होकर पहले कुछ सीख लिया जाए, लेकिन उन्हें किसी ने काम नहीं दिया। बाद में मोहर सिंह ने 150 डकैतों का अपना गैंग बना लिया। मोहर सिंह के गिरोह पर उस समय सबसे ज्यादा 12 लाख इनाम पुलिस ने रखा था। अकेले मोहर सिंह के सिर पर दो लाख का इनाम घोषित करके पुलिस ने उन्हें चंबल का सबसे महंगा बागी घोषित कर दिया था। खुद को सबसे महंगा बागी घोषित किए जाने के बारे में मोहर सिंह कहते हैं कि उस वक्त सभी गिरोहों को समझ आ गया था कि अब मोहर सिंह गैंग की बंदूकों की गोली ही चंबल का कानून होगा।

कभी नहीं डाला किसी की बहू-बेटी पर हाथ
मोहर कहते हैं कि उन्होंने कभी किसी औरत के साथ बदसलूकी नहीं की। गिरोह के हर सदस्य को हिदायत थी कि, जो भी बागी/डाकू किसी औरत के संपर्क में जाएगा उसे गोली से उड़ा दिया जाएगा। वह कहते हैं कि आज भी उनका नाम इज्जत के साथ लेते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि मोहर सिंह ने कभी किसी को बहू-बेटी पर हाथ नहीं डाला। मोहर सिंह कहते हैं कि औरतों की इज्जत की वजह से ही जिंदा रहने में कामयाब रहे और अपना गैंग भी बचा लिया।












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