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12 करोड़ की जीती लॉटरी, कितना पैसा मिलेगा इस खेतिहर मज़दूर को?

By इमरान क़ुरैशी

12 करोड़ रुपए की लॉटरी जीतने वाले पेरुन्नन राजन

वो बेहद घबराहट भरे स्वर में बोले, "मुझे अभी तक पैसा नहीं मिला है. बैंक ने मुझे नहीं बताया है कि पैसा कब तक आएगा."

ये शब्द आप किसी भी ऐसे शख़्स के मुंह से सुन सकते हैं, जिसे अपने खाते में कुछ पैसे आने का इंतज़ार हो. लेकिन, यहां किसी छोटी-मोटी रक़म की बात नहीं हो रही है. यहां बात हो रही है पूरे सात करोड़ 20 लाख रुपए की.

केरल के कुन्नूर ज़िले में रहने वाले 58 साल के पेरुन्नन राजन को इतना ही पैसा अपने खाते में आने का इंतज़ार है. खेतों में मज़दूरी करने वाले राजन ने केरल सरकार की लॉटरी स्कीम का टिकट ख़रीदा था और क्रिसमस की लॉटरी में उन्होंने 12 करोड़ रुपए जीते. टैक्स कटने के बाद उन्हें 7.20 करोड़ रुपए मिलेंगे.

इतनी बड़ी रक़म जीतकर राजन इतने उत्साहित हैं कि वो बैंक से लिए लोन भी ठीक से याद नहीं कर पा रहे हैं. बीबीसी हिंदी से बातचीत करते हुए राजन कहते हैं, "एक बैंक का पाँच लाख बकाया है. एक और लोन भी है. मैंने अभी तक कोई लोन नहीं चुकाया है, लेकिन मैं सबसे पहले लोन ही चुकाऊंगा."

बेटे रिजिल, बेटी अक्षरा और पत्नी रजनी के साथ राजन

सबसे पहले चुकाएंगे लोन

जब हमने राजन से पूछा कि वो इन रुपयों का क्या करेंगे, तो उन्होंने कहा, "मैंने अभी कुछ सोचा नहीं है. सबसे पहले तो मैं लोन चुकाना चाहता हूं. उसके बाद सोचूंगा कि मुझे इस पैसे का क्या करना है."

राजन मालूर के थोलांबरा इलाक़े में खेतों में मज़दूरी करते हैं. यह एक आदिवासी इलाक़ा है.

लॉटरी लगने के बाद के पलों के बारे में राजन बताते हैं, "जब हमें पता चला कि मेरी लॉटरी लगी है, तो हम सभी बहुत ख़ुश हुए. सबसे पहले तो हम इस बात की तस्दीक़ करने बैंक गए कि क्या वाक़ई हमारी लॉटरी लगी है."

राजन के साथ उनकी पत्नी रजनी, बेटी अक्षरा और बेटा रिजिल भी बैंक गया था.

राजन का स्थानीय को-ऑपरेटिव बैंक में खाता है. उन्होंने लॉटरी का टिकट उसी बैंक में जमा किया था. वहां से उन्हें कुन्नूर ज़िले की को-ऑपरेटिव ब्रांच जाने के लिए कहा गया. जब हमने राजन से बात की, तब वो कुन्नूर की ब्रांच ही जा रहे थे.

हर दिन ख़रीदते थे पाँच टिकट

थोलांबरा सर्विस को-ऑपरेटिव सोसायटी बैंक के सेक्रेटरी दामोदरन के. बताते हैं, "जब वो हमारे पास आए थे, तब वो एकदम भौंचक्के तो नहीं लग रहे थे, लेकिन कुछ घबराए हुए से ज़रूर थे. हम उन्हें अच्छी तरह से जानते हैं. वो नियमित रूप से यहां आते हैं. उन्होंने 50,000 रुपए का एक कृषि लोन और 25,000 रुपए का एक अन्य लोन ले रखा है. वो ब्याज का पैसा चुकाने हमेशा यहां आते हैं, लेकिन मूल रक़म अब भी बक़ाया है."

लॉटरी जीतने के बाद परिवार के साथ राजन

राजन बताते हैं कि वो बड़ी रक़म जीतने की उम्मीद में हर दिन पाँच टिकट ख़रीदते थे. अब लगता है कि उनकी सारी तपस्या सफल हो गई. तीन बार 500 रुपये की रक़म जीतने के बावजूद राजन कई बरसों तक अपनी दिहाड़ी मज़दूरी का एक हिस्सा लॉटरी टिकटों पर लगाते रहे. केरल में खेतों में मज़दूरी करने वालों को 800 रुपये की दिहाड़ी मिलती है.

राजन की पत्नी रजनी पड़ोस के घरों में काम करती हैं. इन्होंने अपने बेटे-बेटियों को ग्रैजुएशन तक की पढ़ाई कराई. इनकी बड़ी बेटी शादी करके कहीं और बस चुकी हैं. छोटी बेटी अक्षरा हाईस्कूल में पढ़ती हैं. बेटा रिजिल राजन के साथ खेतों में दिहाड़ी मज़दूरी करता है.

BBC Hindi
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English summary
A lottery of 12 crores won, how much money will this agricultural laborer get?
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