महाजन लेंगी नेता प्रतिपक्ष पर चार दिन में फैसला! कांग्रेस न खुश न दुखी हो सकती है अभी!

विवेकाधिकार प्राप्त नहीं है
सुमित्रा महाजन का मानना है कि लोकसभा स्पीकर को किसी सदस्य को अपनी ओर से नेता प्रतिपक्ष नियुक्त करने का विवेकाधिकार नहीं है। लेकिन इसके लिए पूर्व में बने नियमों का अध्ययन करके पद पर किसी को नियुक्त किया जा सकता है। इसके लिए पहले बने नियमों के आधार पर ही निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह उदाहरणों और नियमों का अध्ययन करने के बाद ही फैसला ले सकती हैं।
कई बार नहीं रहा नेता प्रतिपक्ष
लोकसबा अध्यक्ष ने उदाहरण देते हुए बताया कि पूर्व में सदन में एलओपी नहीं होने के कारण नेता प्रतिपक्ष नहीं रहा है। पहला एलओपी 1969 में ही बना था। तो तब नेता प्रतिपक्ष नहीं बनाया गया था। क्योंकि इससे पहले किसी पार्टी की लोकसभा में 10 प्रतिशत सीटें नहीं थीं। 1980 और 1984 में भी कोई नेता प्रतिपक्ष नहीं था।












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