Lok Sabha Speaker Election: तीन बार पहले भी हो चुका है स्पीकर का चुनाव, जानिए क्यों नहीं बनी थी सहमति

Lok Sabha Speaker Election: संसद में आज लोकसभा स्पीकर का चुनाव होने जा रहा है। एनडीए की ओर से ओम बिरला तो विपक्ष की ओर से के सुरेश मैदान में हैं। दिलचस्प बात यह है कि देश के इतिहास में चौधी बार ऐसा है जब लोकसभा स्पीकर के पद के लिए चुनाव होने जा रहा है।

सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच स्पीकर पद के लिए आम सहमति बनाने की कोशिश विफल रही थी। विपक्ष ने ओम बिरला को समर्थन देने के लिए शर्त रखी कि डिप्टी स्पीकर विपक्ष का होगा।

Loksabha Speaker Election

लेकिन सत्ता पक्ष ने इससे इनकार कर दिया, जिसके बाद अब स्पीकर पद को लेकर दोनों ही पक्ष आमने-सामने हैं। आइए डालते हैं एक नजर इससे पहले तीन बार हुए लोकसभा अध्यक्ष के लिए चुनाव पर।

1952 में पहली बार हुआ स्पीकर का चुनाव

देश आजाद होने के बाद पहली बार देश में लोकसभा चुनाव 1952 में हुआ था। प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने जीवी मालवांकर के नाम को आगे बढ़ाया था, जोकि आजादी के लड़ाई में प्रमुख चेहरा थे।

उनका ताल्लुक गुजरात से था, वह संविधान सभा के भी सदस्य थे। मालवांकर के नाम का समर्थन संसदीय कार्य मंत्री सत्य नारायण सिन्हा, दरभंगा से सांसद एसएन दास और गुड़गांव से सांसद पंडित ठाकुर दास भार्गव ने किया था।

लेकिन भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के फाउंडर सांसद एके गोपालन और 16 अन्य सांसदों ने शंकर शांताराम मोरे के पक्ष में प्रस्ताव आगे बढ़ाया। मोरे के नाम का समर्थन रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के नेता बहरामपुर से सांसद टीके चौधरी, ट्रेड यूनियन नेता और मावेलिक्करा से सांसद एनएस नायर, सीपीआई नेता रेणु चक्रवर्ती ने किया था।

दिलचस्प बात है कि इस बार विपक्ष की ओर से के सुरेश भी मावेलिक्करा से सांसद हैं। पहली बार जब स्पीकर का चुनाव हुआ था उस वक्त भी विपक्ष डिप्टी स्पीकर पद की मांग कर रहा था। संयोग से इस बार भी विपक्ष की ओर से डिप्टी स्पीकर पद की मांग के चलते स्पीकर पद के लिए चुनाव हो रहा है।

1967- नीलम संजीव रेड्डी बनाम टी विश्वनाथम
एक बार फिर से जब सदन में आम सहमति नहीं बनी तो 1967 में स्पीकर पद के लिए चुनाव हुआ। उस वक्त इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं। गोविंद दास प्रोटेम स्पीकर थे। कांग्रेस की ओर से नीलम संजीव रेड्डी को मैदान में उतारा गया तो टी विश्वनाथम जोकि निर्दलीय सांसद थे, उन्हें सीपीआई के समर्थन से विपक्ष का उम्मीदवार बनाया गया।

उस वक्त मांग की गई कि वोटिंग सीक्रेट वोटिंग होनी चाहिए। तमाम चर्चा के बाद पेपर स्लिप के जरिए वोटिंग हुई। सीक्रेट वोटिंग में नीलम संजीव को जीत मिली और वह 278 वोट से स्पीकर बनें। जबकि विश्वनाथम को 207 वोट मिले।

1976- बीआर भगत बनाम जगन्नाथ राव जोशी
आपात काल की वजह से संसद का पांचवां सत्र आगे बढ़ाया गया था। इस दौरान कांग्रेस की ओर से बीआर भगत को स्पीकर पद का उम्मीदवार बनाया गया था। लेकिन भावनगर से सांसद पीएम मेहता ने जोशी के नाम को स्पीकर पद के लिए आगे बढ़ाया।

जोशी जनसंघ के सदस्य थे। उनके नाम का समर्थन हाजीपुर से कांग्रेस सांसद डीएन सिंह ने किया था। हालांकि 344 वोट के साथ भगत स्पीकर चुने गए, जबकि जोशी के पक्ष में सिर्फ 58 वोट पड़े।

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