MPs Oath in Lok Sabha: क्या भारत की संसद में 'जय संविधान' नहीं बोला जा सकता? ओम बिरला पर प्रियंका का तंज
MPs Oath Ceremony in Lok Sabha 2024: लोकसभा चुनाव 2024 के बाद संसद का पहला सत्र आज यानी गुरुवार से चालू हुआ। नवनिर्वाचित लोकसभा सदस्यों ने शपथ ग्रहण की। इसी बीच, तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी 18वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली। इस दौरान, स्पीकर ओम बिरला के तल्ख तेवर नजर आए। इसपर, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने तीखा प्रहार किया है।
प्रियंका ने बिरला के बयान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि, क्या भारत की संसद में 'जय संविधान' नहीं बोला जा सकता? संसद में सत्ता पक्ष के लोगों को असंसदीय और असंवैधानिक नारे लगाने से नहीं रोका गया, लेकिन विपक्षी सांसद के 'जय संविधान' बोलने पर आपत्ति जताई गई।

प्रियंका ने आगे कहा कि चुनावों के दौरान सामने आया संविधान विरोध अब नये रूप में सामने है, जो हमारे संविधान को कमजोर करना चाहता है। आगे कहा कि जिस संविधान से संसद चलती है, जिस संविधान की हर सदस्य शपथ लेता है, जिस संविधान से हर नागरिक को जान और जीवन की सुरक्षा मिलती है, क्या अब विपक्ष की आवाज दबाने के लिए उसी संविधान का विरोध किया जाएगा?
क्या कहा था ओम बिरला ने?
दरअसल, शपथ के दौरान थरूर ने संविधान की एक प्रति हाथ में लेकर अंग्रेजी में शपथ ली। साथ ही 'जय हिंद, जय संविधान' के साथ अपना भाषण खत्म किया। विपक्षी सदस्यों ने थरूर के 'जय संविधान' के नारे को दोहराया, जिससे अध्यक्ष को उन्हें याद दिलाना पड़ा कि वे पहले से ही संविधान की शपथ ले रहे हैं।
इनते में, हरियाणा से कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने तर्क दिया कि स्पीकर को आपत्ति नहीं करनी चाहिए थी। स्पीकर ने पलटवार करते हुए कहा कि किस बात पर आपत्ति करनी है और किस बात पर नहीं, इस पर सलाह मत दीजिए। बैठ जाइए।
कट-टू-कट में समझें क्या हुआ?
- शपथ लेने के बाद शशि थरूर ने कहा- 'जय संविधान'
- ओम बिड़ला: आपने पहले ही संविधान की शपथ ले ली है, तो कहने की क्या जरूरत है ?
- दीपेंद्र हुड्डा : इस पर आपको आपत्ति नहीं होनी चाहिए सर।
- ओम बिरला : मुझे सलाह मत दीजिए, चलो बैठो, तुम बस बैठो।
3 जुलाई तक चलेगा सत्र
18वीं लोकसभा का पहला सत्र सोमवार को सभी नवनिर्वाचित सांसदों के शपथ ग्रहण के साथ शुरू हुआ और 3 जुलाई तक चलेगा। दो दिवसीय शपथ ग्रहण समारोह के बाद 26 जून को लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव हुआ। ओम बिरला लगातार दूसरी बार अध्यक्ष चुने गए। विपक्षी नेताओं ने सदन में अपनी बढ़ी हुई ताकत का बार-बार उल्लेख करके और अध्यक्ष को 'तटस्थ और निष्पक्ष' रहने का आह्वान करके एक मजबूत मुद्दा उठाया।












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