BJP की सूची जारी होते ही अखिलेश-मायावती ने इस सीट पर चला 'मास्टर स्ट्रोक', पड़ेगा बड़ा असर!

भाजपा की पहली सूची जारी होते ही अखिलेश यादव और मायावती ने BJP के इस मजबूत गढ़ में अपना मास्टर स्ट्रोक चल दिया है।

नई दिल्ली। 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने अपनी पहली सूची के तहत यूपी की 28 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। भाजपा की इस सूची के जारी होते ही यूपी के सियासी समीकरण एक बार फिर बदलते हुए नजर आ रहे हैं। दरअसल, भाजपा की सूची में गाजियाबाद सीट पर केंद्रीय मंत्री वीके सिंह को दोबारा टिकट दिया गया है। पहले चर्चा थी कि वीके सिंह का टिकट काटकर उन्हें कहीं और से चुनाव लड़ाया जा सकता है। वीके सिंह को टिकट मिलने के बाद अब समाजवादी पार्टी ने इस सीट पर अपना प्रत्याशी बदलते हुए बसपा नेता को पार्टी में शामिल कर गाजियाबाद से टिकट दे दिया है। आपको बता दें कि 'वन इंडिया' ने 19 तारीख को ही अपनी खबर में बता दिया था कि अखिलेश यादव गाजियाबाद सीट पर 'कैराना फॉर्मूले' का इस्तेमाल कर सकते हैं।

'कैराना वाले फॉर्मूले' का इस्तेमाल

'कैराना वाले फॉर्मूले' का इस्तेमाल

पश्चिमी यूपी की वीआईपी सीट और भाजपा का मजबूत गढ़ कहे जाने वाले गाजियाबाद में सपा और बसपा ने एक बार फिर से 'कैराना वाले फॉर्मूले' का इस्तेमाल किया है। अखिलेश यादव ने गाजियाबाद सीट पर बसपा के पूर्व विधायक सुरेश बंसल को समाजवादी पार्टी की सदस्यता दिलाते हुए इस सीट से सपा का प्रत्याशी घोषित कर दिया है। पहले गाजियाबाद सीट पर समाजवादी पार्टी की तरफ से पूर्व विधायक सुरेंद्र कुमार शर्मा उर्फ मुन्नी शर्मा को उम्मीदवार बनाया गया था। आपको बता दें कि इससे पहले 2018 में यूपी के कैराना में सपा की उम्मीदवार तबस्सुम हसन को आरएलडी के टिकट पर चुनाव लड़ाया गया था और उन्होंने जीत हासिल की थी।

भाजपा की सूची का था इंतजार

भाजपा की सूची का था इंतजार

दरअसल गाजियाबाद के जातीय समीकरणों को देखते हुए सपा और बसपा ने यह बड़ा बदलाव किया है। कांग्रेस ने गाजियाबाद सीट से मेयर का चुनाव लड़ चुकीं डॉली शर्मा को टिकट दिया है। कांग्रेस की तरफ से ब्राह्मण उम्मीदवार उतारे जाने के बाद ब्राह्मण वोटों का बंटवारा होने की आशंका के चलते और भाजपा की तरफ से वीके सिंह को टिकट दिए जाने के बाद, वैश्य उम्मीदवार उतारकर सपा ने इस सीट पर अपना मास्टर स्ट्रोक चला है। सुरेश बंसल गाजियाबाद सीट से बसपा के विधायक रह चुके हैं और शहर के व्यापारियों में उनकी पकड़ भी मानी जाती है। बहुजन समाज पार्टी से जुड़े सूत्रों की मानें तो सपा-बसपा के शीर्ष नेतृत्व के बीच इस बात को लेकर लखनऊ में गहन चर्चा हुई कि बदले हुए समीकरणों को देखते हुए उम्मीदवार को लेकर फिर से विचार किया जाए।

क्या कहते हैं गाजियाबाद के आंकड़े?

क्या कहते हैं गाजियाबाद के आंकड़े?

गाजियाबाद लोकसभा सीट पर करीब 27 लाख वोटर हैं। इनमें से ठाकुर, ब्राह्मण, वैश्य और त्यागी मतदाताओं की संख्या करीब 34 फीसदी है। गाजियाबाद में करीब 1.5 से 2 लाख ब्राह्मण मतदाता हैं। वहीं अनुसूचित जाति के वोटरों की संख्या करीब 5 से 6 लाख और मुस्लिम वोट 3 से 4 लाख के करीब है। इनके अलावा ओबीसी मतदाताओं की संख्या यहां 35 फीसदी है, जिनमें जाट, गुर्जर और यादव आदि जातियां शामिल हैं। 2009 के लोकसभा चुनाव में गाजियाबाद सीट से वर्तमान गृह मंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता राजनाथ सिंह चुनाव लड़े। राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के सुरेंद्र प्रकाश गोयल को 90681 वोटों के अंतर से हराया। इसके बाद हुए 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां से वर्तमान केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह चुनाव लड़े और उन्होंने 567260 वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की। इस सीट पर पिछले 30 सालों के चुनाव परिणाम पर नजर डालें तो केवल 2004 के लोकसभा चुनाव में यहां कांग्रेस नेता सुरेंद्र प्रकाश गोयल ने जीत का परचम लहराया था। इससे पहले 1991, 1996, 1998 और 1999 तक लगातार चार बार यहां से भाजपा के रमेश चंद तोमर सांसद रहे।

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